मेंटल हेल्थ संगम में दिखी युवाओं की रचनात्मकता

नवभारत टाइम्स

गुड़गांव यूनिवर्सिटी में चार दिवसीय मेंटल हेल्थ कॉन्फ्लुएंस का तीसरा दिन वेल बीइंग फेयर के नाम रहा। यहाँ मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य से जुड़े 21 स्टॉल लगे। विद्यार्थियों ने नुक्कड़ नाटक से अवसाद और चिंता जैसे मुद्दों पर संदेश दिया। रील और शॉर्ट फिल्म प्रतियोगिता में भी युवाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

mental health confluence a confluence of youth creativity and awareness
गुड़गांव यूनिवर्सिटी के मनोविज्ञान विभाग ने चार दिवसीय अंतरराष्ट्रीय मेंटल हेल्थ कॉन्फ्लुएंस का आयोजन किया, जिसके तीसरे दिन वेल बीइंग फेयर ने खूब सुर्खियां बटोरीं। इस फेयर में मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य से जुड़े 21 स्टॉल्स लगाए गए, जहाँ लोगों को परामर्श, तनाव प्रबंधन , योग, माइंडफुलनेस और स्वस्थ जीवनशैली के बारे में जानकारी दी गई। मनो सुकून क्लिनिक के विशेषज्ञों ने मुफ्त परामर्श देकर विद्यार्थियों और स्थानीय लोगों की मदद की। कुलपति डॉ. संजय कौशिक ने कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए कहा कि आज के डिजिटल युग में मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना बहुत ज़रूरी है। इस दौरान छात्रों ने नुक्कड़ नाटक के ज़रिए अवसाद, चिंता और सामाजिक दबाव जैसे मुद्दों पर अपनी बात रखी। सम्मेलन की संयोजिका डॉ. गायत्री रैना ने बताया कि तीसरे दिन रील और शॉर्ट फिल्म प्रतियोगिता भी हुई, जिसमें करीब 120 विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। यह चार दिवसीय सम्मेलन मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने और युवाओं को संवेदनशील बनाने के उद्देश्य से आयोजित किया गया है, जिसमें विशेषज्ञ व्याख्यान, कार्यशालाएं और संवाद सत्र शामिल हैं।

इस खास वेल बीइंग फेयर में लोगों को मानसिक और शारीरिक सेहत का ख्याल रखने के तरीके बताए गए। 21 स्टॉल्स पर विशेषज्ञों ने समझाया कि कैसे तनाव को कम किया जाए, अपनी भावनाओं को कैसे संतुलित रखा जाए और योग व माइंडफुलनेस जैसी तकनीकों से कैसे मन को शांत रखा जाए। स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के टिप्स भी दिए गए। मनो सुकून क्लिनिक ने तो आगंतुकों को सीधे विशेषज्ञों से मुफ्त सलाह लेने का मौका दिया, जिसका विद्यार्थियों और शहर के लोगों ने खूब फायदा उठाया।
कुलपति डॉ. संजय कौशिक ने कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए कहा कि आज की भागदौड़ भरी और डिजिटल दुनिया में, अपने मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना बहुत ज़रूरी है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि हमें अपनी मानसिक सेहत को भी उतना ही महत्व देना चाहिए जितना हम अपनी शारीरिक सेहत को देते हैं।

सम्मेलन के दौरान, विद्यार्थियों ने नुक्कड़ नाटक के ज़रिए समाज में फैली मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को उजागर किया। उन्होंने अवसाद, चिंता और सामाजिक दबाव जैसे गंभीर मुद्दों पर ऐसे संदेश दिए कि लोग सोचने पर मजबूर हो गए। यह एक बहुत ही प्रभावी तरीका था लोगों को इन मुद्दों के प्रति जागरूक करने का।

सम्मेलन की संयोजिका डॉ. गायत्री रैना ने बताया कि तीसरे दिन की एक और खास बात थी रील और शॉर्ट फिल्म प्रतियोगिता। इसमें दादा लख्मी चंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ़ परफार्मिंग एंड विजुअल आर्ट्स समेत लगभग 120 विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मकता दिखाई। इस प्रतियोगिता के ज़रिए युवाओं ने अपनी बात कहने का एक नया तरीका खोजा।

यह चार दिवसीय अंतरराष्ट्रीय मेंटल हेल्थ कॉन्फ्लुएंस सिर्फ एक आयोजन नहीं था, बल्कि यह मानसिक स्वास्थ्य के प्रति एक बड़ा कदम था। इसमें विशेषज्ञों ने अपने ज्ञान और अनुभव साझा किए, कार्यशालाओं में लोगों को नई चीजें सिखाई गईं और संवाद सत्रों में खुलकर बातचीत हुई। इन सब का एक ही मकसद था - लोगों को मानसिक स्वास्थ्य के बारे में जागरूक करना और खासकर युवाओं को इस विषय के प्रति संवेदनशील बनाना ताकि वे अपनी सेहत का बेहतर ख्याल रख सकें।