ईरान के नेता का अमेरिका को जवाब: हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर ट्रम्प की धमकी बेअसर

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ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर दी गई धमकी को बेअसर बताया है। उन्होंने कहा कि ईरान की सरकार मजबूत है और ऐसे बयानों से कोई फर्क नहीं पड़ता। ट्रंप की धमकी के बावजूद ईरान अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए तैयार है।

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ईरान के सर्वोच्च नेता के भारत में प्रतिनिधि अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान की कड़ी निंदा की है, जिसमें उन्होंने ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की धमकी दी थी। इलाही ने कहा कि ऐसे बयान कोई नई बात नहीं हैं और ईरान पर इनका कोई खास असर नहीं पड़ता। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ने सालों से ऐसी धमकियां दी हैं, लेकिन कभी निर्णायक कार्रवाई नहीं कर पाया।

इलाही ने जोर देकर कहा कि ईरान एक मजबूत संवैधानिक ढांचा और शासन प्रणाली वाला देश है, जिसने दशकों से बाहरी दबाव का सामना किया है। उन्होंने कहा, "यह कोई नई बात नहीं है। वे लंबे समय से ऐसे बयान दे रहे हैं, और ईरान एक संवैधानिक सरकार है। इसके पास ये सब भूमिकाएं और संविधान है और यह बहुत मजबूत है। वे 47 सालों से हमारा कुछ नहीं बिगाड़ पाए हैं। वे अब भी कुछ नहीं कर पाएंगे।"
यह बयान ट्रंप के उस ट्वीट के बाद आया है जिसमें उन्होंने ईरान को चेतावनी दी थी कि अगर उसने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से नहीं खोला तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा था, "मंगलवार को ईरान में पावर प्लांट डे और ब्रिज डे होगा, सब एक साथ। ऐसा कुछ नहीं होगा!!! होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलो, तुम पागल कमीनों, वरना तुम नरक में रहोगे - बस देखते रहो! अल्लाह की जय हो।"

ट्रंप के इस दावे पर कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ 'युद्ध जीत लिया है', इलाही ने कहा कि जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी कहती है। उन्होंने कहा, "हम इसका जवाब लड़ाई में और सड़कों पर दे सकते हैं। वे तीन दिनों के भीतर कुछ करना चाहते थे, लेकिन अब एक महीने से अधिक हो गया है।"

ईरान के प्रतिनिधि ने ट्रंप के बयानों को खोखला बताते हुए कहा कि अमेरिका की धमकियों का ईरान पर कोई असर नहीं होता। उन्होंने कहा कि ईरान की सरकार और संविधान बहुत मजबूत हैं और वे बाहरी दबावों से डरते नहीं हैं। इलाही ने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान ने अमेरिका के खिलाफ युद्ध नहीं हारा है, बल्कि जमीनी हकीकत कुछ और ही है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने जो तीन दिन का समय दिया था, वह कब का बीत चुका है और ईरान अभी भी मजबूती से खड़ा है।

होर्मुज जलडमरूमध्य एक बहुत ही महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है। दुनिया का एक बड़ा हिस्सा तेल इसी रास्ते से होकर दूसरे देशों तक पहुंचाता है। अगर यह रास्ता बंद हो जाए तो तेल की सप्लाई पर बहुत बुरा असर पड़ सकता है और दुनिया भर में महंगाई बढ़ सकती है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का यह एक बड़ा कारण है। ट्रंप ने ईरान को धमकी देकर इसी रास्ते को फिर से खोलने की मांग की थी।

ईरान के प्रतिनिधि ने यह भी बताया कि ईरान की सरकार का ढांचा बहुत मजबूत है। वहां के संविधान के अनुसार सरकार चलती है और यह व्यवस्था दशकों से बाहरी दबावों को झेलती आ रही है। इसलिए अमेरिका जैसे देशों की धमकियों से ईरान को कोई फर्क नहीं पड़ता। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने पहले भी कई बार ऐसी धमकियां दी हैं, लेकिन ईरान ने हमेशा उनका सामना किया है और मजबूती से खड़ा रहा है।

यह पूरा मामला पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच सामने आया है। ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से तनातनी चल रही है, और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे मुद्दे इस तनाव को और बढ़ा देते हैं। ईरान के प्रतिनिधि के बयान से यह साफ है कि ईरान अमेरिका की धमकियों से डरने वाला नहीं है और वह अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए तैयार है।

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