स्वास्थ्य विभाग करेगा निगरानी, ताकि लोग ले सकें राहत की सांस

नवभारत टाइम्स

बदलते मौसम और बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया है। स्मॉग से होने वाली बीमारियों से बचाव के लिए 'सांस' प्रोजेक्ट के तहत निगरानी बढ़ाई गई है। अस्थमा, निमोनिया और सांस की बीमारियों के मरीजों पर खास ध्यान दिया जा रहा है। जिन इलाकों में मरीजों की संख्या बढ़ेगी, वहां विशेष उपाय किए जाएंगे।

स्वास्थ्य विभाग करेगा निगरानी, ताकि लोग ले सकें राहत की सांस
बदलते मौसम और बढ़ते वायु प्रदूषण के खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया है। स्मॉग से होने वाली बीमारियों से निपटने के लिए ' सांस प्रॉजेक्ट ' के तहत निगरानी बढ़ा दी गई है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान अस्थमा, निमोनिया और सांस से जुड़ी बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ जाती है। डिस्ट्रिक्ट हेल्थ ऑफिसर डॉ. विकास स्वामी ने बताया कि इस प्रॉजेक्ट के तहत शहर में हेल्थ सर्विलांस को तेज किया गया है। यह देखा जा रहा है कि किन इलाकों में इन बीमारियों के मरीज ज्यादा मिल रहे हैं। जहां मरीजों की संख्या बढ़ेगी, वहां इन बीमारियों को रोकने के लिए खास प्लान लागू किया जाएगा। हर 15 दिन में इस रिपोर्ट को तैयार करके मुख्यालय भेजा जाएगा।

डॉ. स्वामी ने लोगों को सलाह दी है कि थोड़ी सी सावधानी बरतकर वे गंभीर बीमारियों से बच सकते हैं। प्रदूषण और ठंड दोनों ही शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर करते हैं। इसलिए, समय रहते सतर्क रहना बहुत जरूरी है।
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि दिवाली से लेकर जनवरी तक जिले का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) अक्सर 250 से ऊपर चला जाता है। ऐसे में सांस से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ना स्वाभाविक है। बेहतर निगरानी और योजना बनाकर ही इन बीमारियों को रोका जा सकता है।

स्वास्थ्य विभाग 'सांस प्रॉजेक्ट' के तहत शहर में हेल्थ सर्विलांस को बढ़ा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि किन इलाकों में अस्थमा, निमोनिया और सांस से जुड़ी अन्य बीमारियों के मरीज ज्यादा हैं। जैसे ही ऐसे इलाकों की पहचान होगी, वहां तुरंत एक्शन प्लान लागू किया जाएगा। यह सुनिश्चित करेगा कि मरीजों की संख्या बढ़ने से पहले ही उन्हें रोका जा सके।

डॉ. स्वामी ने इस बात पर जोर दिया कि लोगों को अपनी सेहत का खास ख्याल रखना चाहिए। प्रदूषण और ठंड के मौसम में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। इसलिए, इस समय में अतिरिक्त सावधानी बरतना बहुत महत्वपूर्ण है।

विशेषज्ञों के अनुसार, सर्दियों के महीनों में, खासकर दिवाली के बाद से लेकर जनवरी तक, वायु प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ जाता है। जब एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 250 से ऊपर चला जाता है, तो सांस की बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इस स्थिति से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग की निगरानी और बेहतर प्लानिंग बहुत अहम है।