‘ बिभा’ एक तारा

नवभारत टाइम्स

अंतरराष्ट्रीय खगोलीय संघ ने भारतीय भौतिक विज्ञानी बिभा चौधरी के सम्मान में एक तारे का नाम 'बिभा' रखा है। यह तारा पृथ्वी से 340 प्रकाश-वर्ष दूर है। बिभा चौधरी ने बचपन से ही विज्ञान में रुचि दिखाई। उन्होंने कॉस्मिक किरणों का अध्ययन किया और मेसॉन कण की पहचान की।

bibha star named in honor of indian woman scientist bibha choudhury
अंतरिक्ष में भारतीय महिलाओं के योगदान को याद करने के लिए, हमें दूरबीन से आकाश की ओर देखना चाहिए। पृथ्वी से लगभग 340 प्रकाश-वर्ष दूर एक पीला तारा है, जो सूर्य से बड़ा, गर्म और पुराना है। इस तारे का नाम 'बिभा' है। 2019 में, अंतरराष्ट्रीय खगोलीय संघ ने भारतीय भौतिक विज्ञानी बिभा चौधरी के सम्मान में इसका नाम रखा। बिभा चौधरी का जन्म 1913 में कोलकाता के एक पढ़े-लिखे परिवार में हुआ था। बचपन से ही उन्हें विज्ञान में बहुत रुचि थी। उन्होंने 1936 में भौतिकी में एम.एससी. की डिग्री हासिल की। वे अपने फिजिक्स विभाग में अकेली छात्रा थीं। उन्होंने महान वैज्ञानिक डी.एम. बोस के साथ मिलकर शोध कार्य शुरू किया। 1938 से 1942 तक, उन्होंने दार्जिलिंग की ऊंची पहाड़ियों पर जाकर कॉस्मिक किरणों का अध्ययन किया। कम संसाधनों के बावजूद, उन्होंने 'हाफटोन' फोटोग्राफिक प्लेटों का उपयोग करके 'मेसॉन' नामक कण की पहचान की। भारत की आजादी के बाद, जब होमी जहांगीर भाभा ने टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) की स्थापना की, तो बिभा चौधरी वहां शामिल होने वाली पहली महिला वैज्ञानिक बनीं।

बिभा चौधरी का जन्म 1913 में कोलकाता में हुआ था। उनका परिवार शिक्षित था और बचपन से ही उनकी विज्ञान में गहरी रुचि थी। उन्होंने 1936 में भौतिकी में एम.एससी. की पढ़ाई पूरी की। उस समय, फिजिक्स विभाग में वे अकेली छात्रा थीं। यह अपने आप में एक बड़ी बात थी।
उन्होंने प्रसिद्ध वैज्ञानिक डी.एम. बोस के मार्गदर्शन में अपना शोध कार्य शुरू किया। 1938 से 1942 तक, उन्होंने दार्जिलिंग की ठंडी और ऊंची पहाड़ियों पर जाकर कॉस्मिक किरणों का अध्ययन किया। यह काम बहुत मुश्किल था, खासकर तब जब संसाधन बहुत कम थे। लेकिन बिभा चौधरी ने हार नहीं मानी। उन्होंने 'हाफटोन' फोटोग्राफिक प्लेटों का इस्तेमाल करके 'मेसॉन' नामक एक महत्वपूर्ण कण की पहचान की। यह एक बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि थी।

भारत को आजादी मिलने के बाद, डॉ. होमी जहांगीर भाभा ने टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) की स्थापना की। बिभा चौधरी इस प्रतिष्ठित संस्थान में शामिल होने वाली पहली महिला वैज्ञानिक थीं। यह भारतीय विज्ञान के इतिहास में एक महत्वपूर्ण पल था, जिसने भविष्य की महिला वैज्ञानिकों के लिए रास्ता खोला। उनके काम और समर्पण ने यह साबित किया कि महिलाएं भी विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।