कर्नाटक में एलपीजी और ईंधन संकट: कांग्रेस का केंद्र पर आरोप, ऑटो चालकों और छोटे व्यवसायों पर असर

Others

कर्नाटक में एलपीजी और ईंधन की भारी किल्लत से ऑटो चालकों और छोटे व्यवसायों की रोजी-रोटी पर संकट आ गया है। कांग्रेस ने केंद्र सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है। एलपीजी और सीएनजी की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है और सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है। यह स्थिति कामगार वर्ग के लिए आर्थिक उत्पीड़न बन गई है।

karnataka lpg fuel crisis congress attacks center heavy blow to auto drivers and small businesses
बेंगलुरु, 7 अप्रैल (आईएएनएस)। कर्नाटक में एलपीजी और ईंधन की भारी किल्लत को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला है। मुख्यमंत्री सिद्दारमैया, उपमुख्यमंत्री डीके. शिवकुमार और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने आरोप लगाया है कि केंद्र की गलत नीतियों के कारण राज्य में लाखों लोगों की रोजी-रोटी पर संकट आ गया है। ऑटो चालकों से लेकर छोटे व्यवसायों तक, हर कोई इस 'गंभीर' संकट से जूझ रहा है, जिसकी वजह से एलपीजी और सीएनजी की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है और कई जगहों पर सप्लाई भी बुरी तरह प्रभावित हुई है। कांग्रेस ने इसे सिर्फ महंगाई नहीं, बल्कि 'कामगार वर्ग का आर्थिक उत्पीड़न' करार दिया है और आगामी चुनावों में इसके असर की चेतावनी दी है।

कांग्रेस के नेताओं ने एक संयुक्त बयान जारी कर कहा कि केंद्र सरकार की नीतियों के कारण कर्नाटक में एलपीजी और ईंधन का भयानक संकट खड़ा हो गया है। इस संकट ने राज्य के लाखों लोगों की आजीविका पर सीधा असर डाला है। केपीसीसी महासचिव और कर्नाटक के प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने बताया कि राज्य के पांच लाख से ज्यादा ऑटो चालकों को इस समस्या का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने चिंता जताई कि मार्च 2026 में ऑटो गैस की कीमत जहां 58 से 61 रुपए प्रति लीटर थी, वहीं कुछ ही हफ्तों में यह बढ़कर 105 से 120 रुपए प्रति लीटर हो गई है। यह करीब 106 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी है। निजी पेट्रोल पंपों पर तो यह कीमत 125 से 135 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच गई है।
बेंगलुरु की स्थिति तो और भी चिंताजनक है। बयान में बताया गया कि पहले जहां शहर में 60-70 एलपीजी और सीएनजी स्टेशन चालू थे, अब उनकी संख्या घटकर सिर्फ 10-15 रह गई है। यानी करीब 80 प्रतिशत स्टेशन बंद हो चुके हैं। इसके साथ ही, रोजाना सप्लाई भी 12,000 लीटर से घटकर सिर्फ 6,000 लीटर रह गई है। कई जगहों पर तो प्रति वाहन केवल 400 रुपए तक का ही ईंधन दिया जा रहा है। ऑटो चालक सुबह से लंबी कतारों में खड़े रहने को मजबूर हैं, और कई बार तो उन्हें बिना ईंधन लिए ही घर लौटना पड़ता है।

कांग्रेस नेताओं ने इस स्थिति को सिर्फ महंगाई का मामला नहीं बताया, बल्कि इसे 'कामगार वर्ग का आर्थिक उत्पीड़न' करार दिया। उन्होंने केंद्र सरकार के उस सुझाव की भी कड़ी आलोचना की, जिसमें ऑटो चालकों को वापस पेट्रोल पर शिफ्ट होने की सलाह दी गई थी। नेताओं का कहना है कि पेट्रोल पहले से ही बहुत महंगा है, और कई वाहन पहले ही गैस पर चलने के लिए बदलवाए जा चुके हैं। ऐसे में, यह सुझाव बिल्कुल भी व्यावहारिक नहीं है और कामगारों को और मुश्किल में डालेगा।

इसके अलावा, व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में हुई भारी बढ़ोतरी का मुद्दा भी उठाया गया। 1 अप्रैल को कीमतों में 200 रुपए की वृद्धि के बाद, सिलेंडर का दाम 2,000 रुपए के पार चला गया है और फिलहाल यह करीब 2,161 रुपए तक पहुंच गया है। आरोप है कि ब्लैक मार्केट में यही सिलेंडर 6,000 रुपए तक में बिक रहा है। इससे छोटे होटल, ढाबे, ठेले वाले और फूड डिलीवरी से जुड़े लोग बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। उनकी रोजी-रोटी पर सीधा असर पड़ रहा है।

कांग्रेस ने साफ कहा कि देश में एलपीजी की सप्लाई ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के जरिए होती है, इसलिए इसकी पूरी जिम्मेदारी केंद्र सरकार की है। उन्होंने केंद्र सरकार पर प्रशासनिक विफलता और समय पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाया। साथ ही, एलपीजी की कालाबाजारी को लेकर भी गहरी चिंता जताई। नेताओं ने आशंका जताई कि आगामी चुनावों के बाद ईंधन की कीमतों में और भी बढ़ोतरी हो सकती है।

कांग्रेस नेताओं ने कर्नाटक से जुड़े भाजपा और जेडी (एस) के केंद्रीय मंत्रियों की चुप्पी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इन मंत्रियों को या तो इस मुद्दे पर जिम्मेदारी लेनी चाहिए या फिर अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। नेताओं ने इस पूरी स्थिति को 'रोजगार संकट' बताया और चेतावनी दी कि इसका असर दावणगेरे दक्षिण और बागलकोट के उपचुनावों के साथ-साथ आने वाले अन्य चुनावों में भी निश्चित रूप से देखने को मिलेगा। यह संकट कांग्रेस के लिए एक बड़ा चुनावी मुद्दा बन सकता है।

रेकमेंडेड खबरें