‘सिर्फ वोट के लिए रह गई है जाति’

नवभारत टाइम्स

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि जाति अब केवल वोट बैंक तक सीमित रह गई है। उन्होंने बताया कि जाति का पारंपरिक आधार समाप्त हो चुका है। नेता चुनाव जीतने के लिए जाति के नाम पर वोट मांगते हैं क्योंकि समाज में इसकी पहचान गहरी है।

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आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि जाति व्यवस्था अब सिर्फ निजी स्वार्थ और राजनीतिक लाभ के लिए ही बची है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जाति का पारंपरिक आधार, जो कि व्यवसाय से जुड़ा था, अब समाप्त हो चुका है। भागवत के अनुसार, जाति के नाम पर होने वाले झगड़ों को खत्म करने के लिए समाज में संवेदनशीलता और नरम सोच की आवश्यकता है। नेताओं द्वारा जाति के नाम पर वोट मांगने की प्रवृत्ति पर उन्होंने कहा कि यह समाज में जाति की गहरी पहचान के कारण है। नेताओं के लिए चुनाव जीतना उनकी विचारधारा से अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।

मोहन भागवत ने यह भी बताया कि जाति का पुराना आधार, यानी काम-धंधा, अब खत्म हो चुका है। उन्होंने कहा कि जाति के नाम पर होने वाले झगड़ों को खत्म करने के लिए संवेदनशीलता और एक नरम सोच की जरूरत है।
भागवत ने इस बात पर जोर दिया कि नेता जाति के नाम पर वोट इसलिए मांगते हैं क्योंकि समाज में जाति की पहचान आज भी बहुत गहरी है। उन्होंने कहा कि नेताओं के लिए चुनाव जीतना उनकी विचारधारा से ज्यादा जरूरी हो गया है।