दोबारा गढ़े जाएंगे चारों फॉरेस्ट डिविजन

नवभारत टाइम्स

दिल्ली में नए जिलों के गठन के बाद वन विभाग के चार फॉरेस्ट डिविजन का पुनर्गठन होगा। साउथ, सेंट्रल, नार्थ और वेस्ट फॉरेस्ट डिविजन को नए जिलों के अनुसार छोटा किया जाएगा। इससे वन विभाग की निगरानी क्षमता बढ़ेगी। पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि यह पहल विभाग को पूरी क्षमता से काम करने में मदद करेगी।

delhis 4 forest divisions to be reorganized smaller as per new districts better monitoring possible
दिल्ली में नए जिले बनने के बाद वन विभाग में बड़ा फेरबदल होने वाला है। राजधानी के चार मौजूदा फॉरेस्ट डिविजन, साउथ, सेंट्रल, नार्थ और वेस्ट, को नए जिलों के हिसाब से छोटा किया जाएगा। इस पुनर्गठन से संसाधनों और मैनपावर की समीक्षा की जा रही है, ताकि वन विभाग अपनी पूरी क्षमता से काम कर सके और बेहतर निगरानी हो सके। पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि यह कदम वन विभाग को और अधिक प्रभावी बनाएगा। दिसंबर 2025 में दिल्ली में जिलों की संख्या 11 से बढ़कर 13 हो गई है, जिसके चलते यह पुनर्गठन आवश्यक हो गया है।

पहले दिल्ली में सिर्फ तीन फॉरेस्ट डिविजन हुआ करती थीं, जिससे काम में काफी दिक्कतें आती थीं। हर फॉरेस्ट डिविजन का एक डिप्टी कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट (डीसीएफ) होता है, जो ट्री ऑफिसर की तरह काम करता है। सेंट्रल डिविजन बनने से पहले यह दूरी काफी ज्यादा थी और मैनपावर भी कम था। अब जब दो नए जिले और जुड़ गए हैं, तो फॉरेस्ट डिविजन को भी इन जिलों के अनुसार छोटा किया जा रहा है। इसके लिए कितनी मैनपावर की जरूरत होगी, इसका भी आकलन किया जा रहा है।
वन विभाग ने 2017 में एक स्टडी की थी, जिसमें 500 जुड़े हुए वन क्षेत्र और करीब 90 गांव शामिल थे। आज भी करीब 200 किलोमीटर के जंगलों को संरक्षण की जरूरत है। इसमें दिल्ली रिज के रिजर्व और प्रोटेक्टेड फॉरेस्ट भी शामिल हैं। वन विभाग सिर्फ जंगली जानवरों के संरक्षण का ही काम नहीं कर रहा, बल्कि शहर में हरियाली बढ़ाने पर भी जोर दे रहा है। दिल्ली स्टैटिकल हैंडबुक 2025 के अनुसार, दिल्ली का ग्रीन कवर लगातार बढ़ रहा है। 2023 में यह 25.04 प्रतिशत था, जो 2021 के 23.06 प्रतिशत से ज्यादा है।

यह पुनर्गठन वन विभाग को छोटे और अधिक प्रबंधनीय हिस्सों में बांटकर काम को आसान बनाएगा। इससे अधिकारी सीधे तौर पर अपने इलाके की निगरानी कर पाएंगे और किसी भी समस्या का तुरंत समाधान निकाल सकेंगे। पहले जब डिविजन बड़े होते थे, तो एक डीसीएफ के लिए पूरे इलाके पर नजर रखना मुश्किल हो जाता था। नए जिलों के आधार पर डिविजन छोटे होने से हर डिविजन के डीसीएफ अपने क्षेत्र को बेहतर तरीके से समझ पाएंगे और वहां के पेड़ों और वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित कर पाएंगे।

पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा है कि इससे वन विभाग अपनी पूरी क्षमता के साथ काम कर पाएगा। उनका मानना है कि नए जिलों के अनुसार डिविजन का पुनर्गठन वन विभाग के कामकाज में एक नई जान फूंकेगा। यह कदम दिल्ली को और हरा-भरा बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

वन विभाग के अधिकारी ने बताया कि "साउथ, सेंट्रल, नार्थ और वेस्ट फॉरेस्ट डिविजन को पुनर्गठित किया जाएगा।" उन्होंने यह भी कहा कि "नए जिले बनने के बाद फॉरेस्ट डिविजन भी इन जिलों के आधार पर पुनर्गठित की जा रही हैं।" यह स्पष्ट करता है कि प्रशासनिक ढांचे में बदलाव का सीधा असर वन विभाग के कामकाज पर पड़ रहा है।

यह भी याद रखना महत्वपूर्ण है कि जब दिल्ली में केवल तीन फॉरेस्ट डिविजन थीं, तब काफी चुनौतियां सामने आती थीं। हर फॉरेस्ट डिविजन में एक डिप्टी कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट (डीसीएफ) होता है। यह डिविजन ट्री ऑफिसर की तरह काम करता है। सेंट्रल डिविजन बनने से इस दूरी में कमी आई और मैनपावर बढ़ा। अब एक बार फिर दो जिले बढ़े हैं, इसलिए डिविजन को और छोटा करना जरूरी हो गया है।

वन विभाग का काम सिर्फ पेड़ों को बचाना नहीं है, बल्कि शहर में हरियाली को बढ़ाना भी है। दिल्ली स्टैटिकल हैंडबुक 2025 के आंकड़े बताते हैं कि यह प्रयास सफल हो रहा है। ग्रीन कवर का बढ़ना इस बात का प्रमाण है कि वन विभाग और दिल्ली सरकार मिलकर शहर को हरा-भरा बनाने में कामयाब हो रहे हैं। यह न केवल पर्यावरण के लिए अच्छा है, बल्कि शहरवासियों के स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है।