12 कंपनियों के 16 में से पांच सैंपल फेल, 4 प्लांट के लाइसेंस रद्द

नवभारत टाइम्स

हापुड़ में बोतलबंद पानी की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठे हैं। जांच में 12 कंपनियों के 16 में से पांच सैंपल फेल पाए गए। इनमें स्वास्थ्य के लिए खतरनाक ई कोलाई बैक्टीरिया मिला है। विभाग ने चार प्लांट के लाइसेंस रद्द कर दिए हैं। इन पानी की बोतलों की सप्लाई हापुड़, एनसीआर और अन्य राज्यों में होती थी।

questions on bottled water quality in hapur 5 samples fail licenses of 4 plants cancelled scare due to e coli bacteria found
हापुड़ में बोतलबंद पानी की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठे हैं। खाद्य सुरक्षा व औषधि प्रशासन ने 12 पानी के प्लांट से 16 सैंपल लिए, जिनमें से पांच में ई. कोलाई बैक्टीरिया पाया गया, जो सेहत के लिए बेहद खतरनाक है। इस खुलासे के बाद चार प्लांट के लाइसेंस रद्द कर दिए गए हैं और एक के लिए केंद्र सरकार को रिपोर्ट भेजी गई है। इन दूषित पानी की बोतलों की सप्लाई हापुड़, एनसीआर के जिलों और कई अन्य राज्यों में भी होती थी। विभाग अब इन बोतलों को इकट्ठा कर नष्ट कर रहा है और प्लांट संचालकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इस घटना के बाद गाजियाबाद का स्वास्थ्य विभाग भी अलर्ट हो गया है और वहां भी पानी के सैंपल लिए जा रहे हैं।

हापुड़ में बोतलबंद पानी की गुणवत्ता को लेकर चिंताजनक खुलासा हुआ है। खाद्य सुरक्षा व औषधि प्रशासन ने जिले के 12 बोतलबंद पानी बनाने वाले प्लांटों से कुल 16 सैंपल लिए थे। जांच में पांच सैंपल मानकों के अनुसार नहीं पाए गए। इन सैंपल में ई. कोलाई नामक खतरनाक बैक्टीरिया मिला है, जो लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। इस गंभीर लापरवाही के चलते विभाग ने चार प्लांटों के लाइसेंस तुरंत रद्द कर दिए हैं। वहीं, एक प्लांट का लाइसेंस केंद्र सरकार द्वारा जारी किया गया था, इसलिए उसके लाइसेंस को रद्द करने के लिए केंद्र सरकार को रिपोर्ट भेजी गई है।
यह दूषित पानी सिर्फ हापुड़ में ही नहीं, बल्कि एनसीआर के कई जिलों और हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, उत्तराखंड जैसे अन्य राज्यों में भी सप्लाई किया जा रहा था। विभाग अब इन दूषित पानी की बोतलों को बाजार से इकट्ठा कर नष्ट करने की कार्रवाई कर रहा है। साथ ही, इन प्लांटों के संचालकों के खिलाफ केस दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई मौतों के बाद धौलाना तहसील क्षेत्र में पानी की जांच की गई थी। इसी कड़ी में 18 सदस्यीय टीमों ने 9 और 10 जनवरी को 12 पैक्ड पानी कंपनियों के प्लांटों की जांच की और 16 नमूने जांच के लिए भेजे थे। खाद्य सुरक्षा व औषधि प्रशासन आयुक्त द्वितीय सुनील सिंह ने बताया कि जांच में पैक्ड ड्रिंकिंग वॉटर कंपनी ऐलिन, सिग्नेचर, विरगो और टॉनिक के पांच नमूने अधोमानक (मानक के अनुसार नहीं) पाए गए। इनमें ऐलिन कंपनी के दो नमूने शामिल थे। उन्होंने कहा, "इन कंपनियों के लाइसेंस रद्द कर दिए गए हैं। एक कंपनी का लाइसेंस केंद्र सरकार द्वारा जारी किया गया था, इसलिए उसके निरस्तीकरण की संस्तुति केंद्र को भेजी गई है।"

सुनील सिंह ने आगे बताया कि इन बोतलबंद पानी के नमूनों में हानिकारक ई-कोलाई नाम का बैक्टीरिया मौजूद था। यह भी पता चला है कि इन फैक्टरियों से पानी की आपूर्ति केवल स्थानीय स्तर पर ही नहीं बल्कि एनसीआर के कई जिलों व दूसरे राज्यों हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, उत्तराखंड सहित अन्य राज्यों में भी होती थी। अब इन बोतल बंद पानी पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है।

इस घटना के बाद गाजियाबाद का स्वास्थ्य विभाग भी सतर्क हो गया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. अखिलेश मोहन ने बताया कि जिले में भी पानी के नमूने लेने के निर्देश दिए गए हैं। जनपद में करीब 30 लाइसेंसी प्लांट हैं, जिनसे लाखों लीटर पानी प्रतिदिन सप्लाई होता है। सबसे ज्यादा राजनगर एक्सटेंशन, इंदिरापुरम, वैशाली, वसुंधरा और कौशांबी जैसे इलाकों में ऐसे पानी की सप्लाई होती है। विभाग ने खाद्य सुरक्षा विभाग को जिले में भी पानी के सैंपल लेने के लिए कहा है ताकि किसी भी तरह की अनहोनी को रोका जा सके। ई. कोलाई एक ऐसा बैक्टीरिया है जो मानव मल में पाया जाता है और अगर यह पानी में मिल जाए तो यह गंभीर पेट की बीमारियों, दस्त और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।