Uncontrolled Stray Animals In Faridabad Rising Accidents On Roads Fear Among People
लावारिस पशुओं से बढ़ रहे हादसे के खतरे
नवभारत टाइम्स•
फरीदाबाद शहर में लावारिस पशुओं की बढ़ती संख्या से लोगों की सुरक्षा खतरे में है। सड़कों पर घूमते सांड और गायें आए दिन दुर्घटनाओं का कारण बन रही हैं। निगम अधिकारी पशुओं को गोशालाओं में भेजने का दावा कर रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत अलग है।
फरीदाबाद में लावारिस पशुओं का आतंक लोगों के लिए सिरदर्द बन गया है। सड़कों और गलियों में घूमते सांड और गायें आए दिन हादसे कर रहे हैं, जिससे लोग डरे हुए हैं। नगर निगम का दावा है कि हर दिन 5-6 पशुओं को गोशालाओं में भेजा जा रहा है, लेकिन हकीकत इससे कोसों दूर है। शहर में इन बेसहारा पशुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है।
बल्लभगढ़ के मोहना रोड पर पंजाबी धर्मशाला के पास तो दिनभर लावारिस पशुओं का झुंड जमा रहता है। खासकर जहां कूड़ा फेंका जाता है, वहां इनकी तादाद ज्यादा देखने को मिलती है। कुछ पशुओं के कानों पर पीले रंग के प्लास्टिक टैग भी लगे हैं। ये पशु सेक्टर-3 और 4 जैसे रिहायशी इलाकों की गलियों तक पहुंच जाते हैं। सेक्टर-3 में गुरु नानक पार्क के पास तो सांड खड़ी कारों, बाइकों और स्कूटरों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। स्थानीय लोगों ने नगर निगम और पार्षदों से कई बार शिकायत की है, लेकिन उन्हें अब तक कोई समाधान नहीं मिला है। तिगांव रोड, सिही गेट रोड और अग्रवाल कॉलेज के सामने भी लावारिस पशुओं का झुंड देखा जा सकता है। कॉलेज आने-जाने वाले छात्रों को भी इन पशुओं से खतरा है।नगर निगम के एमओएच नितिन परवार ने बताया कि पूरे शहर को लावारिस पशुओं से मुक्त कराने का अभियान चल रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जल्द ही पूरा शहर कैटल फ्री हो जाएगा।
शहर की सड़कों पर लावारिस पशुओं की बढ़ती संख्या लोगों के लिए एक बड़ी समस्या बन गई है। ये पशु न सिर्फ यातायात में बाधा डालते हैं, बल्कि लोगों की जान के लिए भी खतरा पैदा करते हैं। खासकर बच्चे और बुजुर्ग इन पशुओं से ज्यादा डरते हैं। कई बार इन पशुओं के कारण छोटे-मोटे हादसे हो जाते हैं, जिनमें लोगों को चोटें भी आती हैं।
खुले में फेंका जाने वाला कूड़ा इन पशुओं को आकर्षित करता है। जब लोग कूड़ा इधर-उधर फेंकते हैं, तो ये पशु खाने की तलाश में वहां जमा हो जाते हैं। इससे न केवल गंदगी फैलती है, बल्कि पशुओं की संख्या भी बढ़ती है। नगर निगम के अधिकारी भले ही दावा करें कि वे पशुओं को गोशालाओं में भेज रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। सड़कों पर पशुओं की संख्या कम होने के बजाय बढ़ती ही जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने कई बार नगर निगम से शिकायत की है। उन्होंने पार्षदों से भी मदद मांगी है, लेकिन उनकी शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। लोगों का कहना है कि जब तक नगर निगम इस समस्या पर गंभीरता से ध्यान नहीं देगा, तब तक यह परेशानी बनी रहेगी।
नगर निगम के एमओएच नितिन परवार ने कहा है कि "पूरे शहर को कैटल मुक्त करने का अभियान जारी है। जल्द ही पूरे शहर को कैटल फ्री कर दिया जाएगा।" यह आश्वासन लोगों को उम्मीद दे रहा है कि जल्द ही उन्हें इस समस्या से निजात मिलेगी। लेकिन इस वादे को हकीकत में बदलने के लिए नगर निगम को ठोस कदम उठाने होंगे।