महाराष्ट्र: OBC क्रीमी लेयर आय सीमा 8 लाख से बढ़ाकर 15 लाख करने की सिफारिश, फडणवीस से होगी चर्चा

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महाराष्ट्र सरकार ने अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए क्रीमी लेयर की आय सीमा बढ़ाने का अहम फैसला लिया है। अब यह सीमा आठ लाख से बढ़ाकर पंद्रह लाख रुपये कर दी गई है। इससे लाखों ओबीसी परिवारों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिलेगा। साथ ही, 43 जातियों को केंद्रीय ओबीसी सूची में शामिल करने का प्रस्ताव भी भेजा गया है।

maharashtra obc creamy layer income limit recommended to be increased from 8 lakh to 15 lakh discussion with fadnavis
महाराष्ट्र सरकार की कैबिनेट उप-समिति ने मंगलवार को एक बड़ा फैसला लेते हुए अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए गैर-क्रीमी लेयर की सालाना आय सीमा को मौजूदा आठ लाख रुपये से बढ़ाकर 15 लाख रुपये करने की सिफारिश की है। इस फैसले से लाखों ओबीसी परिवारों को फायदा होने की उम्मीद है। उप-समिति के अध्यक्ष और राज्य के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने बताया कि इस सिफारिश को अंतिम मंजूरी के लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ बैठक की जाएगी। इसके अलावा, 43 ऐसी जातियों को भी ओबीसी सूची में शामिल करने का प्रस्ताव राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (एनसीबीसी) को भेजा गया है, जो फिलहाल केंद्रीय ओबीसी सूची में नहीं हैं।

यह सिफारिश ओबीसी समुदाय के लिए एक बड़ी राहत लेकर आई है। पहले जहां आठ लाख रुपये सालाना आय वाले ओबीसी परिवारों को क्रीमी लेयर में गिना जाता था, वहीं अब 15 लाख रुपये तक की आय वाले परिवारों को भी इसका लाभ मिल सकेगा। इसका मतलब है कि अब ज्यादा ओबीसी परिवार आरक्षण का लाभ उठा पाएंगे।
इस महत्वपूर्ण बैठक में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री छगन भुजबल, वन मंत्री गणेश नाइक, जल आपूर्ति एवं स्वच्छता मंत्री गुलाबराव पाटिल, मृदा एवं जल संरक्षण मंत्री संजय राठौड़ और ओबीसी कल्याण एवं डेरी विकास मंत्री अतुल सावे भी मौजूद थे। इन सभी मंत्रियों ने मिलकर इस सिफारिश को अंतिम रूप दिया।

भाजपा नेता चंद्रशेखर बावनकुले ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि यह कदम ओबीसी समुदाय को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने यह भी बताया कि जिन 43 जातियों को केंद्रीय सूची में शामिल करने का प्रस्ताव भेजा गया है, वे वर्तमान में केंद्रीय अन्य पिछड़ा वर्ग सूची का हिस्सा नहीं हैं। यह एक लंबे समय से चली आ रही मांग थी जिसे अब पूरा करने की कोशिश की जा रही है।

गैर-क्रीमी लेयर का मतलब उन लोगों से है जो ओबीसी समुदाय से तो हैं, लेकिन उनकी आय इतनी ज्यादा है कि उन्हें आरक्षण का लाभ नहीं मिलना चाहिए। यह सीमा तय करने का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि आरक्षण का लाभ वास्तव में जरूरतमंदों तक पहुंचे। आय सीमा बढ़ाने से अब ज्यादा ओबीसी परिवारों को सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण का फायदा मिल सकेगा।

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