जैसे फूल ख़ुशबू से भरे होते हैं, वैसे ही हममें प्रेम भरा हो

Contributed byसुरक्षित गोस्वामी|नवभारत टाइम्स

जीवन में प्रेम का होना बहुत जरूरी है। प्रेम मन के सभी विकारों को दूर करता है। छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करने की बजाय हमें प्रेम का भाव रखना चाहिए। प्रेम को आध्यात्मिक स्तर पर ले जाने से जीवन में सकारात्मकता आती है। प्रेम स्वरूप हो जाना ही सच्चा अनुभव है। हमें स्वयं को प्रेम में डुबो देना चाहिए।

love is the nectar of life the surefire way to remove mental disorders
जीवन में प्रेम का महत्व सर्वोपरि है। सुबह से शाम तक हमें अपने अंदर प्रेम को बढ़ाने और उसे बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए। प्रेम एक ऐसी दवा है जो हर बीमारी को दूर कर सकती है। मन की बेचैनी, तनाव, गुस्सा और चिड़चिड़ाहट तभी तक रहती है जब तक हमारे अंदर प्रेम नहीं होता। जैसे ही प्रेम का संचार मन में होता है, ये सारी परेशानियां अपने आप दूर होने लगती हैं।

अक्सर हम छोटी-छोटी बातों पर भड़क जाते हैं। कोई भी बात हमारी भावनाओं को हिला देती है और हम भावनात्मक स्तर पर आ जाते हैं। कभी-कभी यह भावनात्मक स्तर इतना गहरा हो जाता है कि हमारी बाकी सारी क्षमताएं - बौद्धिक, शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक - कहीं खो जाती हैं। यदि हम अपनी भावनाओं में प्रेम भर दें, तो वही हर जगह दिखाई देगा। जब इस प्रेम को आध्यात्मिक स्तर पर ले जाया जाता है, तो यह हमारे हर विकार को साफ कर देता है और हमें एक उच्च स्थिति में ले आता है। प्रेम का मतलब सिर्फ किसी से प्यार करना नहीं है, बल्कि प्रेम का स्वरूप बन जाना है। प्रेम में पूरी तरह डूब जाना ही उसका सच्चा अनुभव है।
हमारा प्रयास होना चाहिए कि हम खुद प्रेम में डूब जाएं। जैसे रसगुल्ला पूरी तरह रस से भरा होता है, वैसे ही हमारे अंदर भी प्रेम इतना भरा होना चाहिए कि वह हमारे शब्दों से झलके। अगर कोई हमारी बुराई करे या अपमान करे, तब भी हमें उसे प्रेम के रूप में ही देखने की कोशिश करनी चाहिए। असल में, प्रेम किसी और के लिए नहीं, बल्कि अपने लिए होता है। जैसे फूलों में खुशबू होती है और जो भी उसके पास आता है, वह उसी महक को महसूस करता है। इसलिए हमें यह सोचना चाहिए कि आखिर कौन सी बात हमें प्रेम से दूर करती है। अगर हम किसी शक्ति के गुलाम हो गए हैं, तो हमें यह पहचानने की जरूरत है कि वह क्या है। उस शक्ति को हटाकर हमें वहां प्रेम की ताकत लगानी होगी। बस यह बात गांठ बांध लेनी चाहिए - मुझे प्रेम में रहना है, केवल प्रेम में रहना है।

प्रेम को बढ़ाने के लिए हमें अपने अंदर की नकारात्मकता को पहचानना होगा। कई बार हम अनजाने में ही कुछ ऐसी आदतों या विचारों के वश में आ जाते हैं जो हमें प्रेम से दूर ले जाते हैं। यह समझना जरूरी है कि कौन सी चीज हमें प्रेम से दूर कर रही है। क्या यह हमारा अहंकार है, हमारी असुरक्षा की भावना है, या फिर किसी पुरानी कड़वी याद का असर है? जब हम इन चीजों को पहचान लेते हैं, तो उन्हें दूर करना आसान हो जाता है।

प्रेम का अनुभव केवल दूसरों के प्रति ही नहीं, बल्कि स्वयं के प्रति भी होना चाहिए। जब हम खुद से प्रेम करते हैं, तो हम अपनी कमियों को स्वीकार कर पाते हैं और उन्हें सुधारने का प्रयास करते हैं। यह आत्म-प्रेम हमें दूसरों के प्रति अधिक दयालु और क्षमाशील बनाता है। जैसे एक दीपक खुद जलकर दूसरों को रोशनी देता है, वैसे ही जब हम प्रेम से भरे होते हैं, तो हमारी उपस्थिति ही दूसरों के लिए सुकून और खुशी का कारण बनती है।

प्रेम को जीवन का आधार बनाने के लिए निरंतर प्रयास की आवश्यकता होती है। यह कोई एक दिन का काम नहीं है, बल्कि एक सतत प्रक्रिया है। हर पल, हर क्षण हमें यह याद रखना होगा कि हमारा लक्ष्य प्रेम में जीना है। जब हम इस लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करते हैं, तो जीवन की छोटी-छोटी परेशानियां हमें विचलित नहीं कर पातीं। हम हर स्थिति में शांति और संतुलन बनाए रख पाते हैं।

प्रेम की शक्ति असीम है। यह न केवल हमारे व्यक्तिगत जीवन को बेहतर बनाती है, बल्कि हमारे आसपास के माहौल को भी सकारात्मक बनाती है। जब हम प्रेम से भरे होते हैं, तो हम दूसरों की मदद करने के लिए प्रेरित होते हैं, क्षमा करने के लिए तैयार रहते हैं और हर किसी के साथ सम्मान से पेश आते हैं। यह प्रेम ही है जो हमें एक बेहतर इंसान बनाता है और एक सुंदर समाज का निर्माण करता है। इसलिए, आइए हम सब मिलकर अपने अंदर प्रेम को बढ़ाएं और इसे अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाएं।