केरल कांग्रेस नेतृत्व का फैसला दिल्ली के हाथ में: हाईकमान करेगा सीएम का चुनाव

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केरल में कांग्रेस के नए मुख्यमंत्री का फैसला दिल्ली से होगा। पार्टी हाईकमान विधायकों और प्रदेश नेताओं से बातचीत के बाद सीएम का चुनाव करेगा। ऑब्जर्वर दिल्ली जाकर अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे। अगले 24 से 48 घंटों में इस संबंध में औपचारिक घोषणा की उम्मीद है। यह फैसला 2026 के विधानसभा चुनावों को देखते हुए लिया जा रहा है।

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केरल में कांग्रेस के नए सीएम को लेकर सस्पेंस बरकरार है। कांग्रेस विधायक दल (CLP) की अहम बैठक के बाद पार्टी की राज्य प्रभारी दीपा दासमुंशी ने साफ कर दिया है कि नेतृत्व के अहम फैसलों का अधिकार अब पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व के पास है। दिल्ली में पार्टी हाईकमान ही तय करेगा कि केरल में अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। यह फैसला पार्टी के राष्ट्रीय नेताओं के साथ विधायकों और प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) के अधिकारियों से बातचीत के बाद लिया जाएगा।

यह बैठक ऐसे समय में हुई जब राज्य में नेतृत्व को लेकर अटकलों का बाजार गर्म था। बैठक में एकमत से प्रस्ताव पारित किया गया। इस प्रस्ताव के तहत, CLP ने कांग्रेस हाईकमान को नेतृत्व नियुक्त करने का पूरा अधिकार दे दिया है। अब पार्टी के ऑब्जर्वर दिल्ली जाकर वरिष्ठ नेताओं को ब्रीफ करेंगे और अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे। दीपा दासमुंशी ने बताया कि KPCC अध्यक्ष के. सुधाकरण को बैठक में बनी सहमति के बारे में पहले ही जानकारी दे दी गई है।
दासमुंशी ने ANI से कहा, "एक प्रस्ताव पारित किया गया है। मुझे लगता है कि KPCC अध्यक्ष ने पहले ही यह जानकारी दे दी है कि सभी ने हाईकमान को सारे अधिकार दे दिए हैं। तो अगला कदम यह होगा कि ऑब्जर्वर दिल्ली वापस जाएंगे, और वे हाईकमान से बात करेंगे, और वे अपनी रिपोर्ट देंगे।"

अब गेंद AICC (All India Congress Committee) के पाले में है। ऑब्जर्वर दिल्ली में अपनी रिपोर्ट पेश करेंगे, जिसके बाद केरल के नेतृत्व ढांचे के बारे में औपचारिक घोषणा की उम्मीद है। यह चर्चा 2026 के विधानसभा चुनावों में यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) की भारी जीत के बाद हो रही है।

2026 के विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद, केरल में नेतृत्व परिवर्तन का दौर चल रहा है। कांग्रेस के नेतृत्व वाले UDF ने 4 मई, 2026 को भारी जीत हासिल की, लेकिन 7 मई तक "नए सीएम" ने आधिकारिक तौर पर शपथ नहीं ली थी।

मौजूदा मुख्यमंत्री, पिनाराई विजयन ने 4 मई को इस्तीफा दे दिया था, क्योंकि LDF को बड़ी हार का सामना करना पड़ा था।

AICC ऑब्जर्वर अजय माकन, जो मुकुल वासनिक के साथ राज्य में हैं, ने पुष्टि की कि ऑब्जर्वर ने सभी नवनिर्वाचित विधायकों के साथ व्यक्तिगत परामर्श पूरा कर लिया है और पार्टी नेतृत्व को ब्रीफ करने के लिए नई दिल्ली लौट रहे हैं।

उन्होंने कहा, "एक लाइन का प्रस्ताव पारित किया गया था। सब कुछ हाईकमान पर छोड़ दिया गया है, और उसके बाद, हमने सभी विधायकों के साथ एक-एक करके चर्चा की है। हम आज दिल्ली जा रहे हैं और अपनी रिपोर्ट जमा करेंगे।"

