Lus Designation War Vc Halts Posts Of Dean Director And Assistant Dean
एलयू में 'पदनाम' की जंग
नवभारत टाइम्स•
लखनऊ विश्वविद्यालय में वीसी प्रो. जेपी सैनी ने निदेशक और सहायक डीन के पदों पर रोक लगा दी है। पूर्व वीसी के कार्यकाल में इन पदों पर शिक्षकों की तैनाती हुई थी। कार्यपरिषद के इन निर्णयों को कुलाधिपति कार्यालय से मंजूरी नहीं मिली थी। अब केवल संकाय अध्यक्ष ही डीन के रूप में कार्य करेंगे।
लखनऊ विश्वविद्यालय में अब पांच डीन के साथ-साथ निदेशक और सहायक डीन के पदों पर भी वीसी प्रो. जेपी सैनी ने रोक लगा दी है। यह फैसला इसलिए लिया गया है क्योंकि इन पदों का विश्वविद्यालय के नियमों (स्टैट्यूड्स) में कोई जिक्र नहीं है। पूर्व वीसी प्रो. आलोक राय के कार्यकाल में इन पदों पर शिक्षकों की तैनाती की गई थी, लेकिन कुलाधिपति कार्यालय ने पिछले पांच सालों में इन पर सहमति नहीं दी। अब तक इन पदों पर काम कर रहे शिक्षक ही एडमिशन, रिसर्च, अकैडमिक्स और रिक्रूटमेंट जैसे कामों को संभालेंगे, जब तक कि नए पदों का नामकरण और जिम्मेदारी तय नहीं हो जाती।
लखनऊ विश्वविद्यालय में एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल हुआ है। वाइस चांसलर (वीसी) प्रो. जेपी सैनी ने पांच डीन के अलावा निदेशक और सहायक डीन के पदों पर भी तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। यह कदम विश्वविद्यालय के नियमों के तहत उठाया गया है, क्योंकि इन पदों का विश्वविद्यालय के मौजूदा नियमों (स्टैट्यूड्स) में कोई उल्लेख नहीं है। इससे पहले, न्यू कैंपस के लिए एक अलग निदेशक नियुक्त किया गया था, जिसे अब वीसी ने स्थगित कर दिया है। इसी तरह, कॉलेज डेवलपमेंट काउंसिल में डीन के साथ दो सहायक डीन भी तैनात किए गए थे, जिनके पदों पर भी अब रोक लगा दी गई है। इसका मतलब है कि इन पदों पर नियुक्त शिक्षक अब अपने प्रोफाइल में इन पदनामों का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे।यह पूरा मामला पूर्व वीसी प्रो. आलोक राय के कार्यकाल से जुड़ा है। उनके समय में विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद ने इन पदों पर शिक्षकों की नियुक्ति की थी। इन नियुक्तियों को मंजूरी के लिए कुलाधिपति कार्यालय भेजा गया था। हालांकि, पिछले पांच सालों में कुलाधिपति कार्यालय की ओर से इन पदों के आदेश पर कोई सहमति नहीं मिली। इसी वजह से, वर्तमान वीसी प्रो. जेपी सैनी ने इन सभी पदों को स्थगित करने का फैसला लिया है। विश्वविद्यालय के प्रवक्ता मुकुल श्रीवास्तव ने बताया कि विश्वविद्यालय के स्टैट्यूड्स में इन पदों का कोई जिक्र नहीं है। इसलिए, अब केवल विश्वविद्यालय में स्थापित संकायों के अध्यक्ष ही डीन के रूप में कार्य करेंगे।
हालांकि, इन पदों पर काम कर रहे शिक्षकों के काम करने पर कोई रोक नहीं लगाई गई है। विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद ने कुलपति को इन पदों पर नए शिक्षकों की तैनाती के लिए नामित किया है। जब तक इन पदों का नया नामकरण नहीं हो जाता और नए लोगों को इसकी जिम्मेदारी नहीं सौंपी जाती, तब तक वर्तमान में काम कर रहे शिक्षक ही इन जिम्मेदारियों को संभालेंगे। इन जिम्मेदारियों में एडमिशन से लेकर रिसर्च, अकैडमिक्स, रिक्रूटमेंट और अन्य सेल का काम शामिल है।
विश्वविद्यालय के प्रवक्ता मुकुल श्रीवास्तव ने स्पष्ट किया कि जल्द ही वीसी की ओर से इन पदों पर समन्वयक या जो भी नया पदनाम तय होगा, उसके साथ जिम्मेदारी दी जाएगी। तब तक, वर्तमान व्यवस्था के तहत ही काम चलता रहेगा। यह सुनिश्चित करेगा कि विश्वविद्यालय के प्रशासनिक और शैक्षणिक कार्य बिना किसी रुकावट के जारी रहें। यह कदम विश्वविद्यालय में नियमों के पालन और प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारू बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।