Umesh Saxenas Power Of Transparency Exhibition A Confluence Of 50 Years Of Dedication And Social Realism
कैनवस पर दिखी 50 साल की साधना और पारदर्शिता
नवभारत टाइम्स•
अलीगंज की कला स्रोत आर्ट गैलरी में वरिष्ठ कलाकार उमेश सक्सेना की एकल चित्र प्रदर्शनी 'पावर ऑफ ट्रांसपेरेंसी' का उद्घाटन हुआ। इस प्रदर्शनी में उनके 45 चित्र प्रदर्शित हैं। कलाकार ने 50 साल की अपनी चित्रकला यात्रा को दर्शाया है। उनकी कला में पारदर्शिता और मानवीय भावनाओं का समन्वय दिखता है।
लखनऊ के अलीगंज स्थित कला स्रोत आर्ट गैलरी में वरिष्ठ कलाकार उमेश सक्सेना की एकल चित्र प्रदर्शनी 'पावर ऑफ ट्रांसपेरेंसी' का शानदार उद्घाटन हुआ। इस प्रदर्शनी में उमेश सक्सेना के 45 चित्र प्रदर्शित किए गए हैं, जो प्रशासनिक पारदर्शिता के विचार से प्रेरित हैं। मुख्य अतिथि इतिहासकार डॉ. रवि भट्ट ने कलाकार की कला को नई परिभाषा देने वाला बताया, जिसमें संस्कृति, पहचान और मानवीय भावनाओं का गहरा मेल दिखता है। उमेश सक्सेना ने बताया कि वे 50 सालों से लगातार चित्र बना रहे हैं और यह उनकी जीवन भर की यात्रा है।
प्रदर्शनी का मुख्य आकर्षण उमेश सक्सेना की 'पारदर्शी कला' है। उन्होंने सीमित रंगों और आकारों का इस्तेमाल करके ऐसे चित्र बनाए हैं जिनमें एक आकृति के पीछे दूसरी आकृति साफ दिखाई देती है। एक चित्र में कई परतों का स्पष्ट दिखना ही उनकी इस खास कला की पहचान है। यह विचार उन्हें 2011 में प्रशासनिक पारदर्शिता पर चल रही चर्चाओं से मिला, जिसे उन्होंने अपनी कला में उतारा।कुछ खास कृतियां प्रसिद्ध महाकाव्य 'शाकुंतलम्' से भी प्रेरित हैं। जैसे 'शाकुंतलम्' में मछली का खास महत्व है, वैसे ही इन चित्रों में मछलियों को खास तौर पर उकेरा गया है। मछली की निरंतर गति को दर्शाते हुए, हर मछली के पीछे दूसरी मछली स्पष्ट दिखती है, जो जीवन के प्रवाह और निरंतरता का प्रतीक है।
उमेश सक्सेना सिर्फ कैनवास पर ही नहीं, बल्कि वस्तुओं पर भी चित्रकारी करते हैं। प्रदर्शनी में उन्होंने कई ऐसे छाते भी लगाए हैं जिन पर उनकी कलाकृतियां बनी हुई हैं। यह उनकी कला की विविधता को दर्शाता है।
प्रदर्शनी में सामाजिक यथार्थ को भी दर्शाया गया है। कुछ चित्रों में गरीबी का मार्मिक चित्रण किया गया है। इसमें एक महिला की लाचारी और अधिक बच्चों की जिम्मेदारी को दिखाया गया है, जो उसे अभाव और संघर्ष के दलदल में फंसा देती है। यह चित्र दर्शकों को सोचने पर मजबूर करते हैं।
कलाकार उमेश सक्सेना ने कहा, "मैं लगातार 50 साल से चित्र बना रहा हूं। कोई दिन ऐसा नहीं होता जब मैं चित्र न बनाऊं, यह मेरी जीवन पर्यन्त चलने वाली यात्रा है।"
मुख्य अतिथि डॉ. रवि भट्ट ने उमेश सक्सेना की कला की सराहना करते हुए कहा, "उमेश सक्सेना उन कलाकारों में हैं जो कला को नई परिभाषा देते हैं। उनकी कृतियों में संस्कृति, पहचान और मानवीय भावनाओं का सशक्त समन्वय दिखाई देता है। बनावट, रूपांकन और प्रतीकों का अनूठा प्रयोग उनकी कला को नई दिशा देता है और समकालीन भारतीय कला जगत में उन्हें विशिष्ट स्थान प्रदान करता है।"
यह प्रदर्शनी कला प्रेमियों के लिए एक अनूठा अनुभव है, जहाँ वे उमेश सक्सेना की पारदर्शी कला, प्रेरणादायक कृतियों और सामाजिक सरोकारों को गहराई से महसूस कर सकते हैं।