बचत के तरीके में बदलाव, जोखिम उठाने को भारतीय परिवार तैयार

नवभारत टाइम्स

भारतीय परिवार अब बचत के पारंपरिक तरीकों से हटकर शेयर बाजार जैसे जोखिम भरे निवेशों की ओर बढ़ रहे हैं। बैंक जमाओं में हिस्सेदारी घटी है, जबकि शेयर और म्यूचुअल फंड में निवेश बढ़ा है। यह बदलाव दर्शाता है कि लोग अब अपनी वित्तीय संपत्तियों में विविधता ला रहे हैं।

बचत के तरीके में बदलाव, जोखिम उठाने को भारतीय परिवार तैयार
(फोटो- नवभारत टाइम्स)

NBT रिपोर्ट: भारतीय परिवारों की बचत करने के तरीके में एक बड़ा बदलाव आया है। वित्त वर्ष 2012 में लोग अपनी कुल बचत का 57.9% हिस्सा बैंक जमा (FD या बचत खाता) में रखते थे। यह वित्त वर्ष 2025 में घटकर 35.2% रह गया है। इससे पता चलता है कि अब लोग शेयर बाजार जैसे निवेश के उन विकल्पों में पैसा लगाने से नहीं हिचकिचा रहे हैं जिनमें थोड़ा जोखिम होता है।

रिजर्व बैंक (RBI) के हालिया आंकड़ों के मुताबिक, कुल घरेलू वित्तीय संपत्तियों में शेयर और इन्वेस्टमेंट फंड की हिस्सेदारी मार्च 2025 तक बढ़कर 23% हो गई है। छह साल पहले यह 15.7% थी। इकॉनमिक सर्वे में भी गौर किया गया कि बैंक डिपॉजिट में आई यह गिरावट यह नहीं दिखाती कि लोगों ने बैंकों को छोड़ दिया है। बल्कि लोगों ने पारंपरिक तरीकों को पूरी तरह बंद करने के बजाय अपनी मौजूदा बचत में शेयर बाजार को भी जोड़ लिया है।

ET के मुताबिक, शेयर बाजार में आम लोगों की सीधी हिस्सेदारी धीरे-धीरे बढ़ी है। वित्त वर्ष 2014 में यह 8% से कम थी जो सितंबर 2025 के अंत तक करीब 9.6% हो गई। वहीं, इनडायरेक्ट हिस्सेदारी (म्यूचुअल फंड के जरिए) इसी दौरान लगभग तीन गुना बढ़कर 9.2% तक पहुंच गई है।

सालाना घरेलू वित्तीय बचत में शेयर और म्यूचुअल फंड की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2012 के लगभग 2% से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 15.2% से ज्यादा हो गई है। वित्त वर्ष 2014 में आम लोगों की कुल इक्विटी होल्डिंग सिर्फ 8 लाख करोड़ रुपये थी, जो सितंबर 2025 तक बढ़कर करीब 84 लाख करोड़ रुपये हो गई है। वित्त वर्ष 2022 में बैंकों में बचत का जमा होने वाला हिस्सा गिरकर 31.95% के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया था। फिलहाल कम जोखिम वाले बॉण्ड प्रोडक्ट्स में लोग कम पैसा लगा रहे हैं।