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अम्मा की बिछिया
नवभारत टाइम्स•
घर की अम्मा की चांदी की बिछिया खो गई है। वह सुबह से ही अलमारी और संदूक छान रही हैं। अम्मा को चांदी के बढ़ते दाम याद आए थे। बिछिया से उनकी कई यादें जुड़ी हैं। खाना-पीना छोड़कर पूरा परिवार बिछिया की तलाश में जुट गया है। यह बिछिया अम्मा के लिए बहुत कीमती है।
घरवाले उस दिन हैरान थे कि अम्मा को आखिर क्या हो गया था। सुबह उठते ही राम नाम जपने वाली और पूजा-पाठ में लीन रहने वाली अम्मा, अचानक अलमारी का सामान बिखेर रही थीं। सालों पुराना संदूक खोलकर डिबिया-डिबिया छान रही थीं। किसी को समझ नहीं आ रहा था कि अम्मा क्या ढूंढ रही हैं। घर के हर सदस्य ने उनसे पूछा, लेकिन अम्मा बस खुद से कुछ बुदबुदा रही थीं और अपनी याददाश्त को कोस रही थीं। आखिरकार, बीसियों बार पूछने पर उन्होंने राज खोला कि उनकी चांदी की बिछिया कहीं गायब हो गई है और उन्हें मिल नहीं रही है।
अम्मा को वैसे तो दुनियादारी से कोई मतलब नहीं था, लेकिन हाल ही में उन्होंने अखबार में पढ़ा था कि चांदी का भाव पौने चार लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। यह खबर पढ़कर उन्हें कुछ याद आया और तभी से वह अपनी अलमारी और संदूकची छानने में लगी थीं। उस बिछिया की जोड़ी से अम्मा की कई अनमोल यादें जुड़ी हुई हैं। इस वजह से अम्मा ने खाना-पीना भी छोड़ दिया है। अब पूरा घर अम्मा के साथ मिलकर उस गुम हुई बिछिया को ढूंढने में जुट गया है।अम्मा का यह नया रूप देखकर घर के सभी सदस्य हैरान थे। वह हमेशा सुबह उठकर राम नाम जपती थीं। स्नान के बाद नियम से पूजा-पाठ करती थीं। उन्होंने अपने कमरे में एक छोटा सा मंदिर भी बनवा रखा था, जिसमें वह ठाकुर जी की सेवा में लीन रहती थीं। उन्हें दुनियादारी से कोई लेना-देना नहीं था। वह बस अपनी तुलसी की माला से मतलब रखती थीं। लेकिन उस दिन कुछ ऐसा हुआ कि उन्होंने अपना रोज का नियम छोड़ दिया। सुबह से ही वह स्नान-ध्यान छोड़कर अपनी अलमारी का सारा सामान बिखेर रही थीं। उन्होंने सालों पुराना संदूक खोला और उसमें रखी हर छोटी-बड़ी डिबिया बाहर निकाल लीं।
घर के हर सदस्य ने अपनी-अपनी तरह से अम्मा से पूछा कि आखिर ऐसा क्या खो गया है, जिसकी वजह से वह पूरे घर को परेशान कर रही हैं। लेकिन अम्मा किसी का जवाब नहीं दे रही थीं। वह बस अपने आप से कुछ बुदबुदा रही थीं। वह खुद को कोस रही थीं कि वह कभी कुछ भूलती नहीं थीं, लेकिन अब उनकी याददाश्त उन्हें धोखा दे रही है।
जब घर वालों ने बीसियों बार पूछा, तब जाकर अम्मा ने अपनी परेशानी का राज खोला। उन्होंने बताया कि उनकी चांदी की बिछिया कहीं गायब हो गई है। उन्होंने पूरा घर छान मारा है, लेकिन उन्हें वह बिछिया कहीं नहीं मिल रही है।
जैसा कि बताया गया है, अम्मा को इस उम्र में दुनियादारी से कोई मतलब नहीं था। लेकिन कुछ दिनों पहले उनकी नजर अखबार की एक खबर पर पड़ी थी। उस खबर में लिखा था कि चांदी का भाव पौने चार लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। कभी अखबार न छूने वाली अम्मा ने उस दिन चांदी की कीमत बेतहाशा बढ़ने वाली खबर को बार-बार पढ़ा था। उन्होंने आंखें फाड़-फाड़ कर और चश्मा पोंछ-पोंछ कर वह खबर पढ़ी थी। तभी उन्हें कुछ याद आया था और इसके बाद उन्होंने अपनी अलमारी और संदूकची छाननी शुरू कर दी थी।
उस बिछिया की एक जोड़ी से अम्मा की कितनी ही यादें जुड़ी हुई हैं। वे यादें उनके लिए अनमोल हैं। इस वजह से अम्मा ने खाना-पीना भी छोड़ दिया है। अब पूरा घर अम्मा के साथ मिलकर उस गुम हो चुकी बिछिया को खोजने में जुट गया है। यह एक ऐसी तलाश बन गई है, जिसमें पूरा परिवार एक साथ मिलकर अम्मा की मदद कर रहा है।