आयुष्मान कार्ड की मांग को लेकर किया प्रदर्शन

नवभारत टाइम्स

साहिबाबाद के कड़कड़ मॉडल इलाके में लोगों ने आयुष्मान कार्ड बनवाने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि केवल छह सदस्यों वाले परिवारों के ही कार्ड बन रहे हैं। छोटे परिवारों के जरूरतमंद लोग इस सुविधा से वंचित हैं। गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों को इलाज में परेशानी हो रही है।

protest in sahibabad demanding ayushman card allegation of depriving needy of facilities
साहिबाबाद के कड़कड़ मॉडल इलाके में लोगों ने आयुष्मान कार्ड बनवाने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि सरकार की योजना के तहत सिर्फ छह सदस्यों वाले परिवारों के ही कार्ड बन रहे हैं, जबकि तीन, चार या पांच सदस्यों वाले कई जरूरतमंद लोग इस सुविधा से वंचित रह जा रहे हैं। लोगों ने कार्ड बनाने में हो रही लापरवाही पर भी चिंता जताई। गंभीर बीमारियों से जूझ रहे कई परिवार आयुष्मान कार्ड न होने के कारण इलाज का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं, जिससे उनकी आर्थिक मुश्किलें बढ़ रही हैं। प्रदर्शन में अरुण तोमर, हरिश्चंद्र, संजय पांडे, राजकुमार, मनोज कुमार, संदीप कुमार झा, दीपांशु, गंगाराम, अशोक कुमार, राहुल कुमार और ललित भारती समेत कई लोग शामिल थे।

लोगों का गुस्सा इस बात पर था कि आयुष्मान कार्ड बनाने की प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही बरती जा रही है। कई परिवार ऐसी बीमारियों से पीड़ित हैं जिनका इलाज बहुत महंगा होता है। ऐसे में, आयुष्मान कार्ड न होने के कारण उन्हें इलाज के लिए भारी रकम चुकानी पड़ रही है। यह आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए एक बड़ी समस्या बन गई है। उनकी परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं क्योंकि वे इलाज का खर्च उठाने में असमर्थ हैं।
प्रदर्शनकारियों ने साफ तौर पर कहा कि सरकार की योजना का लाभ सभी जरूरतमंदों तक पहुंचना चाहिए। सिर्फ छह सदस्यों वाले परिवारों को ही प्राथमिकता देना गलत है। तीन, चार या पांच सदस्यों वाले छोटे परिवार भी जरूरतमंद हो सकते हैं और उन्हें भी इस स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की कि कार्ड बनाने की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया जाए ताकि किसी भी जरूरतमंद को परेशानी न हो। इस प्रदर्शन में अरुण तोमर, हरिश्चंद्र, संजय पांडे, राजकुमार, मनोज कुमार, संदीप कुमार झा, दीपांशु, गंगाराम, अशोक कुमार, राहुल कुमार और ललित भारती जैसे कई लोग शामिल थे, जो अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाना चाहते थे।