यूपी के लिए गेमचेंजरसिद्ध हुआ 'प्रगति':योगी

नवभारत टाइम्स

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि प्रगति मॉडल उत्तर प्रदेश के लिए गेमचेंजर साबित हुआ है। यह मॉडल बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की समीक्षा का मंच है। एक्सप्रेस-वे, रेलवे, मेट्रो, एयर कनेक्टिविटी जैसे प्रोजेक्ट्स समयबद्ध ढंग से आगे बढ़े हैं। प्रगति एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो योजनाओं की सीधी मॉनिटरिंग करता है।

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लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि प्रो-ऐक्टिव गवर्नेंस ऐंड टाइमली इम्प्लीमेंटेशन ( प्रगति ) सिर्फ बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की समीक्षा का मंच नहीं है, बल्कि यह नए भारत की नई कार्यसंस्कृति का एक मजबूत उदाहरण है। उन्होंने बताया कि प्रगति मॉडल उत्तर प्रदेश के लिए गेमचेंजर साबित हुआ है, जिससे राज्य आज देश के प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रोथ इंजन के रूप में उभरा है। एक्सप्रेस-वे, रेलवे, मेट्रो, एयर कनेक्टिविटी, रैपिड रेल, अंतर्देशीय जलमार्ग और रोपवे जैसे प्रोजेक्ट्स समय पर पूरे हुए हैं, जिसका श्रेय प्रगति के निरंतर समीक्षा और समस्या-समाधान मंच को जाता है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को अपने सरकारी आवास पर एक प्रेस वार्ता में 'प्रगति' की उपलब्धियों को साझा किया। प्रगति एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है। इस पर महत्वपूर्ण योजनाओं को जोड़ा जाता है और उनकी सीधी निगरानी की जाती है। उन्होंने बताया कि प्रगति मॉडल की शुरुआत साल 2003 में गुजरात में 'स्वागत' (स्टेट वाइड अटेंशन ऑन ग्रीवांसेज बाई एप्लिकेशन ऑफ टेक्नोलॉजी) के नाम से हुई थी। यही मॉडल बाद में 'प्रगति' के राष्ट्रीय स्वरूप के रूप में विकसित हुआ।
योगी ने इस बात पर जोर दिया कि प्रगति ने यह साबित कर दिया है कि जब इरादा, तकनीक और जवाबदेही एक साथ आते हैं, तो नतीजे अपने आप तय हो जाते हैं। यह डिजिटल गवर्नेंस और सहकारी संघवाद को मजबूत करता है। प्रगति एक ऐसा मंच बन गया है, जहाँ अलग-अलग मंत्रालयों और विभागों के बीच तालमेल से मुश्किल समस्याओं का समय पर समाधान निकाला जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रगति मॉडल राज्य के लिए एक गेमचेंजर साबित हुआ है। उत्तर प्रदेश आज देश के प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रोथ इंजन के रूप में उभरा है। एक्सप्रेस-वे, रेलवे, मेट्रो, एयर कनेक्टिविटी, रैपिड रेल, अंतर्देशीय जलमार्ग और रोपवे जैसे प्रोजेक्ट्स समयबद्ध ढंग से आगे बढ़े हैं। इन सभी प्रोजेक्ट्स के पीछे निरंतर समीक्षा और समस्या-समाधान का प्रभावी मंच 'प्रगति' रहा है। प्रगति एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है जिस पर प्रमुख योजनाओं को इंटीग्रेट कर सीधी मॉनिटरिंग की जाती है।

उन्होंने यह भी बताया कि प्रगति मॉडल की अवधारणा वर्ष 2003 में गुजरात में 'स्वागत' (स्टेट वाइड अटेंशन ऑन ग्रीवांसेज बाई एप्लिकेशन ऑफ टेक्नोलॉजी) के रूप में प्रारंभ हुई थी। यही मॉडल आगे चलकर ‘प्रगति’ के राष्ट्रीय स्वरूप के रूप में विकसित हुआ। प्रगति ने साबित किया कि जब इंटेंट, टेक्नॉलजी और अकाउंटेबिलिटी साथ आते हैं तो आउटकम अपने आप सुनिश्चित हो जाते हैं। डिजिटल गवर्नेंस और कोऑपरेटिव फेडरलिज्म को मजबूती देते हुए प्रगति एक ऐसा प्लेटफॉर्म बना है, जहां अंतर-मंत्रालयीय और अंतर-विभागीय समन्वय के माध्यम से जटिल समस्याओं का समयबद्ध समाधान संभव हुआ है।