भारत में GCC के लिए रिकॉर्ड ऑफिस स्पेस लीज: विदेशी कंपनियों का निवेश बढ़ा

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भारत में विदेशी कंपनियों ने कार्यालय स्थान पट्टे पर लेने का नया रिकॉर्ड बनाया है। जनवरी-मार्च तिमाही में 91 लाख वर्ग फुट जगह ली गई है। यह वैश्विक क्षमता केंद्र (जीसीसी) स्थापित करने के लिए है। भारत जटिल वैश्विक कार्यों के लिए एक पसंदीदा केंद्र बन रहा है। ई-कॉमर्स, टेक्नोलॉजी और बैंकिंग जैसे क्षेत्रों में मांग बढ़ी है।

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नई दिल्ली, छह अप्रैल (भाषा) - भारत के नौ प्रमुख शहरों में विदेशी कंपनियों ने जनवरी-मार्च तिमाही में रिकॉर्ड 91 लाख वर्ग फुट कार्यालय स्थान पट्टे पर लिया है। यह आंकड़ा वैश्विक क्षमता केंद्र (जीसीसी) स्थापित करने के लिए लिया गया है, जो भारत को जटिल वैश्विक कार्यों के लिए एक पसंदीदा केंद्र के रूप में स्थापित कर रहा है। रियल एस्टेट सलाहकार सीबीआरई के अनुसार, इस तिमाही में कुल कार्यालय स्थान की मांग पांच प्रतिशत बढ़कर 2.07 करोड़ वर्ग फुट हो गई, जो पिछले साल की समान अवधि में 1.97 करोड़ वर्ग फुट थी। यह वृद्धि ई-कॉमर्स, प्रौद्योगिकी, बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और बीमा जैसे विभिन्न क्षेत्रों में देखी जा रही है, जिसमें मध्यम और छोटी कंपनियां भी अब बड़े पैमाने पर जीसीसी स्थापित कर रही हैं।

सीबीआरई के आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी से मार्च के बीच विदेशी कंपनियों ने कार्यालय स्थान पट्टे पर लेने में एक नया रिकॉर्ड बनाया है। उन्होंने 91 लाख वर्ग फुट जगह ली है, जो किसी भी तिमाही में अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। यह दिखाता है कि भारत वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण व्यावसायिक कार्यों के लिए एक आकर्षक गंतव्य बन गया है।
सीबीआरई के भारत, दक्षिण-पूर्व एशिया, पश्चिम एशिया एवं अफ्रीका क्षेत्र के चेयरमैन एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अंशुमान मैगजीन ने इस बारे में कहा, "जीसीसी के लिए रिकॉर्ड स्तर पर पट्टा गतिविधि यह स्पष्ट संकेत है कि जटिल वैश्विक क्षमताओं वाले कार्यों के लिए भारत पसंदीदा वैश्विक केंद्र बनता जा रहा है।" उन्होंने आगे बताया कि यह मांग सिर्फ कुछ खास क्षेत्रों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि ई-कॉमर्स, टेक्नोलॉजी और बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं तथा बीमा जैसे कई क्षेत्रों में फैली हुई है।

मैगजीन ने यह भी बताया कि अब सिर्फ बड़ी कंपनियां ही नहीं, बल्कि मध्यम और छोटी जीसीसी के साथ-साथ फॉर्च्यून 500 कंपनियां भी इस मांग को बढ़ा रही हैं। इसका मतलब है कि भारत में विभिन्न आकार की कंपनियां अपने वैश्विक परिचालन का विस्तार कर रही हैं।

सीबीआरई के पट्टा सेवाओं से जुड़े भारत के प्रबंध निदेशक राम चंदनानी ने बताया कि कंपनियां अब ऐसे कार्यालय स्थानों को प्राथमिकता दे रही हैं जो पर्यावरण के अनुकूल (ग्रीन सर्टिफाइड) हों और जिनमें बेहतर सुविधाएं हों। उन्होंने कहा, "कंपनियां कृत्रिम मेधा (एआई) के लिए तैयार कार्यस्थल रणनीतियां अपना रही हैं...हमें 2026 तक पट्टा गतिविधि मजबूत बने रहने की उम्मीद है।" इसका मतलब है कि कंपनियां भविष्य की तकनीकों को ध्यान में रखकर अपने कार्यस्थलों को तैयार कर रही हैं।

नौ प्रमुख शहरों में, बेंगलुरु इस पट्टे की गतिविधि में सबसे आगे रहा, जिसकी हिस्सेदारी 29 प्रतिशत थी। इसके बाद दिल्ली-एनसीआर का स्थान रहा, जिसकी हिस्सेदारी 22 प्रतिशत थी, और फिर मुंबई का नंबर आया, जिसकी हिस्सेदारी 16 प्रतिशत रही। ये शहर विदेशी कंपनियों के लिए जीसीसी स्थापित करने के प्रमुख केंद्र बन गए हैं।

कुल मिलाकर, शीर्ष नौ शहरों में कार्यालय स्थान की मांग में पांच प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है। यह वृद्धि 2.07 करोड़ वर्ग फुट तक पहुंच गई है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 1.97 करोड़ वर्ग फुट थी। यह वृद्धि भारत के रियल एस्टेट बाजार के लिए एक सकारात्मक संकेत है।

यह ध्यान देने योग्य है कि ये नौ शहर मुंबई, दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर), बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई, पुणे, कोलकाता, अहमदाबाद और कोच्चि हैं। इन शहरों में विदेशी कंपनियों की बढ़ती रुचि भारत की आर्थिक शक्ति और व्यावसायिक अवसरों को दर्शाती है।

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