नवरात्रि में मां दुर्गा को प्रिय भोग: लौंग, ज्वार, किशमिश और उनके स्वास्थ्य लाभ

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Navbharat Times
नई दिल्ली, 13 अक्टूबर (आईएएनएस)। पूरे देश में शारदीय नवरात्रि का त्योहार धूमधाम से मनाया जा रहा है। इस दौरान भक्त माँ दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए कई न्योते चढ़ाते हैं। इनमें लौंग, ज्वार-ज्वारे का रस, पान का पत्ता, किशमिश, गुड़, तिल और इलायची शामिल हैं। ये चीजें न केवल देवी को प्रिय हैं, बल्कि आयुर्वेद में भी इनका उपयोग सेहत के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है। नवरात्रि के इस पावन मौके पर गुप्त नवरात्रि में इन चीजों का भोग चढ़ाने से व्यक्ति को आध्यात्मिक और शारीरिक लाभ मिलते हैं।

दांत दर्द, माइग्रेन और पाचन की समस्या में राहत देने के लिए लौंग का उपयोग बहुत फायदेमंद होता है। इसमें यूजेनॉल नामक तत्व होता है। यह तत्व एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण प्रदान करता है। इसी वजह से लौंग को आयुर्वेद में खास महत्व दिया जाता है। खांसी और सर्दी-जुकाम से राहत पाने के लिए भी लौंग उपयोगी होती है। इसके अलावा, पेट में गैस और एसिडिटी की समस्या को दूर करने में भी लौंग मदद करती है। चबाने से मुंह ताजा महसूस होता है और इम्यूनिटी भी बढ़ती है।
ज्वार का रस आयुर्वेद में अमृत तुल्य माना जाता है। यह विटामिन, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है। ज्वारे का रस न केवल शरीर के अंदर से साफ करता है बल्कि ब्लड शुगर को काबू में रखने में भी मदद कर सकता है। यह डायबिटीज के मरीजों के लिए भी फायदेमंद है। इसके अलावाव, ज्वार का रस पाचन में सुधार करता है और वजन घटाने में सहायक होता है। जोड़ों के दर्द और सूजन से राहत पाने के लिए भी यह रस कारगर सिद्ध होता है। कलश स्थापना में इसका इस्तेमाल भी बेहद खास माना जाता है।

पान का पत्ता आयुर्वेद में पाचन और श्वसन स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए जाना जाता है। इसमें एंटीसेप्टिक गुण होते हैं, जो बैक्टीरिया से लड़ने में मदद करते हैं। पान का पत्ता मुंह की दुर्गंध को दूर करने में भी सहायक है। यह कब्ज, एसिडिटी और खांसी से राहत दिलाता है। पान के पत्ते में मौजूद विटामिन सी और कैल्शियम इम्यूनिटी बढ़ाते हैं। कात्यायनी देवी की आराधना के समय पान का पत्ता मुंह में रखना भी जरूरी समझा जाता है।

किशमिश को देवी की प्रिय चीजों में माना जाता है। आयुर्वेद की दृष्टि से यह रक्त शोधक और बलवर्धक मानी जाती है। किशमिश आयरन से समृद्ध होने के कारण एनीमिया को दूर करने में मददगार है और खून बढ़ाने में सहायक होती है। पाचन में सुधार लाने और कब्ज से राहत दिलाने के लिए यह लाभकारी है। हृदय स्वास्थ्य के लिए भी किशमिश फायदे मंद है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो त्वचा को चमकाते हैं और थकान को मिटाते हैं।

गुड़, जिसे मां काली को बेहद प्रिय माना जाता है, आयुर्वेद में मिठास का सबसे अच्छा स्रोत है। यह आयरन, मैग्नीशियम और पोटेशियम से युक्त होता है। गुड़ एनीमिया को रोकने में सहायता करता है और हड्डियों को मजबूत बनाता है। यह पाचन में सुधार करता है, कब्ज को दूर करता है और श्वसन समस्याओं में भी लाभकारी है। गुड़ शरीर को गर्म रखता है और डिटॉक्स करने में मदद करता है। इसके सेवन से पीरियड्स की समस्याओं में भी राहत मिलती है।

तिल को आयुर्वेद में वात दोष शांत करने वाला माना जाता है। यह कैल्शियम से भरपूर होता है, जो हड्डियों को मजबूत करता है और ऑस्टियोपोरोसिस से बचाता है। तिल त्वचा और बालों के लिए भी अच्छा साबित होता है और इम्यूनिटी को बढ़ाता है। यह जोड़ों के दर्द में राहत देने के अलावा ऊर्जा भी प्रदान करता है। काला और सफेद दोनों तरह के तिल सेहत के लिए लाभकारी होते हैं।

इलायची भी आयुर्वेद में महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह पाचन क्रिया को सुधारती है और गैस व ब्लोटिंग की समस्या को दूर करती है। इलायची मुंह को ताजगी देती है और श्वसन तंत्र को साफ करती है। यह खांसी में भी राहत प्रदान करती है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट इम्यूनिटी को बढ़ाते हैं और हृदय स्वास्थ्य को बनाए रखते हैं।

आयुर्वेद में शहद या मधु को भी अमृत के समान माना जाता है। यह एंटीबैक्टीरियल, एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण समेटे हुए है। शहद कफ दोष को संतुलित करता है और खांसी, गले की खराश तथा सर्दी-जुकाम में मदद करता है। इसके अलावा, घाव जल्दी भरता है और पाचन को बेहतर बनाता है। यह इम्यूनिटी को बढ़ाता है, वजन नियंत्रित करने में मदद करता है और त्वचा के लिए भी लाभकारी होता है।

इस तरह, नवरात्रि के पावन अवसर पर देवी को अर्पित की जाने वाली ये चीजें न केवल भक्ति का प्रतीक हैं, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी बेहद फायदेमंद हैं। इनका नियमित उपयोग व्यक्ति के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत बनाने में सहायक है।

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