High Court Reprimands Up Government For Delay In 900 New Courts Chief Secretary Summoned
उत्तर प्रदेश में 900 नई अदालतें: सरकार की देरी पर हाईकोर्ट की फटकार, मुख्य सचिव तलब
Others•
इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार को 900 नई अदालतें बनाने में हो रही देरी पर कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने कहा कि आठ जुलाई तक अंतिम फैसला न होने पर मुख्य सचिव और विधिक परामर्शी को व्यक्तिगत रूप से पेश होना होगा। सरकार ने देरी के लिए एक आखिरी मौका मांगा है।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश में 900 नई अदालतें बनाने में हो रही देरी पर राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने साफ कहा है कि अगर अगली सुनवाई यानी आठ जुलाई तक कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया तो मुख्य सचिव और विधिक परामर्शी (एलआर) को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होना पड़ेगा। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की खंडपीठ ने एक जनहित याचिका पर दिया।
यह मामला राज्य में 9149 अदालतें बनाने से जुड़ा है। याचिका में बताया गया कि राज्य सरकार की एक उच्च-स्तरीय समिति ने अक्टूबर 2024 तक पहले चरण में 900 अदालतें बनाने को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी थी। इन 900 अदालतों में 225 उच्च न्यायिक सेवा अदालतें, 375 सिविल जज (सीनियर डिवीजन) अदालतें और 300 सिविल जज (जूनियर डिवीजन) अदालतें शामिल थीं।पीठ ने कहा कि सरकार ठोस फैसला लेने के बजाय नई और बेबुनियाद आपत्तियां उठाकर इस काम में देरी कर रही है। अदालत ने साफ कर दिया कि ऐसी देरी बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अदालत की इन सख्त टिप्पणियों के बाद राज्य सरकार ने एक आखिरी मौका मांगा, जिसे अदालत ने मान लिया। अब मामले की अगली सुनवाई आठ जुलाई को होगी।
नई अदालतें बनाने का काम इसलिए जरूरी है ताकि लोगों को न्याय जल्दी मिल सके। जब अदालतों की संख्या कम होती है तो केसों का अंबार लग जाता है और न्याय मिलने में सालों लग जाते हैं। नई अदालतें खुलने से जजों पर काम का बोझ कम होगा और वे ज्यादा लोगों को समय पर न्याय दे पाएंगे। यह कदम न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में एक अहम कदम है।