फेडरल रिजर्व के नए बॉस होंगे केविन वॉर्श

नवभारत टाइम्स

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने केविन वॉर्श को फेडरल रिजर्व का अगला चेयरमैन बनाने का ऐलान किया है। वॉर्श मौजूदा चेयरमैन जेरोम पॉवेल की जगह लेंगे। यह नियुक्ति ट्रंप के फेड पर नियंत्रण बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। वॉर्श की नियुक्ति के लिए सीनेट की मंजूरी आवश्यक है।

kevin warsh to be the new boss of the federal reserve trumps big move
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने फेडरल रिजर्व (Fed) के पूर्व गवर्नर केविन वॉर्श को अगला चेयरमैन नियुक्त करने का ऐलान किया है। वॉर्श, मौजूदा चेयरमैन जेरोम पॉवेल की जगह लेंगे, जिनका कार्यकाल मई में खत्म हो रहा है। ट्रंप, जो पॉवेल से ब्याज दरों को तेजी से कम न करने को लेकर नाराज थे, वॉर्श की नियुक्ति से फेड पर अपना नियंत्रण बढ़ाना चाहते हैं। इस घोषणा के बाद शेयर बाजारों में भारी गिरावट आई और सोने-चांदी की कीमतों में भी बड़ी सेंध लगी। वॉर्श की नियुक्ति के लिए सीनेट की मंजूरी अभी बाकी है।

ट्रंप ने शुक्रवार को यह बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा कि केविन वॉर्श फेडरल रिजर्व के अगले चेयरमैन होंगे। वॉर्श, जेरोम पॉवेल की जगह लेंगे। पॉवेल का कार्यकाल मई में पूरा हो रहा है। ट्रंप ने ही 2017 में पॉवेल को फेड का मुखिया बनाया था। लेकिन इस साल ट्रंप पॉवेल से खुश नहीं थे। ट्रंप चाहते थे कि फेड ब्याज दरों को जल्दी से कम करे। लेकिन पॉवेल ने ऐसा नहीं किया। इसलिए ट्रंप लगातार पॉवेल पर हमला बोल रहे थे।
जानकारों का मानना है कि वॉर्श की नियुक्ति ट्रंप के लिए फेड पर अपना दबदबा बनाने का एक बड़ा कदम है। ट्रंप के बयानों से फेड की आजादी पर सवाल उठ रहे हैं। इस खबर के आते ही शेयर बाजारों में भारी गिरावट आई। जो कीमती धातुएं, जैसे सोना और चांदी, पिछले कुछ महीनों से ऊपर जा रही थीं, वे शुक्रवार को अचानक गिर गईं। सोना करीब 5% और चांदी 13% तक टूट गई।

केविन वॉर्श की नियुक्ति को सीनेट की मंजूरी मिलनी बाकी है। 55 साल के वॉर्श के लिए यह एक तरह से घर वापसी जैसा होगा। वे पहले भी 2006 से 2011 तक फेड बोर्ड के सदस्य रह चुके हैं। जब वे 35 साल की उम्र में इस पद पर आए थे, तब वे फेड के इतिहास के सबसे युवा गवर्नर थे।

वॉर्श का चुनाव ट्रंप के लिए थोड़ा चौंकाने वाला है। फेड की दुनिया में वॉर्श को 'हॉक' माना जाता है। 'हॉक' ऐसे व्यक्ति होते हैं जो महंगाई को कंट्रोल करने के लिए ब्याज दरें बढ़ाने के पक्ष में रहते हैं। यानी वे ऊंची ब्याज दरों के समर्थक होते हैं। दूसरी तरफ, ट्रंप का कहना है कि फेड की ब्याज दरें 1% के आसपास होनी चाहिए। यह मौजूदा 3.6% के स्तर से बहुत कम है। इसलिए वॉर्श की सोच ट्रंप की सोच से बिल्कुल अलग है।