Picassos Sharp Reply To The Nazi Officer This Is Your Work
पिकासो का जवाब
नवभारत टाइम्स•
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान पेरिस में पिकासो के घर नाजी अधिकारी पहुंचे। उन्होंने पिकासो की प्रसिद्ध पेंटिंग 'गुएर्निका' को देखा। अधिकारी ने पूछा कि क्या यह उनका काम है। पिकासो ने जवाब दिया कि यह उनका नहीं, बल्कि अधिकारी का काम है। उन्होंने कहा कि जो वे कर रहे हैं, उसकी तुलना में दुनिया का हर काम बेहतर है।
द्वितीय विश्वयुद्ध के शुरुआती दौर में, जब नाजी सेना यूरोप में अपना खूनी पंजा जमा रही थी, तब 1940 में फ्रांस की राजधानी पेरिस पर जर्मन सेना का कब्ज़ा हो गया। इसी दौरान, मशहूर चित्रकार पाब्लो पिकासो पेरिस में ही थे। एक दिन नाजी खुफिया पुलिस उनके घर पहुंची और तलाशी ली। पुलिस की नज़र पिकासो की मशहूर पेंटिंग ‘गुएर्निका’ पर पड़ी, जो स्पेन के गुएर्निका शहर पर हुई बमबारी के विरोध में बनाई गई थी और युद्ध की बर्बरता दिखाती थी। जब एक अधिकारी ने पूछा कि क्या यह पेंटिंग उन्होंने बनाई है, तो पिकासो ने जवाब दिया, "नहीं… यह तुम्हारा काम है।" जब अधिकारी ने पूछा कि उन्हें ऐसे काम से क्या मिलता है, तो पिकासो ने कहा, "जो तुम कर रहे हो, उसकी तुलना में दुनिया का हर काम बेहतर है।" पिकासो की इस हिम्मत के आगे सत्ता का घमंड हार गया और अधिकारी बिना कुछ कहे चला गया।
यह घटना द्वितीय विश्वयुद्ध के उन भयानक सालों की है, जब जर्मनी की नाजी सेना यूरोप में अपना क्रूर शासन फैला रही थी। साल 1940 में, हिटलर की सेना ने फ्रांस की राजधानी पेरिस पर कब्ज़ा कर लिया था। उस समय, दुनिया के जाने-माने चित्रकार पाब्लो पिकासो पेरिस में ही रह रहे थे।एक दिन, नाजी खुफिया पुलिस का एक दल पिकासो के घर पहुंचा। उन्होंने पूरे घर की तलाशी ली। पिकासो यह सब शांति से देखते रहे। तभी, एक अधिकारी की नज़र दीवार पर टंगी पिकासो की एक बहुत प्रसिद्ध पेंटिंग ‘गुएर्निका’ पर पड़ी। यह पेंटिंग उन्होंने 1937 में स्पेन के बास्क शहर गुएर्निका पर हुई जर्मन विमानों की बमबारी के विरोध में बनाई थी। यह पेंटिंग युद्ध की भयानक सच्चाई को दर्शाती थी।
पेंटिंग देखकर अधिकारी ने पिकासो से पूछा, "क्या यह तुम्हारा काम है?" पिकासो ने बड़े ही शांत लेकिन तीखे अंदाज़ में जवाब दिया, "नहीं… यह तुम्हारा काम है।" अधिकारी यह सुनकर थोड़ा सकपका गया। फिर उसने पूछा, "तुम्हें ऐसे काम से क्या हासिल होता है?"
पिकासो ने पूरी हिम्मत से जवाब दिया, "जो तुम कर रहे हो, उसकी तुलना में दुनिया का हर काम बेहतर है।" एक कलाकार की इस नैतिक हिम्मत के सामने सत्ता का अहंकार झुक गया। अधिकारी बिना कुछ कहे वहां से चला गया। यह घटना दिखाती है कि कैसे एक कलाकार की कला और उसकी हिम्मत ने सत्ता को भी चुप करा दिया।