देर पर दुरुस्त

नवभारत टाइम्स

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता फाइनल हो गया है। इस डील से भारतीय निर्यातकों को बड़ी राहत मिलेगी। अमेरिकी टैरिफ में कमी से भारत की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति मजबूत होगी। लंबे समय से चली आ रही अनिश्चितता खत्म हो गई है। शेयर बाजार में भी इस खबर से तेजी देखी गई है।

india us trade deal finalized tariff reduction relief for exporters
करीब एक साल पहले, फरवरी 2025 में पीएम नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के बीच व्यापार समझौते पर बातचीत शुरू हुई थी, लेकिन इस डील को कई उतार-चढ़ाव से गुजरना पड़ा। भारत-अमेरिका के द्विपक्षीय रिश्ते भी इस दौरान कई बार ऊपर-नीचे हुए। आखिरकार, जब डील फाइनल होने की खबर आई, तो बाजार की प्रतिक्रिया ने इसके महत्व और बेसब्री से किए जा रहे इंतजार को साफ दिखा दिया। इस समझौते से भारत पर लगे टैरिफ का दबाव कम होगा, जिससे भारतीय निर्यातकों को प्रतिस्पर्धा में बेहतर स्थिति मिलेगी और लंबे समय से चली आ रही अनिश्चितता खत्म होगी। हालांकि, कृषि, डेयरी, तेल की खरीद और रूस से रिश्तों जैसे मुद्दों पर अभी भी स्पष्टता का इंतजार है, और विपक्ष भी डील की जानकारी मांग रहा है।

यह व्यापार समझौता भारत और अमेरिका के बीच एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसकी शुरुआत फरवरी 2025 में हुई थी। पीएम नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने इस पर बातचीत शुरू करने पर सहमति जताई थी। इस एक साल में दोनों देशों के रिश्ते भी कई बार बदले, लेकिन अंततः डील फाइनल होने से बाजार में खुशी की लहर दौड़ गई। सेंसेक्स में 2.54% और निफ्टी में 2.51% की उछाल ने इस बात का सबूत दिया कि सभी इस खबर का कितनी बेसब्री से इंतजार कर रहे थे।
ट्रंप प्रशासन ने पहले भारत से आने वाले सामानों पर कुल 50% टैरिफ लगाया था, जिससे भारतीय निर्यातकों पर काफी दबाव था। भारत अपने कुल निर्यात का लगभग 20% अमेरिका को भेजता है, जबकि आयात का करीब 6% अमेरिका से करता है। इस नए समझौते से यह टैरिफ का दबाव कम होगा।

हालांकि डील की पूरी जानकारी अभी सामने नहीं आई है, लेकिन शुरुआती जानकारी के अनुसार, ट्रंप ने भारत पर टैरिफ को घटाकर 18% कर दिया है। यह भारतीय निर्यातकों के लिए एक बड़ी राहत है। अमेरिका के बड़े निर्यातकों के बीच भारत की स्थिति अब पहले से बेहतर होगी। इसकी तुलना में, बांग्लादेश और वियतनाम पर 20%, दक्षिण कोरिया पर 25% और चीन पर 34% टैरिफ है। इस कमी से भारतीय उद्योग जगत को इन देशों के उद्योगों के साथ प्रतिस्पर्धा में एक महत्वपूर्ण बढ़त मिलेगी।

इस डील पर लंबे समय से बनी अनिश्चितता न केवल भारत-अमेरिका द्विपक्षीय रिश्तों को प्रभावित कर रही थी, बल्कि घरेलू स्तर पर भी नुकसान पहुंचा रही थी। यही कारण है कि डील की खबर आते ही शेयर बाजार में इतनी बड़ी उछाल देखी गई। इस समझौते का समय भी काफी अहम है। पिछले हफ्ते ही भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने एक बड़े FTA को अंतिम रूप दिया था, जिसे 'मदर ऑफ ऑल डील्स' कहा जा रहा है।

अमेरिकी टैरिफ के बाद, भारत ने अपने निर्यात में विविधता लाने की कोशिश शुरू की थी, और यह कोशिश जारी रहनी चाहिए। किसी एक देश पर अत्यधिक निर्भरता के खतरे सभी के सामने हैं। इसके अलावा, इस डील से जुड़ी कई चीजें अभी भी स्पष्ट नहीं हैं। कृषि और डेयरी सेक्टर को लेकर जो गतिरोध बना हुआ था, उसका समाधान कैसे निकाला गया, यह देखना बाकी है। तेल की खरीद और रूस के साथ भारत के रिश्तों जैसे मुद्दे भी अहम हैं। विपक्ष भी डील की जानकारी को लेकर सरकार पर दबाव बना रहा है। उम्मीद है कि सरकार के जवाब से सभी शंकाएं दूर होंगी और स्थिति स्पष्ट होगी।