Ai Will Give All Answers For Panchayat Elections And Family Planning
AI देगा सारे जवाब
नवभारत टाइम्स•
श्रीमान क अपने बेटे के पंचायत चुनाव को लेकर परेशान हैं। जनता की मांग है कि कम से कम तीन बच्चे हों। दो बच्चे होने पर ताने सुनने पड़ते हैं। ज्यादा होने पर चुनाव लड़ने में दिक्कत आती है। इस उलझन का हल निकालने के लिए श्रीमान क एआई की मदद लेने की सोच रहे हैं।
सुबह-सुबह एक सज्जन, श्रीमान क, बेहद परेशान दिखे। उन्होंने बताया कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि क्या करें, क्योंकि एक तरफ़ से कोई कुछ करने को कहता है तो दूसरी तरफ़ से कोई और। उनकी यह उलझन बच्चों की चिंता से जुड़ी थी, खासकर उनके बेटे के चुनाव लड़ने को लेकर। श्रीमान क ने बताया कि उनके बेटे के दो बच्चे हैं, लेकिन जनता की मांग है कि वह कम से कम तीन बच्चे पैदा करे, नहीं तो चुनाव नहीं लड़ पाएगा। वहीं, अगर बच्चे तीन से ज़्यादा हो गए तो भी समस्या है। इस अजीब सी दुविधा का हल निकालने के लिए उन्होंने AI का सहारा लेने की बात कही।
श्रीमान क ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा, "कुछ समझ में नहीं आ रहा। एक कहता है यह करो, दूसरा कहता है वह करो। इंसान करे तो क्या?" उनकी यह बात सुनकर ऐसा लग रहा था मानो वह पाकिस्तानी गोलंदाज उस्मान तारिक की तरह पॉज मुद्रा में हों। उन्होंने आगे कहा, "अपना तो कुछ नहीं भाई साब, बच्चों की बड़ी फिक्र हो रही है।" उनकी आँखों में खीझ और लाचारी साफ झलक रही थी।जब उनसे माजरा पूछा गया तो उन्होंने बताया कि उनके दो बच्चे हैं। यह सुनकर लगा कि शायद मामला कुछ और है, क्योंकि आजकल कौन सी बात अंदरूनी है और कौन सी बाहरी, यह कहना मुश्किल है। श्रीमान क ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा, "भाई साब, मैं तो पंचायत चुनाव लड़ सकता हूं। पिछली बार दावत उड़ाने वालों ने दगा न दिया होता तो जीत भी जाता।"
उनकी बात सुनकर लगा कि वह फिर से चुनाव लड़ने की सोच रहे हैं। मैंने उन्हें प्रोत्साहित करते हुए कहा कि चुनाव लड़ना एक अच्छा निवेश है, जिसके फायदे मापने वाला कोई कैलकुलेटर ही नहीं बना है। यह सुनकर ऐसा लगा जैसे मैं चौका मारने के बाद शाहीन शाह अफरीदी की तरह आत्मविश्वास से भरा चेहरा बना रहा था।
लेकिन श्रीमान क की असली समस्या कुछ और ही थी। उन्होंने बताया, "भाई साब, बेटे के दो बच्चे हैं। चुनाव उसे लड़ना है। पर पब्लिक कह रही है कि कम से कम 3 बच्चे पैदा करो। कोई-कोई तो 4 का नारा भी लगा देता है। 2 से ज्यादा हो जाएं तो चुनाव नहीं लड़ पाएगा। कम रह जाएं, तो पब्लिक ताना मारेगी। करें तो क्या करें?"
इस अनोखी समस्या का समाधान ढूंढने के लिए मैंने उन्हें AI का सुझाव दिया। मैंने कहा, "AI का मेला लगा है। चले जाइए। एक क्या, 10 सवाल पूछिए, जवाब तुरंत मिलेगा।" यह सुनकर लगा जैसे मैं कोई बहुत बड़ा गुरु घंटाल बनकर सलाह दे रहा हूँ। यह स्थिति वाकई हास्यास्पद थी, जहाँ चुनाव लड़ने के लिए बच्चों की संख्या को लेकर जनता की अजीबोगरीब मांगें सामने आ रही थीं।