दूषित पानी क्यों?

नवभारत टाइम्स

देश के कई शहरों में पीने के पानी की गुणवत्ता एक बड़ी चुनौती बन गई है। इंदौर में सीवरेज मिला पानी पीने से सैकड़ों लोग बीमार हुए और कई की मौत हो गई। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, हरियाणा और पंजाब जैसे राज्यों में भी गर्मियों में पानी की उपलब्धता और गुणवत्ता दोनों चिंता का विषय हैं।

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इंदौर में सीवरेज मिला दूषित पानी पीने से सैकड़ों लोगों के बीमार पड़ने और कई लोगों की मौत होने की घटना ने देश भर में पेयजल की गंभीर समस्या को उजागर किया है। यह घटना दर्शाती है कि स्वच्छता रैंकिंग और ज़मीनी हकीकत में कितना बड़ा अंतर है। 6 जनवरी को प्रकाशित एक लेख में आलोक मेहता ने इस समस्या पर चिंता जताई है। यह समस्या सिर्फ इंदौर तक सीमित नहीं है, बल्कि दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, हरियाणा और पंजाब जैसे राज्यों के कई इलाकों में भी देखी जा रही है। इन राज्यों में गर्मियों में पानी की कमी के साथ-साथ पानी की गुणवत्ता भी एक बड़ी चुनौती बन गई है। यह जानकारी विभूति बुपक्या ने ईमेल के ज़रिए दी है।

लेख में बताया गया है कि कैसे नलों में सीवरेज का गंदा पानी आ रहा है। इससे लोग बीमार पड़ रहे हैं और कुछ की तो जान भी चली गई है। यह साफ दिखाता है कि कागजों पर स्वच्छता के जो दावे किए जाते हैं, वे हकीकत से कोसों दूर हैं।
यह समस्या देश के कई बड़े राज्यों में फैली हुई है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, हरियाणा और पंजाब के कुछ हिस्सों में भी लोग इसी तरह की मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। गर्मियों के मौसम में तो यह समस्या और भी बढ़ जाती है। लोगों को न सिर्फ पानी की कमी झेलनी पड़ती है, बल्कि जो पानी मिलता है, वह भी पीने लायक नहीं होता।

विभूति बुपक्या ने इस मुद्दे पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि "6 जनवरी को प्रकाशित आलेख 'देशभर में हैं पेयजल से जुड़ी बड़ी चुनौतियां' पढ़कर चिंता हुई।" उन्होंने आगे कहा, "इसमें आलोक मेहता ने इंदौर के दूषित पानी के संकट के बाद देश के अन्य शहरों की स्वच्छ पेयजल के मामले में दयनीय स्थिति का वर्णन किया है।" बुपक्या ने इस बात पर ज़ोर दिया कि "नलों में सीवरेज मिला पानी पहुंचने से सैकड़ों लोगों का बीमार पड़ना और कई मौतें होना इस बात का प्रमाण है कि स्वच्छता रैंकिंग और जमीनी हकीकत के बीच गहरी खाई है।" उन्होंने यह भी बताया कि "ऐसी ही स्थिति कमोबेश दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, हरियाणा और पंजाब जैसे राज्यों में कुछ जगहों पर भी देखने को मिलती है।" अंत में उन्होंने कहा, "इन राज्यों में गर्मियों में पानी की उपलब्धता के साथ-साथ उसकी गुणवत्ता भी बड़ी चुनौती बन चुकी है।"