सैन डिएगो मस्जिद हमला: सुरक्षा गार्ड की शहादत, बच्चों की जान बचाई, हेट क्राइम की जांच

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सैन डिएगो के इस्लामिक सेंटर में एक दुखद घटना हुई। एक सुरक्षा गार्ड ने अपनी जान देकर 140 बच्चों की जान बचाई। दो किशोर हमलावरों ने खुद को गोली मार ली। पुलिस इसे हेट क्राइम मान रही है। हमलावर ऑनलाइन नफरत फैलाने वाली विचारधारा से प्रभावित थे। इस घटना ने समुदाय को झकझोर दिया है।

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सैन डिएगो, 19 मई (रॉयटर्स) - सैन डिएगो के इस्लामिक सेंटर में सोमवार को हुई गोलीबारी में तीन लोगों की जान चली गई, जिसमें एक सुरक्षा गार्ड ने 140 बच्चों की जान बचाने के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी। 17 और 18 साल के दो किशोर हमलावरों ने खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। पुलिस इस घटना को हेट क्राइम (घृणा अपराध) के तौर पर देख रही है। हमलावरों के बारे में माना जा रहा है कि वे ऑनलाइन मिले थे और इंटरनेट पर नफरत फैलाने वाली विचारधारा से प्रभावित थे। हमलावरों द्वारा घटना को लाइवस्ट्रीम करने का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वे एक-दूसरे को गोली मारते और फिर खुद को मारते हुए दिख रहे हैं।

सैन डिएगो के इस्लामिक सेंटर में हुई दुखद घटना में तीन बहादुर लोगों ने अपनी जान गंवाई। इनमें से एक थे सुरक्षा गार्ड अमीन अब्दुल्ला, जिनकी उम्र 51 साल थी। उन्होंने अपनी जान की परवाह न करते हुए दो हमलावरों का सामना किया और उन्हें मस्जिद के अंदर घुसने से रोका। उनकी इस बहादुरी की वजह से मस्जिद के अंदर मौजूद 140 बच्चों की जान बच सकी। पुलिस चीफ स्कॉट वाहल ने बताया कि अब्दुल्ला ने जैसे ही हमलावरों को देखा, उन्होंने तुरंत गोलीबारी शुरू कर दी। इसके जवाब में हमलावरों ने भी गोली चलाई, जिसमें अब्दुल्ला की मौत हो गई।
इस हमले में दो अन्य लोगों की भी जान गई: मस्जिद के बुजुर्ग मंसूर काज़ीहा (78) और उबर ड्राइवर नादिर अवध (57)। ये दोनों लोग भी हमलावरों का ध्यान भटकाने में कामयाब रहे, जिससे बच्चों को सुरक्षित रहने का मौका मिला। काज़ीहा और अवध ने हमलावरों को इमारत के अंदर से बाहर खींचने में अहम भूमिका निभाई। जब हमलावर बाहर आए, तो उन्हें पार्किंग में गोली मार दी गई। काज़ीहा ने गोलीबारी से ठीक पहले पुलिस को फोन करके घटना की सूचना दी थी।

हमलावरों ने गोलीबारी के बाद कार से भागने की कोशिश की। कुछ ही देर बाद पुलिस ने उन्हें कुछ ब्लॉक दूर एक गाड़ी में मृत पाया। माना जा रहा है कि उन्होंने खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। पुलिस चीफ वाहल ने अमीन अब्दुल्ला की बहादुरी की खास तौर पर तारीफ की। उन्होंने कहा, "उनके कार्यों ने निश्चित रूप से उन दो व्यक्तियों को मस्जिद के बड़े हिस्सों में प्रवेश करने से रोका, जहाँ 140 बच्चे इन संदिग्धों से 15 फीट की दूरी पर थे।"

