दिल्ली से कम घरेलू उपयोग, फिर भी तेजी से गिर रहा भूजल स्तर

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नोएडा में घरेलू उपयोग दिल्ली से काफी कम है, फिर भी भूजल स्तर लगातार गिर रहा है। पिछले नौ वर्षों में यह 6.22 मीटर नीचे चला गया है। निर्माण स्थलों पर बेसमेंट बनाने के लिए होने वाली डिवाटरिंग और उद्योगों द्वारा पानी की बर्बादी इसका मुख्य कारण है।

groundwater level drops sharply in noida unchecked exploitation at construction sites responsible despite lower domestic use than delhi

Sunil.Pandey2

@Timesofindia.com

n ग्रेटर नोएडा : जिले में भूजल दोहन को लेकर चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। केंद्रीय भूजल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) के आंकड़ों के अनुसार, नोएडा में दिल्ली की तुलना में घरेलू कार्यों के लिए 67 फीसदी कम भूजल का उपयोग होता है। दिल्ली में कुल दोहन का 71.88% हिस्सा घरेलू कामों में जाता है, जबकि नोएडा में यह मात्र 3.21% है। इसके बावजूद नोएडा का वाटर लेवल सुधरने के बजाय लगातार बिगड़ रहा है।

इसका मुख्य कारण निर्माण साइटों पर होने वाला बेहिसाब भूजल दोहन है। पिछले नौ वर्षों में नोएडा का भूजल स्तर 6.22 मीटर (करीब 20 फीट) नीचे गिर चुका है। रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में मानसून से पहले ही स्तर में नौ फीट की भारी गिरावट दर्ज की गई। गढ़ी चौखंडी जैसे इलाकों में पानी 37 मीटर की गहराई तक पहुंच गया है। ग्रेटर नोएडा में गुलिस्तानपुर गांव में भूजल 24 मीटर पर है, जबकि बिसरख ब्लॉक में भारी बारिश के बाद भी जलस्तर दो मीटर और गिर गया है। पर्यावरणविद विक्रांत तोंगड़ का कहना है कि निर्माण कार्यों के दौरान बेसमेंट बनाने के लिए होने वाली डिवाटरिंग और उद्योगों द्वारा पानी की बर्बादी इस संकट की असली वजह है। यदि निर्माण कार्यों में भूजल के इस्तेमाल पर अंकुश नहीं लगा, तो आने वाले समय में स्थिति और भयावह हो सकती है।

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