ऑब्जर्वर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए दिल्ली लौट रहे हैं। अगले 24 से 48 घंटों के भीतर एक आधिकारिक घोषणा की उम्मीद है।

इस बीच, कांग्रेस विधायक-निर्वाचित चांडी ओमन ने कहा कि पार्टी नेतृत्व केरल में मुख्यमंत्री पद के चेहरे के संबंध में "सही निर्णय" लेगा, जो थिरुवनंतपुरम में कांग्रेस विधायी दल (CLP) की बैठक में नवनिर्वाचित विधायकों के साथ परामर्श के बाद होगा।

केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) कार्यालय में आयोजित CLP बैठक में भाग लेने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए, दिवंगत मुख्यमंत्री ओमन चांडी के बेटे चांडी ओमन ने नेतृत्व की प्राथमिकताओं पर सार्वजनिक रूप से टिप्पणी करने से परहेज किया और कहा कि उन्होंने पहले ही पार्टी नेतृत्व को अपनी राय बता दी है।

ओमन ने कहा, "मैंने पार्टी नेतृत्व से कहा है। मैं सार्वजनिक रूप से टिप्पणी नहीं करना चाहता। मेरा नेतृत्व सही समय पर फैसला करेगा।" ओमन ने खुद विधानसभा चुनावों में CPI(M) के के एम राधाकृष्णन को 52,000 से अधिक वोटों के भारी अंतर से हराकर शानदार जीत हासिल की थी।

कांग्रेस के नेतृत्व वाले UDF ने 140 सदस्यीय केरल विधानसभा में 102 सीटें जीतीं, जिससे लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) का एक दशक पुराना शासन समाप्त हो गया। कांग्रेस गठबंधन में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, जिसने 63 सीटें जीतीं, जबकि उसकी सहयोगी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) ने 22 सीटें हासिल कीं।

यह पूरा मामला केरल में कांग्रेस के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ है। पार्टी ने भारी जीत हासिल की है, लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि राज्य का नेतृत्व कौन करेगा। ऑब्जर्वर की रिपोर्ट और हाईकमान का फैसला ही इस सस्पेंस को खत्म करेगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी किस चेहरे पर दांव लगाती है और क्या वह जनता की उम्मीदों पर खरा उतर पाती है।

यह भी ध्यान देने वाली बात है कि यह फैसला सिर्फ एक व्यक्ति के बारे में नहीं है, बल्कि यह तय करेगा कि आने वाले समय में केरल में कांग्रेस की दिशा क्या होगी। पार्टी के भीतर अलग-अलग गुटों की अपनी-अपनी पसंद हो सकती है, लेकिन अंततः हाईकमान को एक ऐसा नाम चुनना होगा जो सभी को स्वीकार्य हो और पार्टी को आगे ले जा सके।

चांडी ओमन जैसे नेताओं का यह कहना कि उन्होंने अपनी राय पार्टी नेतृत्व को बता दी है, यह दर्शाता है कि अंदरखाने चर्चाएं चल रही हैं। हालांकि, सार्वजनिक रूप से वे कोई भी बयान देने से बच रहे हैं, जो पार्टी की अनुशासन को दिखाता है। यह एक परिपक्व दृष्टिकोण है, क्योंकि अंतिम फैसला पार्टी के शीर्ष नेताओं द्वारा ही लिया जाएगा।

यह भी महत्वपूर्ण है कि यह सब 2026 के विधानसभा चुनावों के मद्देनजर हो रहा है। इसलिए, नेतृत्व का चुनाव ऐसा होना चाहिए जो न केवल वर्तमान स्थिति को संभाले, बल्कि भविष्य के लिए भी पार्टी को मजबूत करे। UDF की जीत ने कांग्रेस को एक बड़ा अवसर दिया है, और इस अवसर का पूरा फायदा उठाने के लिए सही नेतृत्व का चुनाव बहुत जरूरी है।

कुल मिलाकर, केरल में कांग्रेस का नेतृत्व तय होना एक बड़ी घटना है, और देश भर की निगाहें दिल्ली पर टिकी हैं, जहां से अगले कुछ घंटों में कोई बड़ा ऐलान हो सकता है।

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