Government Industry And Trade Union Meeting Detailed Discussion On 4 Labour Codes
सरकार, इंडस्ट्री और ट्रेड यूनियन बैठेंगे साथ
नवभारत टाइम्स•
सरकार जल्द ही मजदूर संघों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श करने की तैयारी में है। यह इंडियन लेबर कॉन्फ्रेंस के तहत होगा, जिसका आयोजन 2015 के बाद से नहीं हुआ है। लेबर कोड और वेतन आयोग सहित सभी मुद्दों पर चर्चा होगी। वर्कर्स और इंडस्ट्री के प्रतिनिधि भी इसमें शामिल होंगे। यह बैठक महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
नई दिल्ली: देश के 29 श्रम कानूनों को बदलकर लाए गए 4 नए लेबर कोड को लागू करने के बाद, श्रम एवं रोजगार मंत्रालय अब मजदूर संघों के साथ एक बड़ी बैठक करने की तैयारी में है। यह बैठक इंडियन लेबर कॉन्फ्रेंस (ILC) के तहत होगी, जो 2015 से नहीं हुई है। इस बैठक में लेबर कोड, वेतन आयोग और मजदूरों से जुड़े अन्य मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। सरकार ने लेबर कोड के ड्राफ्ट रूल्स पर जनता की राय जानने के लिए 45 दिनों का समय दिया है।
श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने जल्द से जल्द ILC का आयोजन करने के निर्देश दिए हैं। मंत्रालय संबंधित पक्षों से संपर्क कर रहा है ताकि वर्कर्स और इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों के साथ मिलकर बातचीत की जा सके। इस बैठक में लेबर कोड और वेतन आयोग जैसे सभी अहम मुद्दों पर गहराई से चर्चा होगी। सरकार ने लेबर कोड के ड्राफ्ट रूल्स को 30 दिसंबर को सार्वजनिक किया था और इस पर लोगों की प्रतिक्रिया जानने के लिए 45 दिनों का वक्त दिया है।हिंद मजदूर सभा के महासचिव हरभजन सिंह सिद्धू ने इस मामले पर चिंता जताते हुए कहा, "भारत इंटरनैशनल लेबर ऑर्गनाइजेशन का संस्थापक सदस्य है, लेकिन हाल यह है कि 2015 से ILC की बैठक नहीं बुलाई गई है। श्रम संघों से बात किए बिना 4 लेबर कोड लागू करने का ऐलान कर दिया गया।" उन्होंने यह भी बताया कि सरकार ने लेबर कोड के ड्राफ्ट रूल्स को 30 दिसंबर को प्री-पब्लिश किया था और इस पर लोगों की राय जानने के लिए 45 दिनों का समय तय किया है।
RSS से जुड़े भारतीय मजदूर संघ (BMS) ने भी इसी महीने मंत्री मनसुख मांडविया से मिलकर ILC की बैठक जल्द बुलाने की मांग की थी। ILC एक राष्ट्रीय स्तर का मंच है जहाँ सरकार, ट्रेड यूनियनों और इंडस्ट्री के प्रतिनिधि एक साथ आते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य मजदूरों और इंडस्ट्री से जुड़ी समस्याओं पर मिलकर समाधान खोजना है। ILC का पिछला सम्मेलन जुलाई 2015 में हुआ था, यानी करीब 6 साल पहले।
यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब 10 सेंट्रल ट्रेड यूनियनों ने लेबर कोड के विरोध में 12 फरवरी को देशव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है। इस हड़ताल को संयुक्त किसान मोर्चा और जॉइंट फ्रंट ऑफ एग्रीकल्चरल वर्कर्स जैसे संगठनों का भी समर्थन मिला है। यह दिखाता है कि लेबर कोड को लेकर मजदूरों और किसानों में काफी नाराजगी है।
लेबर कोड देश के 29 पुराने श्रम कानूनों की जगह लेंगे। सरकार का कहना है कि ये नए कानून मजदूरों के हितों की रक्षा करेंगे और काम करने की स्थिति को बेहतर बनाएंगे। लेकिन ट्रेड यूनियनों का आरोप है कि इन नए कानूनों से मजदूरों के अधिकार कम हो जाएंगे और उनकी मोलभाव करने की शक्ति कमजोर होगी। इसीलिए वे सरकार से इन कानूनों को लागू करने से पहले उनसे बातचीत करने की मांग कर रहे हैं। ILC की बैठक इसी बातचीत का एक अहम जरिया बनेगी।