Prof S Pranam Singh Receives State Lalit Kala Akademis Highest Adhisadasyata Samman
प्रो. एस प्रणाम सिंह को अधिसदस्यता सम्मान
नवभारत टाइम्स•
राज्य ललित कला अकादमी के स्थापना दिवस पर कला और सम्मान का संगम हुआ। मुख्य अतिथि प्रो. मांडवी सिंह ने वाराणसी के वरिष्ठ कलाकार प्रो. एस प्रणाम सिंह को अकादमी के सर्वोच्च 'अधिसदस्यता सम्मान' से सम्मानित किया। इस अवसर पर राज्य स्तरीय कला प्रदर्शनी भी लगी। इसमें प्रदेश भर के कलाकारों की सौ से अधिक कलाकृतियाँ प्रदर्शित हुईं।
लखनऊ में राज्य ललित कला अकादमी के स्थापना दिवस समारोह का दूसरा दिन कला और सम्मान से सराबोर रहा। कैसरबाग स्थित लाल बारादरी भवन में आयोजित इस खास मौके पर भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. मांडवी सिंह ने वाराणसी के वरिष्ठ कलाकार प्रो. एस प्रणाम सिंह को अकादमी का सर्वोच्च ' अधिसदस्यता सम्मान ' प्रदान किया। इस दौरान एक शानदार राज्य स्तरीय कला प्रदर्शनी भी सजी, जिसमें प्रदेश भर के 100 से अधिक कलाकारों ने अपनी कलाकृतियों से समा बांधा।
इस प्रदर्शनी में लखनऊ के कला एवं शिल्प महाविद्यालय के छात्र अरेंद्र चौधरी की 'जब शब्द मिटने लगे' नामक कलाकृति ने सबका ध्यान खींचा। यह लिथोग्राफी तकनीक से बनी एक प्रिंट मेकिंग कला है, जो कॉलेज के दिनों की यादों को ताज़ा करती है। वहीं, श्रेयांशी सिंह की 'जड़विहीन' पेंटिंग ने शहरीकरण के दौर में अपनी जड़ों और संस्कृति से दूर होते समाज पर एक गहरा संदेश दिया। उन्होंने एक्रेलिक माध्यम का इस्तेमाल कर यह खूबसूरत पेंटिंग बनाई।प्रेमशंकर प्रसाद की सिरेमिक कलाकृति भी प्रदर्शनी का एक खास आकर्षण रही। यह कलाकृति मिट्टी को खास आकार देकर बनाई जाती है और इसमें एक अलग ही चमक होती है। इस तरह, अकादमी के स्थापना दिवस पर कला के विभिन्न रूपों और प्रयोगों का एक अनूठा संगम देखने को मिला, जिसने कलाकारों की प्रतिभा को मंच दिया और दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। यह आयोजन कला जगत के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ।