स्वास्थ्य में AI का नैतिक उपयोग: भारतजेन मॉडल और भविष्य की दिशा

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केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने स्वास्थ्य में एआई के नैतिक उपयोग पर जोर दिया। सरकार का अपना एआई इंजन भारतजेन इस दिशा में एक बड़ा कदम है। यह मॉडल भारतीय भाषाओं को समझता है और स्वास्थ्य, खेती व कानून जैसे क्षेत्रों में काम आएगा। सरकार और निजी कंपनियां मिलकर स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाएंगी। यह तकनीक सभी की मदद करेगी।

ethical use of ai in health indias new direction with bharatgen model
नई दिल्ली, 17 फरवरी (भाषा) - स्वास्थ्य क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का इस्तेमाल करते समय नैतिकता का ध्यान रखना बहुत ज़रूरी है। यह बात केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कही। उन्होंने बताया कि सरकार का अपना एआई इंजन 'भारतजेन' इस दिशा में एक बड़ा कदम है। सरकार नई तकनीकों को अपनाने में हमेशा आगे रहती है।

मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में एआई का सही और पूरा फायदा उठाने के लिए नैतिक नियम बहुत मायने रखेंगे। वे एआई इम्पैक्ट समिट के एक सत्र में अपनी बात रख रहे थे। उन्होंने बताया कि 'भारतजेन' सरकार का अपना मॉडल है, लेकिन निजी कंपनियां भी डिजिटल स्वास्थ्य और मरीजों के डिजिटल रिकॉर्ड जैसे क्षेत्रों में काम कर रही हैं।
"आने वाले समय में हमें मिलकर काम करना होगा। न तो वे अकेले सफल हो सकते हैं, और न ही हम। इसलिए, हमें इसके लिए तैयार रहना चाहिए," मंत्री ने कहा।

'भारतजेन' को अक्टूबर 2024 में शुरू किया गया था। इसका मकसद भारत में ही एआई मॉडल बनाना है। यह मॉडल भारतीय भाषाओं में आवाज़ को पहचानने (ऑटोमेटिक स्पीच रिकग्निशन - ASR) और आवाज़ को टेक्स्ट में बदलने (टेक्स्ट-टू-स्पीच - TTS) जैसी सुविधाएँ देगा।

इस सत्र में, 'भारतजेन' ने अपना नया 17 बी (अरब) पैरामीटर वाला बड़ा भाषा मॉडल (LLM) पेश किया। यह मॉडल हिंदी, असमिया, बांग्ला, गुजराती, कन्नड़, मैथिली, मलयालम, मराठी, उड़िया, पंजाबी, संस्कृत, सिंधी, तमिल और तेलुगु जैसी कई भारतीय भाषाओं को समझता और बोलता है।

'भारतजेन' ने खास तौर पर आयुर्वेद (आयुर परम), भारतीय खेती (कृषि परम) और भारतीय कानून (कानूनी परम) के लिए भी मॉडल तैयार किए हैं। इसके अलावा, 'भारतजेन' के सभी मॉडल (लिखावट, आवाज़ और तस्वीर से जुड़े) स्वास्थ्य, खेती, पढ़ाई और सरकारी कामों जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

'भारतजेन' के सीईओ ऋषि बल ने बताया कि परम2 एक 'विशेषज्ञों का मिश्रण' मॉडल है। इसे 22 भारतीय भाषाओं में काम करने के लिए बनाया गया है।

यह समझना ज़रूरी है कि एआई क्या है। एआई का मतलब है मशीनों को इंसानों की तरह सोचने और सीखने की क्षमता देना। जैसे आपका स्मार्टफोन आपकी आवाज़ पहचानता है, वह भी एआई का ही एक रूप है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में एआई का मतलब है कि कंप्यूटर बीमारियों का पता लगाने, इलाज बताने या मरीजों की देखभाल करने में डॉक्टरों की मदद कर सकें।

लेकिन जब हम एआई का इस्तेमाल करते हैं, तो कुछ बातों का ध्यान रखना पड़ता है। जैसे, किसी मरीज की जानकारी को गुप्त रखना बहुत ज़रूरी है। एआई को यह सिखाना होगा कि वह किसी के साथ भेदभाव न करे। अगर एआई किसी खास समुदाय के लोगों के साथ गलत व्यवहार करे, तो यह बहुत खतरनाक हो सकता है। इसलिए, मंत्री जितेंद्र सिंह ने नैतिकता की बात पर ज़ोर दिया।

सरकार का 'भारतजेन' प्रोजेक्ट इसी दिशा में एक बड़ा कदम है। यह भारत की अपनी तकनीक है, जो हमारी भाषाओं को समझती है। इससे देश के कोने-कोने तक एआई का फायदा पहुँच सकेगा। जब सरकार और निजी कंपनियां मिलकर काम करेंगी, तो हम स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बना पाएंगे। यह एक ऐसा भविष्य है जहाँ तकनीक सबकी मदद करेगी।

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