भारत की जीडीपी में 2026 तक 7.3 प्रतिशत और 2027 में 6.8 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान: यूएन रिपोर्ट

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नई दिल्ली, 9 अक्टूबर (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की एक हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत, मजबूत घरेलू मांग और बढ़ती विनिर्माण क्षमता के कारण, तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है। 2026 में भारत की GDP में 7.3 प्रतिशत और 2027 में 6.8 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है। कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता के बावजूद, यह आंकड़े भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाते हैं।

इस रिपोर्ट को यूएनसीटीएडी ने 'व्यापार और विकास रिपोर्ट 2026: विकास का भू-अर्थशास्त्र' नाम दिया है। इसमें बताया गया है कि भारत में घरेलू खपत लगातार मजबूत बनी हुई है। इसके तहत 2026 में खपत की वृद्धि 6.9 प्रतिशत और 2027 में 5.6 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। हालांकि, ऊंची कीमतें और बढ़ती लागत इसकी गति को धीमा कर सकती हैं।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि विकासशील देशों की वृद्धि दर दो हिस्सों में बंट रही है। जहां कुछ बड़ी अर्थव्यवस्थाएं, जिनमें भारत प्रमुख है, वैश्विक विकास को बढ़ावा दे रही हैं। यह बहुत ही रोचक जानकरी है कि भारत 7.3 प्रतिशत की अनुमानित वृद्धि के साथ सबसे आगे है।

यूएनसीटीएडी ने यह भी बताया कि इंडिया जैसे बड़े देश क्षेत्रीय आर्थिक केंद्र के रूप में उभर रहे हैं। ये देश अपने डिजिटल भुगतान तकनीक और बुनियादी ढांचे को अन्य देशों के साथ साझा कर रहे हैं। इसके साथ ही तकनीकी सहयोग को बढ़ावा दे रहे हैं। भारतीय डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) मॉडल की यूएनसीटीएडी ने विशेष रूप से सराहना की है। भारत ने अपनी डीपीआई संरचना को साझा करने के लिए 23 देशों के साथ समझौते किए हैं। इसके तहत श्रीलंका और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में पहले से ही तकनीकी सहयोग चल रहा है।

दुनिया की आर्थिक स्थिति पर भी रिपोर्ट में कुछ महत्वपूर्ण अनुमान दिए गए हैं। यूएनसीटीएडी का मानना है कि 2026 में वैश्विक वृद्धि दर 2.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष 2.9 प्रतिशत थी। इसके बावजूद, वस्तुओं और सेवाओं के वैश्विक व्यापार में लगभग 4 प्रतिशत वृद्धि होने की संभावना है। विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की औसत वृद्धि दर 4 प्रतिशत रहने की उम्मीद है, जबकि यह 2025 में 4.7 प्रतिशत थी।

यूएनसीटीएडी के कार्यवाहक महासचिव पेड्रो मैनुअल मोरेनो ने कहा कि "ग्लोबल साउथ की उभरती अर्थव्यवस्थाएं क्षेत्रीय विकास के केंद्र के रूप में उभर रही हैं।" वे आर्थिक समृद्धि के लिए नए वित्तीय सहयोग तंत्र भी विकसित कर रहे हैं।

साल 2025 में वैश्विक व्यापार 35 ट्रिलियन डॉलर के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था। 2026 में भी व्यापारिक मूल्य बढ़ते रहेंगे। हालांकि, इसका एक महत्वपूर्ण कारण ऊर्जा झटकों के बीच कीमतों में वृद्धि है।

क्षेत्रीय स्तर पर एशिया वर्ष 2026 में वैश्विक आर्थिक वृद्धि में 59 प्रतिशत का योगदान देगा। इस समय, भारत 7.3 प्रतिशत, चीन 4.5 प्रतिशत और इंडोनेशिया 5.2 प्रतिशत की दर से बढ़ सकते हैं।

इस रिपोर्ट के माध्यम से, भारत की आर्थिक स्थिति और उसकी क्षेत्रीय और वैश्विक भूमिका पर रोशनी डाली गई है। यह दर्शाता है कि भारत न केवल अपनी आर्थिकी को मजबूत कर रहा है, बल्कि दूसरे देशों के साथ सहयोग भी बढ़ा रहा है।

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