Pakistan 14 Newborn Babies Die In Hospital Fire Serious Questions Raised On Healthcare System
पाकिस्तान के अस्पताल में आग से 14 नवजात शिशुओं की मौत, स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल
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पाकिस्तान के एक बड़े सरकारी अस्पताल के नवजात शिशु विभाग में आग लगने से 14 बच्चों की मौत हो गई। यह घटना पाकिस्तान की स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली को उजागर करती है। यह तब हुआ जब पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता करने की कोशिश कर रहा था।
इस्लामाबाद के एक विदेशी संवाददाता फरहान बोखारी ने अपनी एक रिपोर्ट में इस गंभीर मुद्दे को उठाया है। उनकी रिपोर्ट का शीर्षक है "14 शिशुओं की मौत ने पाकिस्तान की वैश्विक छवि के बारे में अनचाहे सच को उजागर किया"। यह रिपोर्ट निकई एशिया में छपी थी। इसमें बताया गया है कि यह दुखद घटना जापान की मदद से चार दशक पहले बने एक सरकारी अस्पताल में हुई।26 अगस्त को एयर कंडीशनिंग यूनिट में खराबी आने से आग लगी। यह आग तेजी से उस नर्सरी में फैल गई जहां 15 नवजात शिशु रखे थे। बच्चे या तो इनक्यूबेटर में थे या ऑक्सीजन पर थे। इस भयानक हादसे में सिर्फ एक बच्चा बच पाया।
इस घटना की खूब आलोचना हुई। इसने पाकिस्तान की छवि में विरोधाभास को दिखाया। एक तरफ तो पाकिस्तान खुद को "इस्लामिक दुनिया का एकमात्र परमाणु-सशस्त्र राष्ट्र" और वैश्विक संघर्षों में मध्यस्थ के रूप में पेश करता है। वहीं दूसरी तरफ, वह आर्थिक संकट से जूझ रहा है। इस संकट के कारण स्वास्थ्य, शिक्षा और आपातकालीन सेवाओं जैसी बुनियादी सुविधाएं भी कमजोर हैं।
बोखारी ने लिखा कि इस त्रासदी ने समाज में अमीरी और गरीबी के बीच की खाई को भी दिखाया। अमीर लोग हर तरह की सुविधाओं का लाभ उठाते हैं, जबकि गरीब लोग कम पैसों वाले अस्पतालों पर निर्भर रहते हैं। उन्होंने तर्क दिया कि इस घटना ने पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय छवि को धूमिल किया है। यह दिखाता है कि देश अपनी बुनियादी जरूरतों को भी पूरा नहीं कर पा रहा है।
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र (UN) के मानव विकास सूचकांक (HDI) का भी जिक्र किया। 2026 में पाकिस्तान को 168वां स्थान मिला, जो 2016 के 147वें स्थान से नीचे है। इससे पाकिस्तान "कम मानव विकास" वाली श्रेणी में आ गया है। HDI रैंकिंग जीवन की गुणवत्ता और लोगों की भलाई को मापने का एक महत्वपूर्ण पैमाना है।
जून 2026 तक पाकिस्तान पर विदेशी कर्ज 138.8 अरब अमेरिकी डॉलर था। बोखारी ने बताया कि पिछले वित्तीय वर्ष में देश ने अपने सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग 7% कर्ज चुकाने में खर्च किया। जबकि स्वास्थ्य सेवाओं पर 1% से भी कम खर्च किया गया।
पाकिस्तान छह-लेन वाली मोटरवे जैसी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में निवेश करना जारी रखे हुए है। लेकिन स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे जरूरी मुद्दे उपेक्षित पड़े हैं। इस दुखद घटना के बाद, सरकार ने इस्लामाबाद में स्वास्थ्य सेवाओं के प्रभारी एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी को बर्खास्त कर दिया।
बोखारी ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि पाकिस्तान की केवल 4% आबादी ही टैक्स देती है। एक तिहाई से ज्यादा लोग अत्यधिक गरीबी में जी रहे हैं। हर साल भारत के खिलाफ रक्षा पर अरबों रुपये खर्च किए जाते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर तत्काल सुधार नहीं किए गए तो ऐसी त्रासदियां फिर से हो सकती हैं।