पीएचडी डिग्री और नौकरी दिलाने के नाम पर 22 लाख की धोखाधड़ी: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने FIR रद्द करने से किया इनकार

Others

पीएचडी और नौकरी के नाम पर 22 लाख की ठगी मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एफआईआर रद्द करने से मना कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे अपराधों को सजा मिलनी चाहिए। एक महिला को पीएचडी एडमिशन और सहायक प्रोफेसर की नौकरी का झांसा देकर ठगा गया था। फर्जी कागजात मिलने पर मामले का खुलासा हुआ।

22 lakh fraud in the name of phd and job allahabad high court refuses to quash fir
प्रयागराज: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने पीएचडी डिग्री और सहायक प्रोफेसर की नौकरी दिलाने के नाम पर 22 लाख रुपये से ज्यादा की धोखाधड़ी करने वाली महिला के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने से साफ इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि यह देखकर दुख होता है कि एक पढ़ी-लिखी महिला भी भ्रष्ट व्यवस्था पर भरोसा करके ठगी का शिकार हो गई। कोर्ट ने यह भी कहा कि समाज में नैतिकता के गिरते स्तर को देखते हुए ऐसे अपराधों को सज़ा मिलनी ही चाहिए, ताकि कुछ हद तक नैतिकता वापस आ सके।

यह मामला तब सामने आया जब तान्या दीक्षित नाम की एक महिला ने कानपुर में प्रियंका सेंगर और उसके साथियों विक्रम सिंह सेंगर, तृप्ति सिंह सेंगर और सान्या सिंह सेंगर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई। इन लोगों ने तान्या को यकीन दिलाया था कि वे अलीगढ़ के एक विश्वविद्यालय में उसका पीएचडी में एडमिशन करवा देंगे। इतना ही नहीं, उन्होंने कानपुर के एक कॉलेज में सहायक प्रोफेसर की नौकरी दिलाने का भी वादा किया था। इन बातों पर भरोसा करके तान्या और उसकी माँ ने आरोपियों के बैंक खातों में कुल 22,18,000 रुपये जमा कर दिए। हैरानी की बात यह है कि तान्या ने नौकरी या पीएचडी के लिए कभी खुद से आवेदन ही नहीं किया था।
आरोप है कि जून 2024 में, इन आरोपियों ने तान्या को पीएचडी की मार्कशीट, एडमिशन लेटर, सब्जेक्ट अप्रूवल लेटर और कानपुर के विश्वविद्यालय से एक अपॉइंटमेंट लेटर जैसे कई फर्जी कागज़ात थमा दिए। अपॉइंटमेंट लेटर में तो जुलाई में जॉइनिंग के लिए भी कहा गया था। लेकिन जब तान्या इस अपॉइंटमेंट लेटर को लेकर विश्वविद्यालय पहुँची, तो वहाँ के रजिस्ट्रार ने उसे बताया कि ये सारे कागज़ात पूरी तरह से नकली हैं और उन पर किए गए हस्ताक्षर भी फर्जी हैं। जब तान्या ने इन लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की धमकी दी, तो उन्होंने उसे जान से मारने और झूठे केस में फंसाने की धमकी दी। इसके बाद, तान्या दीक्षित ने 14 सितंबर 2024 को कानपुर के स्वरूप नगर थाने में धोखाधड़ी (धारा 420) और अन्य संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कराया।

उच्च न्यायालय ने 31 मार्च को अपने फैसले में कहा कि एफआईआर में लगाए गए आरोप समाज में एक बहुत ही खतरनाक सोच को दिखाते हैं। यह सोच यह है कि रिश्वत देकर कुछ भी संभव है। कोर्ट ने कहा कि पीएचडी कोर्स में एडमिशन या किसी विश्वविद्यालय में टीचर की नौकरी नियमों के तहत तय प्रक्रिया से ही हो सकती है। कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि पुलिस को इन आरोपों की निष्ठापूर्वक और गहराई से जांच करनी चाहिए।

न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने प्रियंका सेंगर की रिट याचिका को खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि यह घटना समाज में नैतिक मूल्यों के बहुत निचले स्तर को दर्शाती है। जब एक पढ़ी-लिखी महिला भी ऐसे धोखे का शिकार हो सकती है, तो यह दिखाता है कि व्यवस्था पर भरोसा करने वालों को कितना नुकसान हो रहा है। कोर्ट ने साफ कहा कि ऐसे अपराधों को बिना सज़ा के नहीं छोड़ा जा सकता, क्योंकि इससे समाज में कुछ हद तक नैतिकता को फिर से स्थापित करने में मदद मिलेगी।

यह मामला इस बात का भी संकेत देता है कि कैसे कुछ लोग दूसरों की मजबूरी या उम्मीदों का फायदा उठाकर उन्हें ठगते हैं। तान्या दीक्षित को पीएचडी और नौकरी का लालच देकर उससे बड़ी रकम ऐंठ ली गई। जब सच्चाई सामने आई, तो आरोपियों ने धमकी देकर मामले को दबाने की कोशिश की। लेकिन तान्या ने हिम्मत नहीं हारी और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

उच्च न्यायालय के इस फैसले से यह उम्मीद जगी है कि ऐसे मामलों में न्याय मिलेगा और धोखाधड़ी करने वालों को सबक सिखाया जाएगा। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी सरकारी या निजी संस्थान में नियुक्ति या एडमिशन के लिए तय प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है। रिश्वत या किसी भी तरह के गलत तरीके से काम करवाने की कोशिश करना कानून के खिलाफ है और ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। यह फैसला उन सभी लोगों के लिए एक चेतावनी है जो दूसरों को ठगने की फिराक में रहते हैं।

रेकमेंडेड खबरें