बांग्लादेश: छात्र लीग के सदस्यों की गिरफ्तारी और राजनीतिक हिंसा के आरोपों पर विवाद

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Navbharat Times
ढाका, 12 अक्टूबर (आईएएनएस)। बांग्लादेश के ढाका में अवामी लीग से जुड़े छात्र संगठन, छात्र लीग के पांच नेताओं और कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया है। यह कार्रवाई धनमंडी इलाके में तकवा मस्जिद के पास हुई। यहां महासचिव महफुजुल हैदर चौधरी रोटन के जनाजे की नमाज के समय ब BNP के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने इन लोगों को रोका और उनसे मारपीट की। इसके बाद, पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। रोटन का हाल ही में कोलकाता में निधन हो गया था और उनका शव ढाका लाया गया था। इस घटना ने बांग्लादेश में राजनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया है।

रविवार दोपहर को, रोटन के जनाजे की नमाज के समय भारी संख्या में छात्र लीग के सदस्य वहां इकट्ठा हुए थे। स्थानीय मीडिया के अनुसार, बीएनपी के नेताओं ने मस्जिद के पीछे इन छात्र लीग के सदस्यों को रोका। धनमंडी थाने के प्रभारी मुहम्मद इमदादुल इस्लाम तायेब ने कहा कि इन लोगों को जुलूस निकालने के दौरान गिरफ्तार किया गया। इलाके में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया गया था।
महासचिव रोटन का कई सालों से कैंसर का इलाज चल रहा था। उनका निधन शनिवार को कोलकाता के अपोलो अस्पताल में हुआ। उनका अंतिम संस्कार बेहद संवेदनशील रहा क्योंकि इस दौरान राजनीतिक समूहों के बीच झड़पें हुईं। इस स्थिति ने उस समय को और ज्यादा तनावपूर्ण बना दिया जब शोक मनाने वाले लोग संबद्ध पक्षों के हमलों का निशाना बन गए।

अवामी लीग के नेता और पूर्व मंत्री मोहम्मद अली अराफात ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा, "एक मृत राजनीतिक नेता के अंतिम संस्कार को पुलिस कार्रवाई और राजनीतिक हिंसा का निशाना कैसे बनाया जा सकता है?" उन्होंने यह भी बताया कि पुलिस और बीएनपी से जुड़े संगठनों के कार्यकर्ताओं ने श्रद्धांजलि देने आए लोगों पर हमला किया और कुछ को पुलिस के हवाले कर दिया।

अराफात ने सोशल मीडिया पर लिखा कि "पुलिस और बीएनपी से जुड़े संगठनों के कार्यकर्ताओं ने अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में बाधा डाली और श्रद्धांजलि देने पहुंचे आम लोगों के खिलाफ भीड़ हिंसा को बढ़ावा दिया।" उन्होंने इस घटना को चिंताजनक बताया और कहा कि इससे यह स्पष्ट होता है कि कानून-व्यवस्था बलों और सत्तारूढ़ दल के कार्यकर्ताओं के बीच किस तरह का सहयोग है।

अराफात ने आगे कहा, "जनाजे की नमाज एक मूल धार्मिक रस्म है, लेकिन पुलिस ने इसमें बाधा डाली और बीएनपी कार्यकर्ताओं ने शोक मनाने आए लोगों को डराने-धमकाने तथा हिंसा का सहारा लिया।" उन्होंने बांग्लादेश की मौजूदा स्थिति पर चिंता जताते हुए सवाल किया कि ऐसा कौन सा शासन है, जो लोगों को उनके मृतकों का शांतिपूर्वक शोक मनाने का अधिकार नहीं देता।

उनका कहना था, "जनाजे की नमाज में बाधा डालना और शोक मनाने वालों के खिलाफ हिंसा तथा पुलिस कार्रवाई करना लोगों के मूल अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है।" उन्होंने चेताया कि इस प्रकार की घटनाएं बांग्लादेश में धार्मिक स्वतंत्रता, नागरिक अधिकारों, कानून के शासन और लोकतंत्र पर गंभीर सवाल उठाती हैं।

इस घटनाक्रम ने बांग्लादेश में राजनीतिक माहौल को और भी संवेदनशील बना दिया है। देश में विवाद और हिंसा की भर्त्सना की जा रही है, और इस मामले में आगे की कार्रवाई की प्रतीक्षा की जा रही है।

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