Marie Curie The Amazing Story Of Two Sisters Sacrifice And Trust
मंज़िल की नई राह
नवभारत टाइम्स•
19वीं सदी में पोलैंड में रूसी शासन के दौरान दो बहनों ने शिक्षा के लिए बड़ा त्याग किया। मारिया ने अपनी बहन ब्रोन्या की पढ़ाई का खर्च उठाया। ब्रोन्या डॉक्टर बनीं और मारिया को पेरिस बुलाया। मारिया ने सोरबोन विश्वविद्यालय से पढ़ाई की और मैरी क्यूरी के नाम से जानी गईं। उन्होंने भौतिकी और रसायन विज्ञान में नोबेल पुरस्कार जीते।
19वीं सदी के उत्तरार्ध में, जब पोलैंड रूसी शासन के अधीन था और महिलाओं के लिए उच्च शिक्षा पाना लगभग नामुमकिन था, तब मारिया क्यूरी और उनकी बहन ब्रोन्या ने हार नहीं मानी। सिर्फ 17-18 साल की उम्र में मारिया ने अपनी बहन ब्रोन्या से कहा, 'तुम पेरिस जाकर मेडिसिन की पढ़ाई करो। मैं यहां नौकरी करके तुम्हारी पढ़ाई का सारा खर्चा भेजूंगी। जब तुम डॉक्टर बन जाओगी, तब मुझे बुला लेना।' यह दोनों बहनों के बीच प्यार, त्याग और एक-दूसरे पर भरोसे का एक शानदार उदाहरण था। ब्रोन्या पेरिस चली गईं और मारिया ने एक अनजान शहर में एक अमीर परिवार के बच्चों को पढ़ाने का काम शुरू किया।
मारिया ने छह साल तक बहुत मेहनत की। इस दौरान उन्होंने अपने वैज्ञानिक बनने के सपने को जिंदा रखा। वह रात में खुद पढ़ाई करती थीं। जब ब्रोन्या डॉक्टर बन गईं, तो उन्होंने मारिया को पेरिस बुलाया। मारिया ने पेरिस की Sorbonne University में दाखिला लिया और भौतिकी (Physics) में कमाल कर दिखाया। यही मारिया आगे चलकर दुनिया की महान वैज्ञानिक मैरी क्यूरी बनीं। वह अकेली ऐसी महिला हैं जिन्होंने भौतिकी (Physics) और रसायन विज्ञान (Chemistry) दोनों में नोबेल पुरस्कार जीते। इन दोनों बहनों ने त्याग, धैर्य और एक-दूसरे के सहयोग से मुश्किलों भरे रास्ते पर अपनी मंजिल पा ली।यह कहानी हमें सिखाती है कि अगर सपने बड़े हों और उन्हें पूरा करने का जज्बा हो, तो कोई भी मुश्किल रास्ता आसान हो सकता है। मारिया और ब्रोन्या ने यह साबित कर दिखाया कि महिलाएं भी किसी से कम नहीं हैं। उन्होंने उस समय की सामाजिक बंदिशों को तोड़कर अपनी राह बनाई। उनकी कहानी आज भी लाखों लड़कियों को प्रेरित करती है कि वे अपने सपनों का पीछा करें और हार न मानें। यह दो बहनों की कहानी है जिन्होंने एक-दूसरे का सहारा बनकर इतिहास रचा।