इन्फ्लुएंसर बनकर बांटते थे फर्ज़ी वेबसाइट की टी-शर्ट

नवभारत टाइम्स

आगरा साइबर पुलिस ने क्रिप्टो करेंसी में निवेश के नाम पर 100 करोड़ रुपये की ठगी करने वाले गिरोह के दो मुख्य सदस्यों को गिरफ्तार किया है। गिरोह का मास्टरमाइंड विनय सहित चार आरोपी अभी भी फरार हैं। इन ठगों ने फर्जी वेबसाइट के जरिए लोगों को भारी मुनाफे का लालच दिया।

crypto scam 250 crore fraud by distributing fake website t shirts as influencers mastermind arrested
नोएडा: आगरा साइबर पुलिस ने क्रिप्टो करेंसी में भारी मुनाफे का लालच देकर 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी करने वाले गिरोह के दो मुख्य सदस्यों को गिरफ्तार किया है। गिरोह का सरगना विनय, जो लखनऊ का रहने वाला है, उसे जेपी ग्रीन्स, बीटा-2 से पकड़ा गया। वहीं, विनोद, जो बागपत का निवासी है, उसे ग्रेनो वेस्ट से गिरफ्तार किया गया। यह गिरोह फर्जी वेबसाइट बनाकर लोगों को ठगता था और बड़े होटलों में सेमिनार आयोजित कर ATS कॉइन बीज वेबसाइट की टी-शर्ट बांटता और बेचता था। चार अन्य साथी इन्फ्लुएंसर बनकर प्रचार करते थे और रिकवरी एजेंट के तौर पर लोगों से कैश लेकर क्रिप्टो में निवेश करवाते थे। आगरा में ही करीब 1500 लोगों से ठगी हुई है, जबकि यूपी, हरियाणा, हिमाचल और उत्तराखंड में हजारों लोग इनके जाल में फंसे हैं। पुलिस इन चारों फरार आरोपियों की तलाश में नोएडा, गाजियाबाद और दिल्ली-एनसीआर में छापेमारी कर रही है।

आगरा कमिश्नरेट के एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि ठगों ने वेबसाइट शुरू करने के बाद दिल्ली-एनसीआर में सेमिनार आयोजित करना शुरू किया था। इन सेमिनारों में लोगों को भारी मुनाफे का लालच दिया जाता था। इस प्रचार के लिए नरेंद्र कुमार सिसौदिया, शुभम सिसौदिया, गोपाल और सचिन स्वामी को वेबसाइट का मुख्य प्रचारक बनाया गया था। इन चारों का काम नोएडा, गाजियाबाद और दिल्ली में होने वाले सेमिनारों में लोगों को बुलाना था।
ये चारों इन्फ्लुएंसर बनकर लोगों को इस नेटवर्क से जोड़ते थे। उन्होंने नोएडा, गाजियाबाद और दूसरे शहरों के बड़े होटलों में शानदार सेमिनार आयोजित किए। इन सेमिनारों में महंगी गाड़ियों, लग्जरी लाइफस्टाइल और मोटा मुनाफा कमाने के सपने दिखाकर लोगों को निवेश के लिए आकर्षित किया जाता था। सेमिनार में आने वाले लोगों को कंपनी की AST टी-शर्ट मुफ्त दी जाती थी या फिर कपड़े बेचे जाते थे। इसका मकसद यह दिखाना था कि यह एक बड़ी और भरोसेमंद कंपनी है।

जांच में यह भी पता चला है कि इस गिरोह ने मेरठ, बागपत, आगरा, अलीगढ़, नोएडा, गाजियाबाद के साथ-साथ उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में भी लोगों को ठगा है। दिल्ली-एनसीआर में भी हजारों लोग इनके शिकार हुए हैं। कुल मिलाकर, इन लोगों ने करीब 3000 लोगों से 200 से 250 करोड़ रुपये की ठगी की है।

पुलिस इन चारों फरार आरोपियों को पकड़ने के लिए जी-जान से जुटी हुई है। आगरा साइबर थाने की पुलिस का मानना है कि ये चारों नोएडा, गाजियाबाद या दिल्ली में कहीं छिपे हो सकते हैं। पुलिस इन इलाकों में लगातार छापेमारी कर रही है।

यह गिरोह लोगों को क्रिप्टो करेंसी में निवेश करने के लिए लुभाता था। वे एक फर्जी वेबसाइट का इस्तेमाल करते थे, जिस पर भारी मुनाफे का वादा किया जाता था। सेमिनार में महंगे लाइफस्टाइल का दिखावा करके लोगों को यकीन दिलाया जाता था कि यह एक बहुत अच्छी स्कीम है। इन्फ्लुएंसर बनकर प्रचार करने वाले लोग सोशल मीडिया पर भी इस स्कीम का खूब प्रचार करते थे। रिकवरी एजेंट लोगों से सीधे कैश लेते थे और उसे क्रिप्टो में निवेश करने का झांसा देते थे। इस तरह, उन्होंने बड़ी संख्या में लोगों को ठगा और करोड़ों रुपये की हेराफेरी की।