‘प्रभु को सिर्फ सच्चे प्रेम और भाव से ही प्राप्त किया जा सकता है’

नवभारत टाइम्स

रामलीला मैदान में श्रीरामकथा का आयोजन हुआ। संत विजय कौशल महाराज ने भगवान राम के वनगमन प्रसंग को सुनाया। उन्होंने बताया कि राम का वनगमन धर्म और मर्यादा का प्रतीक है। निषादराज से भेंट सामाजिक समरसता का उदाहरण है। केवट प्रसंग भक्त के प्रेम को दर्शाता है। भगवान राम का जीवन अनुकरणीय है।

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कविनगर शहर के रामलीला मैदान में मंगलमय परिवार द्वारा आयोजित श्रीरामकथा में संत विजय कौशल महाराज ने भगवान राम के वनगमन प्रसंग को सुनाया। उन्होंने बताया कि राम का वनगमन धर्म, वचन और मर्यादा का प्रतीक है। निषादराज गुहा से प्रभु श्रीराम की भेंट सामाजिक समरसता और सच्ची मित्रता का उदाहरण है। महाराज ने कहा कि प्रभु को केवल सच्चे प्रेम और भाव से ही पाया जा सकता है। केवट प्रसंग भक्त के प्रेम से भगवान को बांध लेने का प्रतीक है। राम का पूरा जीवन अनुकरणीय है और उनके जीवन से प्रेरणा लेकर ही रामराज्य की स्थापना संभव है।

संत विजय कौशल महाराज ने कहा कि भगवान राम का वनगमन हमें सिखाता है कि धर्म, वचन और मर्यादा कितनी महत्वपूर्ण हैं। यह प्रसंग हमें बताता है कि हमें अपने वादों को निभाना चाहिए, चाहे परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों।
प्रभु श्रीराम की निषादराज गुहा से भेंट का प्रसंग सामाजिक समरसता और सच्ची मित्रता का एक शानदार उदाहरण है। महाराज ने समझाया कि निषादराज ने जिस तरह प्रभु का स्वागत किया, उससे यह साबित होता है कि भगवान के लिए कोई जाति, वर्ग या ऊंच-नीच का भेद नहीं है। भगवान तो बस सच्चे प्रेम और भाव को देखते हैं।

केवट प्रसंग का जिक्र करते हुए संत विजय कौशल महाराज ने कहा कि यह वह पल है जब एक भक्त अपने प्रेम से भगवान को बांध लेता है। यह दिखाता है कि भक्ति में कितनी शक्ति होती है।

अंत में, महाराज ने कहा कि भगवान राम का पूरा जीवन ही हमारे लिए एक मिसाल है। उनके जीवन से प्रेरणा लेकर ही हम एक आदर्श समाज, यानी रामराज्य की स्थापना कर सकते हैं। यह तभी संभव है जब हम उनके दिखाए रास्ते पर चलें और उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतारें।