महाराष्ट्र में दिव्यांग जनों के कल्याण के लिए 'विजन 2047' दस्तावेज़ का शुभारंभ

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महाराष्ट्र सरकार ने दिव्यांगजनों के लिए 'विजन 2047' नामक एक महत्वाकांक्षी योजना शुरू की है। यह योजना दिव्यांगजनों को सशक्त बनाने पर केंद्रित है। सार्वजनिक स्थानों को सुलभ बनाया जाएगा। शिक्षा और रोजगार में भेदभाव रोका जाएगा। स्वास्थ्य और पुनर्वास सेवाओं को मजबूत किया जाएगा। दिव्यांगजनों के अधिकारों की निगरानी और सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।

maharashtras vision 2047 for persons with disabilities a big step towards an inclusive future
महाराष्ट्र सरकार ने दिव्यांगजनों के कल्याण के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य के दिव्यांगजन कल्याण विभाग ने 'विजन 2047' नाम का एक महत्वाकांक्षी दस्तावेज़ जारी किया है। यह दस्तावेज़ दिव्यांगजनों के लिए एक समावेशी राज्य बनाने का रोडमैप है। यह पारंपरिक विशेष स्कूलों पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय, अधिकारों पर आधारित और एकीकृत दृष्टिकोण अपनाता है।

इस 'विजन 2047' का मुख्य उद्देश्य दिव्यांगजनों को सशक्त बनाना है। यह समावेशी शिक्षा, सुलभ बुनियादी ढांचे, सार्थक रोजगार और सक्रिय सामाजिक एकीकरण के ज़रिए संभव होगा। यह बात विभाग के सचिव तुकाराम मुंडे ने कही।
इस योजना के तहत कई महत्वपूर्ण रणनीतियाँ बनाई गई हैं। सबसे पहले, सार्वजनिक भवनों, परिवहन व्यवस्थाओं और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को पूरी तरह से सुलभ बनाया जाएगा। इसमें रैंप, टैक्टाइल फ्लोरिंग (स्पर्श योग्य फर्श), ब्रेल साइनेज (अंधों के लिए सांकेतिक चिन्ह) और ऑडियो-विजुअल एड्स (श्रव्य-दृश्य सहायक उपकरण) जैसी सुविधाएं शामिल होंगी। पूरे राज्य में ऐसे भवनों की जांच की जाएगी और ज़रूरी बदलाव किए जाएंगे।

दूसरा, शिक्षा, रोज़गार और सार्वजनिक सेवाओं में दिव्यांगजनों के साथ किसी भी तरह के भेदभाव को रोका जाएगा। स्कूलों और कार्यस्थलों पर उन्हें उचित सहायता दी जाएगी। इसके लिए विशेष रोज़गार विनिमय केंद्र (एम्प्लॉयमेंट एक्सचेंज) खोले जाएंगे और समावेशी भर्ती अभियान चलाए जाएंगे। साथ ही, दिव्यांगजनों की राजनीतिक और नागरिक भागीदारी को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।

तीसरा, शिक्षा और कौशल विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। सुलभ उपकरणों, सहायक तकनीकों और अनुकूलित समर्थन के साथ समावेशी शिक्षा सुनिश्चित की जाएगी। जो बच्चे स्कूल छोड़ देते हैं, उनके लिए वैकल्पिक शिक्षा प्रणाली और ब्रिजिंग कार्यक्रम चलाए जाएंगे। समावेशी शिक्षण विधियों और सीखने के उपकरणों पर शोध और विकास के लिए भी धन दिया जाएगा।

चौथा, स्वास्थ्य, पुनर्वास और कल्याण को मज़बूत किया जाएगा। शुरुआती हस्तक्षेप केंद्र (अर्ली इंटरवेंशन सेंटर्स) और सामुदायिक पुनर्वास कार्यक्रम स्थापित किए जाएंगे। इसमें थेरेपी, परामर्श और सहायक उपकरण जैसी बहु-विषयक देखभाल (मल्टीडिसिप्लिनरी केयर) प्रदान की जाएगी। शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं तक समान पहुंच सुनिश्चित की जाएगी, खासकर कमज़ोर समूहों के लिए।

पांचवां, दिव्यांगजनों के अधिकारों की निगरानी और सुरक्षा की जाएगी। राज्य आयुक्त को नीतियों के कार्यान्वयन, धन के उपयोग और अधिकारों के उल्लंघन पर नज़र रखने के लिए सशक्त बनाया जाएगा। दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 (RPwD Act, 2016) जैसे राष्ट्रीय और वैश्विक अधिकारों के ढांचे के साथ दिव्यांगजन नीतियों को संरेखित किया जाएगा। यह दस्तावेज़ दिव्यांगजनों के लिए एक बेहतर और समावेशी भविष्य की नींव रखेगा।