इस्लामिक सेंटर के इमाम और निदेशक, तहा हसन ने तीनों पीड़ितों को "हमारे शहीद और हमारे नायक" कहा। सुरक्षा गार्ड की बेटी, हववा अब्दुल्ला ने अपने पिता को याद करते हुए कहा कि वह अपने परिवार से बहुत प्यार करते थे और अपने काम के प्रति इतने समर्पित थे कि ड्यूटी पर रहते हुए खाने के लिए भी ब्रेक नहीं लेते थे। उन्होंने सभी धर्मों के लोगों से एकजुट होकर दयालु बनने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, "वह किसी भी तरह की नफरत के खिलाफ खड़े थे।"

पुलिस और एफबीआई इस हमले को हेट क्राइम के तौर पर जांच कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने अभी तक किसी खास मकसद का खुलासा नहीं किया है। एफबीआई के विशेष एजेंट मार्क रेमिली ने कहा, "मैं यह कह सकता हूं कि (संदिग्धों) के मन में बहुत से लोगों के प्रति नफरत थी।"

हालांकि अधिकारियों ने दोनों संदिग्धों के नाम आधिकारिक तौर पर नहीं बताए हैं, लेकिन उन्हें कैलेब वास्क्वेज़ (18) और केन क्लार्क (17) के रूप में पहचाना गया है। रेमिली ने बताया कि एक हमलावर ने एक घोषणापत्र (manifesto) छोड़ा था, लेकिन उन्होंने उसके बारे में विस्तार से बताने से इनकार कर दिया।

सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, हमलावरों का 75 पन्नों का एक घोषणापत्र जांच के दायरे में है, जिसमें नस्लवादी, इस्लामोफोबिक और यहूदी-विरोधी विचारधारा के साथ-साथ "इन्सेल" (incel) संस्कृति का भी जिक्र है। केबल नेटवर्क ने कहा कि उसे यह दस्तावेज़ इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रेटेजिक डायलॉग से मिला है, जो उग्रवाद का अध्ययन करता है। इसके साथ ही, हमलावरों द्वारा घटना के दौरान रिकॉर्ड किया गया और इंटरनेट पर लाइवस्ट्रीम किया गया एक वीडियो भी मिला है।

सीएनएन ने वीडियो का लिखित सारांश देते हुए बताया कि हमलावरों की बंदूकें और कपड़ों पर श्वेत-सर्वोच्चतावादी (White supremacist) प्रतीक दिखाई दे रहे थे। वीडियो में वे इस्लामिक सेंटर में घूमते हुए दिख रहे हैं, जिनमें से एक राइफल से गोली चलाता है। इसके बाद वे बाहर आते हैं, पिस्तौल से गोली चलाते हैं, और फिर खून के एक ढेर पर पड़े किसी व्यक्ति के ऊपर खड़े दिखाई देते हैं।

सीएनएन ने वीडियो के अंतिम क्षणों को उस इलाके से जियोलोकेट किया जहां पुलिस ने दो किशोरों को मृत पाया था। नेटवर्क के अनुसार, वीडियो में ड्राइवर गाड़ी रोकता है, फिर अपने यात्री को गोली मारता हुआ दिखाई देता है और उसके बाद खुद को गोली मार लेता है। मंगलवार को एक वीडियो ऑनलाइन प्रसारित होना शुरू हुआ जो सीएनएन के सारांश से मेल खाता है।

यह घटना इंटरनेट पर फैलाई जा रही नफरत और उग्रवाद के खतरनाक प्रभाव को उजागर करती है। हमलावरों का ऑनलाइन मिलना और कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित होना इस बात का संकेत है कि कैसे इंटरनेट युवाओं को गलत रास्ते पर ले जा सकता है। एफबीआई और पुलिस इस मामले की गहराई से जांच कर रहे हैं ताकि ऐसे हमलों को रोका जा सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं को होने से रोका जा सके।

