पिछले हफ्ते गिर जाना चाहिए था, अब तक नहीं टूटा E टावर

नवभारत टाइम्स

गुड़गांव की चिंटेल पैराडिसो सोसायटी में ई टावर गिराने का काम धीमा पड़ गया है। डीटीपी ने इसे पिछले हफ्ते तक ध्वस्त करने के निर्देश दिए थे। दो साल में केवल तीन टावर ही हटाए जा सके हैं। निवासियों को बाकी टावरों को हटाने में देरी की आशंका है।

gurgaon chintels paradiso e tower demolition severely delayed questions raised on administrations sluggishness
गुड़गांव की चिंटेल पैराडिसो सोसायटी में असुरक्षित टावरों को गिराने का काम एक बार फिर धीमा पड़ गया है। करीब दो हफ्ते पहले डीटीपी अमित मधौलिया ने सख्त निर्देश दिए थे। उन्होंने कहा था कि E टावर को एक हफ्ते में गिराया जाए और नवंबर तक सभी असुरक्षित टावर हटा दिए जाएं। लेकिन, E टावर अभी भी अधूरा खड़ा है। इसे पिछले हफ्ते तक पूरी तरह हट जाना चाहिए था। सोसायटी के लोग इस धीमी रफ्तार से बहुत परेशान हैं। वे प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। फरवरी 2022 में डी टावर में हुए हादसे के बाद कई टावरों को असुरक्षित बताया गया था। करीब दो साल बीत चुके हैं, लेकिन छह में से सिर्फ तीन टावर ही पूरी तरह गिराए जा सके हैं।

लगभग दो हफ्ते पहले डीटीपी अमित मधौलिया ने सोसायटी का दौरा किया था। उन्होंने वहां के हालात देखे। डीटीपी ने साफ-साफ कहा था कि E टावर को एक हफ्ते के अंदर गिरा दिया जाए। साथ ही, नवंबर महीने तक सभी असुरक्षित टावरों को हटा दिया जाए। लेकिन, उनके इन निर्देशों का कोई खास असर नहीं दिख रहा है। E टावर अभी भी पूरी तरह से नहीं गिराया गया है। इसे तो पिछले हफ्ते तक ही पूरा हटा देना था।
सोसायटी के लोग इस बात से बहुत हैरान हैं। उनका कहना है कि डीटीपी के दौरे के बाद तो काम की रफ्तार और भी कम हो गई है। पूर्व आरडब्ल्यूए अध्यक्ष राकेश हुड्डा ने भी यही बात कही है। उन्होंने बताया, "जिस दिन डीटीपी निरीक्षण करने आए, उसी दिन से ध्वस्तीकरण का काम लगभग ठप है।" यह दिखाता है कि प्रशासन की सख्ती का भी कोई फायदा नहीं हो रहा है।

इस काम की जिम्मेदारी नोएडा की एडिफिस कंपनी को दी गई थी। कंपनी को छह महीने में छह टावर गिराने थे। लेकिन, अब करीब दो साल बीत चुके हैं। इस लंबे समय में सिर्फ तीन टावर ही पूरी तरह से हटाए जा सके हैं। अभी तक F, G और H टावर गिरा दिए गए हैं। लेकिन, E टावर पर कई दिनों से कोई खास काम नहीं हुआ है। उसकी हालत में कोई बदलाव नहीं दिख रहा है।

निवासियों का आरोप है कि शुरुआत में काम बहुत तेजी से शुरू हुआ था। लेकिन, अब वह तेजी पूरी तरह से गायब हो गई है। लोगों को डर है कि अगर यही हाल रहा, तो बाकी बचे टावरों को हटाने में और भी ज्यादा समय लग सकता है। फरवरी 2022 में डी टावर में एक बड़ा हादसा हुआ था। उसके बाद ही सोसायटी के कई टावरों को असुरक्षित घोषित किया गया था। अब निवासी चाहते हैं कि प्रशासन सख्ती दिखाए। वे मांग कर रहे हैं कि ध्वस्तीकरण का काम तय समय पर पूरा हो। इससे उन्हें खतरे से राहत मिल सकेगी।