Kerala Silver Line Project Cancelled Land Acquisition Revoked Cases Against Protesters Withdrawn Big Decision By New Government
केरल सिल्वर लाइन प्रोजेक्ट रद्द: भूमि अधिग्रहण रद्द, प्रदर्शनकारियों पर केस वापस
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केरल में नई सरकार ने आते ही बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री वी.डी. सतीसन ने विवादित सिल्वर लाइन रेल परियोजना को रद्द कर दिया है। इसके साथ ही परियोजना के खिलाफ प्रदर्शन करने वालों पर दर्ज मामले भी वापस लिए जाएंगे। सरकार ने भूमि अधिग्रहण की सूचनाएं भी रद्द कर दी हैं।
केरल के नए मुख्यमंत्री वी.डी. सतीसन ने सत्ता संभालने के कुछ ही दिनों के भीतर एक बड़ा राजनीतिक फैसला लेते हुए विवादित सिल्वर लाइन सेमी हाई-स्पीड रेल परियोजना को रद्द कर दिया है। बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में इस परियोजना के लिए जारी की गई सभी भूमि अधिग्रहण की सूचनाओं को रद्द करने का औपचारिक ऐलान किया गया। मुख्यमंत्री सतीसन ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि तिरुवनंतपुरम से कासरगोड तक बनने वाली इस रेल लाइन के लिए जमीन अधिग्रहण की सारी प्रक्रियाएं रद्द कर दी गई हैं। यह पिछले वामपंथी सरकार की एक महत्वाकांक्षी परियोजना थी, जिसका नई सरकार ने कड़ा विरोध किया था।
मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि सिल्वर लाइन परियोजना के खिलाफ आंदोलन करने वाले हजारों लोगों पर दर्ज सभी आपराधिक मामले वापस लिए जाएंगे। इसके लिए सरकार न्यायपालिका से मदद मांगेगी। साथ ही, सरकार ने यह भी कहा कि परियोजना के दौरान जमीन पर लगाए गए पीले सर्वे के पत्थर भी हटा दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री सतीसन ने सिल्वर लाइन को एक "पर्यावरणीय आपदा" करार देते हुए कहा कि उनकी सरकार ऐसे विकास कार्यों के लिए प्रतिबद्ध है जो लोगों और पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाएं।कैबिनेट ने एक और महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए केरल लोक सेवा आयोग (KPSC) को यह सिफारिश की है कि 31 अगस्त को समाप्त होने वाली सभी रैंक सूचियों की अवधि को 30 नवंबर तक बढ़ा दिया जाए। इस फैसले से हजारों नौकरी चाहने वालों को राहत मिलने की उम्मीद है जो नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं। मुख्यमंत्री सतीसन ने बताया कि यूडीएफ (UDF) के चुनाव घोषणापत्र को अब सभी विभागों में भेजा जाएगा ताकि सरकार के 'विजन 2031' कार्यक्रम के तहत इसे लागू करने की एक योजना बनाई जा सके। इसके अलावा, सरकार जल्द ही 100 दिनों की कार्य योजना भी जारी करेगी, जिसमें तुरंत लागू किए जा सकने वाले वादों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने यह भी संकेत दिया कि राज्य में चल रहे राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण कार्यों की समीक्षा की जाएगी। साथ ही, केरल इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट फंड बोर्ड (KIIFB) से संबंधित सभी पहलुओं की भी जांच की जाएगी।
अपने सार्वजनिक संवाद और पहचान को लेकर हो रही आलोचनाओं पर मुख्यमंत्री सतीसन ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने अपने पूरे नाम 'मेनन' के इस्तेमाल को लेकर चल रहे विवाद को खारिज करते हुए कहा, "अगर मैं अपने पिता का नाम बताता हूं तो इसमें क्या गलत है? मैं अपनी मां का नाम भी बताना चाहता था। मेरे दोनों माता-पिता मेरे विधायक बनने से पहले ही गुजर गए थे।"
धार्मिक और सामुदायिक नेताओं के साथ अपनी बैठकों को लेकर हो रही आलोचनाओं पर मुख्यमंत्री सतीसन ने जोर देकर कहा कि वे आलोचकों सहित समाज के सभी वर्गों के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि धर्मनिरपेक्ष मूल्यों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने पोर्टफोलियो आवंटन में देरी की मीडिया अटकलों को भी खारिज कर दिया। मुख्यमंत्री ने बताया कि कैबिनेट पोर्टफोलियो सोमवार को सरकार बनने के दिन ही तय हो गए थे और बुधवार को राजधानी लौटने के बाद राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर को औपचारिक रूप से सौंप दिए गए थे।
यह फैसला केरल की राजनीति में एक बड़ा मोड़ है, क्योंकि सिल्वर लाइन परियोजना पिछले कई सालों से चर्चा और विवाद का विषय रही है। नई सरकार ने अपने वादों को पूरा करने की दिशा में पहला कदम उठाते हुए इस परियोजना को रद्द कर दिया है, जिससे जनता के एक बड़े वर्ग को राहत मिली है। यह कदम दर्शाता है कि नई सरकार विकास के साथ-साथ पर्यावरण और जनहित को भी प्राथमिकता देगी।
इसके अतिरिक्त, सरकार ने युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखते हुए KPSC की रैंक सूचियों को बढ़ाने का फैसला किया है, जो रोजगार की तलाश कर रहे लोगों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। 'विजन 2031' और 100-दिन की कार्य योजना जैसी पहलें राज्य के दीर्घकालिक विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।
मुख्यमंत्री सतीसन ने व्यक्तिगत हमलों का जवाब देते हुए अपनी पहचान और मूल्यों पर अडिग रहने का संकेत दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे सभी समुदायों के साथ मिलकर काम करेंगे, लेकिन धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत से कोई समझौता नहीं करेंगे। यह बयान उनकी सरकार की समावेशी और प्रगतिशील सोच को दर्शाता है। कुल मिलाकर, नई सरकार ने अपने शुरुआती दिनों में ही कई महत्वपूर्ण और जनहितैषी फैसले लेकर जनता का विश्वास जीतने का प्रयास किया है।