Ravan In Tension Not Afraid Of Rams Arrow But Mumbais Rain
टेंशन में रावण
नवभारत टाइम्स•
दशहरा निकट है। रावण को इस बार मुंबई की भारी बारिश से चिंता सता रही है। मौसम विभाग ने ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। सोशल मीडिया पर संदेश घूम रहा है कि रावण को जलाना है, डुबोना नहीं। रावण को डर है कि रामभक्त उसे कहीं डुबोकर न मार दें। यह जुलाई नहीं, अक्टूबर का महीना है।
दशहरे से ठीक पहले रावण इस बार एक नई चिंता में डूबा हुआ है। उसकी यह चिंता राम के अग्निबाण को लेकर नहीं है, जो उसे हर साल लगता है। इस बार मुंबई में हो रही बेमौसम और भारी बारिश ने उसे परेशान कर दिया है। मौसम विभाग ने ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। सोशल मीडिया पर भी एक संदेश वायरल हो रहा है। इसमें कहा जा रहा है कि रावण को जलाना है, डुबोना नहीं। रावण को डर है कि कहीं रामभक्त उसे जलाने की बजाय डुबोकर न मार दें।
रावण को हर साल जलने की आदत हो चुकी है। देशभर में उसके हजारों पुतले बनाए जाते हैं। उसे अपने परिवार के साथ खड़ा किया जाता है। त्रेता युग में उसने जो गलती की थी, उसकी सजा उसे 2025 में भी मिल रही है। यह सजा उसे आगे भी युगों-युगों तक भुगतनी पड़ेगी। विभीषण ने उसे बहुत समझाया था, लेकिन वह नहीं माना था। उसने गलत जगह पंगा ले लिया था। उसके कारण बेचारे कुंभकर्ण और मेघनाद को भी हर साल सजा भुगतनी पड़ती है। रावण को जलने से अब कोई परेशानी नहीं होती है। उसे इसका अभ्यास हो चुका है। वह सोचता है कि हर साल जलाते हो, क्या बिगाड़ लिया। वह तो हर साल नई साज-सज्जा के साथ और ऊंचा उठता चला जाता है। उसे नई-नई जगहों पर स्थापित किया जाता है। अब तो उसने विदेश में भी अच्छी जगह बना ली है। हर जगह वह धू-धू कर जलता है। उसका किस्सा पांच मिनट में खत्म हो जाता है।लेकिन इस बार मुंबई की बरसात ने रावण को चिंता में डाल दिया है। मुंबई में लगातार तेज बारिश हो रही है। पहले पितरों को नहलाने के बाद बरसात चली जाती थी। लेकिन अब उसने अपना पैटर्न बदल दिया है। मौसम विभाग ने ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। उन्होंने कहा है कि दो-चार दिन तक तेज बारिश होगी। अब तो मौसम विभाग भी सही भविष्यवाणी करने लगा है। पहले जब वे बारिश की बात कहते थे, तो तेज धूप निकल आती थी। लेकिन अब ऐसा नहीं होता है। अब अगर उन्होंने कह दिया कि बारिश होगी, तो वह होकर ही रहती है।
इसी बीच, सोशल मीडिया पर भी एक संदेश तेजी से फैल रहा है। यह संदेश है: 'डियर बारिश, यह जुलाई नहीं, अक्टूबर का महीना है। रावण को हमें जला कर मारना है, डुबोकर नहीं।’ रावण एक कूटनीतिज्ञ है। उसे अच्छी तरह पता है कि जब भक्त अपनी पर आते हैं, तो वे ठीक उल्टा काम करते हैं। रावण को इस बात की बहुत चिंता है कि कहीं इस बार रामभक्त उसे डुबोकर न मार दें।