Scientific Survey Of Groundwater Purity In 40 Km Radius Along Yamuna Begins Faridabad To Get Better Drinking Water Supply
यमुना किनारे 40 किमी के दायरे में भूजल की शुद्धता पर होगा वैज्ञानिक सर्वे
नवभारत टाइम्स•
फरीदाबाद में पेयजल की गुणवत्ता जांचने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है। यमुना के 40 किलोमीटर के दायरे में भूजल की शुद्धता का वैज्ञानिक सर्वे शुरू हुआ है। इससे पानी की असलियत पता चलेगी और भविष्य की जल आपूर्ति की संभावनाओं को भी देखा जाएगा।
फरीदाबाद: फरीदाबाद के लोगों को पीने के साफ पानी की सप्लाई और भविष्य में पानी की कमी से निपटने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। फरीदाबाद मैट्रोपॉलिटन डिवेलेपमेंट अथॉरिटी (FMDA) और सेंट्रल ग्राउंड वॉटर बोर्ड (CGWB) ने मिलकर यमुना नदी के 40 किलोमीटर के दायरे में भूजल की गुणवत्ता की जांच शुरू कर दी है। इस सर्वे का मकसद हर जगह से वैज्ञानिक आंकड़े जुटाना है, ताकि शहर को मिलने वाले पानी की असलियत पता चल सके और यह भी पता लगाया जा सके कि भविष्य में भूजल से कितना पानी निकाला जा सकता है।
फरीदाबाद की आबादी 30 लाख से ज्यादा हो चुकी है और शहर की पानी की जरूरतें यमुना से पूरी होती हैं। फिलहाल, शहर को हर दिन 430 एमएलडी पानी की जरूरत है, लेकिन FMDA केवल 330 एमएलडी पानी ही सप्लाई कर पा रहा है। इसमें से 200 एमएलडी पानी यमुना किनारे लगे 22 पुराने रेनीवेल से आता है, जो 15 साल से भी ज्यादा पुराने हैं। चिंता की बात यह है कि यमुना का जलस्तर हर साल एक इंच नीचे जा रहा है और पानी की गुणवत्ता का भी कोई सटीक डेटा प्रशासन के पास नहीं है। इस सर्वे से यह पता चलेगा कि यमुना के किनारे के भूजल में कौन-कौन से तत्व मौजूद हैं।यह सर्वे इसलिए भी जरूरी है क्योंकि यमुना में गिरने वाले गंदे सीवेज और औद्योगिक कचरे की वजह से नदी के पानी की गुणवत्ता लगातार गिर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि नदी का यह गंदा पानी धीरे-धीरे आसपास के भूजल को भी खराब कर सकता है। हाल की ऑडिट रिपोर्टों में भी यह बात सामने आई है कि फरीदाबाद जैसे शहरों में सीवेज ट्रीटमेंट और कचरा प्रबंधन की हालत ठीक नहीं है, जिससे पानी के स्रोत दूषित होने का खतरा बना रहता है।
फरीदाबाद एक औद्योगिक शहर है और यहां की जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में लोगों को साफ पीने का पानी उपलब्ध कराना एक बड़ी चुनौती है। पानी की गुणवत्ता की यह जांच प्रशासनिक सुधारों की दिशा में एक अच्छा कदम है। FMDA के अधिकारियों का कहना है कि इस सर्वे से मिले आंकड़ों के आधार पर भविष्य की पानी से जुड़ी परियोजनाओं की योजना बनाई जाएगी। अगर किसी इलाके में पानी में टीडीएस (Total Dissolved Solids) या कोई और हानिकारक तत्व ज्यादा पाया जाता है, तो वहां पानी को साफ करने के लिए खास प्लांट लगाने पर विचार किया जाएगा।
इस सर्वे से भूजल की गहराई और उसमें मौजूद खनिजों की जानकारी भी मिलेगी। यह जानकारी भविष्य में पानी की सप्लाई की योजना बनाने में बहुत मददगार साबित होगी। FMDA और CGWB मिलकर इस सर्वे को अंजाम दे रहे हैं। यह सर्वे भूजल के स्तर को बनाए रखने और पानी की बर्बादी को रोकने के उपायों पर भी ध्यान केंद्रित करेगा।
यह सर्वे फरीदाबाद के लोगों के लिए एक राहत की खबर है। इससे न केवल पीने के पानी की गुणवत्ता सुनिश्चित होगी, बल्कि भविष्य में पानी की किल्लत से निपटने के लिए भी ठोस कदम उठाए जा सकेंगे। भूजल की जांच से यह भी पता चलेगा कि क्या भूजल का अत्यधिक दोहन हो रहा है और अगर ऐसा है तो इसे कैसे रोका जाए। यह एक दूरगामी कदम है जो शहर के भविष्य के लिए पानी की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।
इस सर्वे के नतीजे आने के बाद, FMDA पानी की सप्लाई को बेहतर बनाने के लिए नई तकनीकें अपनाने पर भी विचार कर सकता है। जैसे कि, अगर भूजल में कोई खास तत्व ज्यादा है, तो उसे निकालने के लिए विशेष फिल्टरेशन सिस्टम लगाए जा सकते हैं। यह सर्वे फरीदाबाद को एक स्थायी जल प्रबंधन प्रणाली की ओर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह सुनिश्चित करेगा कि आने वाली पीढ़ियों को भी साफ और सुरक्षित पेयजल मिलता रहे।