जालौन में अनोखी पहल: 70+ बुजुर्गों का स्कूल में दाखिला, IAS रिंकू सिंह राही की शिक्षा क्रांति

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जालौन में एक अनोखी पहल हुई है। उपजिलाधिकारी रिंकू सिंह राही ने 70 साल से अधिक उम्र के नौ बुजुर्गों को स्कूल में दाखिला दिलाया है। इन बुजुर्गों ने यूनिफॉर्म पहनकर बच्चों के साथ क्लास में बैठकर सबको हैरान कर दिया। यह शिक्षा क्रांति पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है।

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जालौन, 19 मई (भाषा) जालौन के उपजिलाधिकारी रिंकू सिंह राही ने एक अनूठी पहल की है। उन्होंने 70 साल से ज़्यादा उम्र के नौ बुजुर्गों को स्कूल में दाखिला दिलवाया है। मंगलवार को इन बुजुर्ग 'विद्यार्थियों' का स्कूल के शिक्षकों और बच्चों ने फूल माला पहनाकर स्वागत किया। उन्होंने स्कूल की यूनिफॉर्म पहनकर छोटे बच्चों के साथ क्लास में बैठकर सबको हैरान कर दिया। यह खबर पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है।

सहायक बेसिक शिक्षा अधिकारी ज्ञान प्रकाश अवस्थी ने बताया कि जालौन के उपजिलाधिकारी रिंकू सिंह राही के निर्देश पर छानी गांव के प्राथमिक और जूनियर हाई स्कूल में सात बुजुर्ग पुरुषों और दो वृद्ध महिलाओं को दाखिला दिलाया गया है। उन्होंने बताया कि देवी दीन (60), मिश्रीलाल (65), वंश गोपाल (72), भुलाई (70), किरण (60), टीकाराम (69) और राम मूर्ति (66) को प्राथमिक विद्यालय में दाखिला मिला है। वहीं, कालका (78) और राजदुलैया (78) को छानी गांव के ही जूनियर हाई स्कूल में प्रवेश मिला है।
अवस्थी ने आगे बताया कि इन बुजुर्गों ने बाकायदा स्कूली पोशाक पहनी थी। स्कूल के शिक्षकों और छात्र-छात्राओं ने माला पहनाकर और तालियां बजाकर उनका स्वागत किया। इसके बाद, सभी बुजुर्ग बच्चों के साथ क्लास में बैठ गए। यह नज़ारा देखने के लिए आसपास के लोग भी इकट्ठा हो गए थे और यह सबके लिए बड़ा कौतूहल का विषय था।

यह अनोखी पहल करने वाले आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही का पिछला रिकॉर्ड भी काफी चर्चा में रहा है। पिछले साल शाहजहांपुर में वकीलों के सामने उठक-बैठक लगाने के बाद उन्हें वहां से हटाकर राजस्व परिषद में भेज दिया गया था। उन्होंने काम के बिना वेतन लेने का हवाला देते हुए इस्तीफा दे दिया था। हालांकि, बाद में उन्होंने अपना इस्तीफा वापस ले लिया था। इसके बाद ही उन्हें जालौन में उपजिलाधिकारी के पद पर तैनाती मिली है।

जब ‘पीटीआई-भाषा’ ने उपजिलाधिकारी के पद पर तैनात होने के बाद रिंकू सिंह राही का इंटरव्यू लेने की कोशिश की, तो उन्होंने साफ मना कर दिया। उन्होंने कहा कि वे जनता की सेवा के लिए आए हैं। उनकी प्राथमिकताएं शासन द्वारा चलाई जा रही जनहित की योजनाओं को पूरी तरह लागू करना, तहसील के कामों में पारदर्शिता लाना और अशिक्षित बुजुर्गों को शिक्षा दिलाना है।

इस पहल से यह साबित होता है कि शिक्षा की कोई उम्र नहीं होती। रिंकू सिंह राही की यह कोशिश उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है जो सोचते हैं कि बहुत देर हो चुकी है। इन बुजुर्गों का स्कूल में जाना और बच्चों के साथ पढ़ना एक ऐतिहासिक पल है। यह दिखाता है कि अगर इरादा नेक हो तो कुछ भी नामुमकिन नहीं है। यह कदम समाज में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी मदद करेगा।

यह भी एक दिलचस्प बात है कि इन बुजुर्गों को स्कूल में दाखिला दिलाने के लिए खास तौर पर निर्देश दिए गए थे। यह दिखाता है कि प्रशासन इस पहल को कितनी गंभीरता से ले रहा है। स्कूल के बच्चों के लिए भी यह एक नया अनुभव होगा। वे अपने से बड़े लोगों को पढ़ते हुए देखकर शायद और भी प्रेरित होंगे। यह एक ऐसा कदम है जो आने वाले समय में कई और लोगों को शिक्षा की ओर बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करेगा।

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