अरावली संरक्षण के नए मानकों पर उठे सवाल

नवभारत टाइम्स

हरियाणा सरकार ने अरावली की परिभाषा बदली है। नए मानकों में ऊंचाई 100 मीटर और आयु एक अरब वर्ष से अधिक रखी गई है। पर्यावरणविदों ने इसे अवैज्ञानिक बताया है। उनका कहना है कि इससे अरावली के कई हिस्से संरक्षण से बाहर हो सकते हैं। यह कदम क्षेत्र की जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र के लिए खतरनाक है।

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हरियाणा सरकार ने अरावली रेंज की परिभाषा में बड़ा बदलाव किया है। अब अरावली की न्यूनतम ऊंचाई 100 मीटर और जियोलॉजिकल एज (भूवैज्ञानिक आयु) एक अरब वर्ष से अधिक मानी जाएगी। इस नए नियम से पर्यावरणविदों में हड़कंप मच गया है। उनका कहना है कि यह फैसला अवैज्ञानिक है और इससे अरावली के कई अहम हिस्से कानूनी सुरक्षा से बाहर हो जाएंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ ऊंचाई और उम्र को आधार बनाना अरावली की जैव विविधता (बायोडायवर्सिटी) और पूरे इकोलॉजिकल सिस्टम (पारिस्थितिकी तंत्र) को बचाने के लिए काफी नहीं है। यह नियम लागू होने पर वन्यजीवों के घर, पानी के स्रोत और जंगल खतरे में पड़ सकते हैं। साथ ही, अवैध खनन और अतिक्रमण की घटनाएं भी बढ़ सकती हैं।
पर्यावरणविदों ने इस नए मानक को अरावली के पारंपरिक और नाजुक हिस्सों के लिए तबाही जैसा बताया है। उनका कहना है कि इससे पर्यावरण का संतुलन लंबे समय तक बिगड़ सकता है। यह फैसला अरावली की सुरक्षा के लिए एक बड़ा झटका है।