इस घटना ने समुदाय को झकझोर कर रख दिया है। लोगों ने पीड़ितों की बहादुरी को सलाम किया है और नफरत के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान किया है। सुरक्षा गार्ड अमीन अब्दुल्ला की बेटी हववा अब्दुल्ला ने अपने पिता को याद करते हुए कहा कि वह किसी भी तरह की नफरत के खिलाफ थे। यह संदेश आज के समय में और भी महत्वपूर्ण हो जाता है, जब दुनिया भर में नफरत और असहिष्णुता बढ़ रही है।

यह घटना हमें याद दिलाती है कि हमें नफरत के खिलाफ हमेशा खड़े रहना चाहिए और एक-दूसरे के प्रति दया और सम्मान दिखाना चाहिए। तीनों पीड़ितों ने अपनी जान देकर हमें यह सबक सिखाया है कि बहादुरी और बलिदान से हम किसी भी चुनौती का सामना कर सकते हैं।

यह भी सामने आया है कि हमलावरों ने एक घोषणापत्र छोड़ा था, जिसमें उनकी सोच का पता चलता है। इस घोषणापत्र में नस्लवाद, इस्लामफोबिया और यहूदी-विरोधी विचारों का जिक्र है। यह दर्शाता है कि उनकी नफरत किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं थी, बल्कि कई समूहों के प्रति थी। "इन्सेल" संस्कृति का उल्लेख यह भी बताता है कि वे समाज से कटे हुए और गुस्से में थे।

इस तरह की घटनाएं हमें यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि हम अपने युवाओं को कैसे सुरक्षित रख सकते हैं और उन्हें सही रास्ते पर कैसे ला सकते हैं। इंटरनेट का उपयोग जिम्मेदारी से करना और नफरत फैलाने वाली सामग्री से दूर रहना बहुत जरूरी है। माता-पिता और शिक्षकों को भी इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि उनके बच्चे क्या देख रहे हैं और क्या पढ़ रहे हैं।

पुलिस ने इस घटना को हेट क्राइम घोषित किया है, जिसका मतलब है कि यह हमला किसी खास समूह के प्रति नफरत की वजह से किया गया था। यह एक गंभीर अपराध है और इसके पीछे के कारणों का पता लगाना बहुत जरूरी है ताकि भविष्य में ऐसे अपराधों को रोका जा सके।

इस घटना के बाद, समुदाय के नेताओं ने लोगों से शांति बनाए रखने और नफरत फैलाने वालों के बहकावे में न आने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यह समय एकजुट होने और एक-दूसरे का समर्थन करने का है।

यह घटना एक दुखद याद दिलाती है कि नफरत कितनी खतरनाक हो सकती है और यह कैसे निर्दोष लोगों की जान ले सकती है। हमें इस घटना से सीखना चाहिए और एक ऐसे समाज का निर्माण करना चाहिए जहां सभी लोग सुरक्षित और सम्मानित महसूस करें।

सुरक्षा गार्ड अमीन अब्दुल्ला की बहादुरी को हमेशा याद रखा जाएगा। उन्होंने अपनी जान देकर कई बच्चों की जान बचाई। उनकी यह कुर्बानी व्यर्थ नहीं जानी चाहिए। हमें उनके दिखाए रास्ते पर चलना चाहिए और नफरत के खिलाफ हमेशा आवाज उठानी चाहिए।

यह भी महत्वपूर्ण है कि हम उन लोगों का समर्थन करें जो इस घटना से प्रभावित हुए हैं। उनके परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करना और उन्हें हर संभव मदद देना हमारा कर्तव्य है।

यह घटना एक चेतावनी है कि हमें ऑनलाइन नफरत और कट्टरता को गंभीरता से लेना चाहिए। सरकारों, सोशल मीडिया कंपनियों और समुदायों को मिलकर काम करना चाहिए ताकि ऐसी विचारधाराओं को फैलने से रोका जा सके।

अंत में, यह कहना गलत नहीं होगा कि यह घटना हमें एक साथ लाती है और हमें यह सिखाती है कि नफरत पर प्यार और समझ की जीत होनी चाहिए।

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