क्या कहते हैं आंकड़े

नवभारत टाइम्स

वित्त वर्ष 2025 तक बैंक डिपॉजिट पर निर्भरता घटी है। आम लोगों की इक्विटी होल्डिंग में भारी वृद्धि हुई है। कुल घरेलू वित्तीय संपत्तियों में शेयर और इन्वेस्टमेंट फंड का हिस्सा 23% तक पहुंच गया है। म्यूचुअल फंड के जरिए निवेश भी बढ़ा है। यह बदलाव वित्तीय नियोजन में नई दिशाएं खोल रहा है।

statistics reveal moving away from bank deposits common mans trust growing in equities
वित्त वर्ष 2025 तक, आम लोगों की बैंक डिपॉजिट में हिस्सेदारी घटकर 35.2% रह जाएगी, जो वित्त वर्ष 12 में 57.9% थी। वहीं, सितंबर 2025 तक आम लोगों की कुल इक्विटी होल्डिंग 84 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगी, जो वित्त वर्ष 14 में सिर्फ 8 लाख करोड़ रुपये थी। कुल घरेलू वित्तीय संपत्तियों में शेयर और इन्वेस्टमेंट फंड का हिस्सा 23% हो गया है, जिसमें म्यूचुअल फंड के जरिए निवेश की हिस्सेदारी 9.2% है। यह दिखाता है कि लोग अब बैंक में पैसे रखने के बजाय शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में ज्यादा निवेश कर रहे हैं।

पहले लोग अपना पैसा बैंक में फिक्स डिपॉजिट (FD) या सेविंग अकाउंट में रखना पसंद करते थे। लेकिन अब हालात बदल गए हैं। वित्त वर्ष 2025 तक, बैंक डिपॉजिट में लोगों की हिस्सेदारी काफी कम होकर 35.2% रह जाएगी। यह आंकड़ा वित्त वर्ष 2012 में 57.9% था। इसका मतलब है कि लोग अब बैंक में कम पैसा रख रहे हैं।
इसके उलट, शेयर बाजार में लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है। सितंबर 2025 तक, आम लोगों के पास कुल 84 लाख करोड़ रुपये की इक्विटी (शेयर) होगी। यह बहुत बड़ी रकम है, क्योंकि वित्त वर्ष 2014 में यह सिर्फ 8 लाख करोड़ रुपये थी। यानी, पिछले कुछ सालों में शेयर बाजार में निवेश कई गुना बढ़ गया है।

कुल मिलाकर, लोग जो पैसा वित्तीय संपत्तियों में लगा रहे हैं, उसमें से 23% हिस्सा शेयर और इन्वेस्टमेंट फंड का है। इसमें भी म्यूचुअल फंड का योगदान 9.2% है। म्यूचुअल फंड एक ऐसा तरीका है जिसमें बहुत सारे लोगों का पैसा एक साथ इकट्ठा करके शेयर बाजार या दूसरी जगहों पर लगाया जाता है। यह छोटे निवेशकों के लिए शेयर बाजार में निवेश करने का एक आसान तरीका है।

यह बदलाव दिखाता है कि लोग अब अपने पैसे को बढ़ाने के लिए ज्यादा जोखिम लेने को तैयार हैं। वे बैंक की तुलना में शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड से ज्यादा रिटर्न की उम्मीद कर रहे हैं।