Sanitation Workers Losing Lives In Sewer Filth Claims Of Robots machines Exposed
दावों में रोबॉट और मशीनें, असल में जान पर भारी सीवर की गंदगी
Contributed by: Sunil.Pandey2|नवभारतटाइम्स.कॉम•
n NBT रिपोर्ट, नोएडा/ग्रेटर नोएडा
जिले में कागजों पर सीवर की सफाई के लिए रोबॉट और आधुनिक सुपर सकर मशीनों के दावे किए जाते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि आज भी सफाईकर्मियों को मौत के कुएं (मैनहोल) में बिना सुरक्षा उपकरणों के उतारा जा रहा है। मंगलवार को नोएडा में सीवर की मैनुअल सफाई के दौरान एक कर्मचारी की जहरीली गैस से हुई मौत ने न केवल अधिकारियों के दावों की पोल खोल दी है, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की सरेआम उड़ रही धज्जियों को भी उजागर किया है।वर्ष 2023 में डॉ. बलराम सिंह बनाम भारत संघ मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मैनुअल स्कैवेंजिंग (हाथ से मैला ढोने) और सीवर की हाथ से सफाई को पूरी तरह प्रतिबंधित करते हुए सख्त निर्देश जारी किए थे। कोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि किसी भी स्थिति में इंसानों को सीवर लाइन में नहीं उतारा जाएगा। बावजूद इसके, नोएडा में ठेका प्रथा के तहत यह जानलेवा खेल जारी है। सवाल यह है कि जब अधिकारियों को पता है कि यह अवैध है, तो इसकी मॉनिटरिंग क्यों नहीं की जा रही?
हादसे के बाद नोएडा प्राधिकरण ने आनन-फानन में ठेकेदार पर मुकदमा दर्ज कर उसे ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। लेकिन स्थानीय निवासियों का सवाल है कि कार्रवाई हमेशा जान जाने के बाद ही क्यों होती है? प्राधिकरण के जीएम (जल/सीवर) आरपी सिंह ने माना कि ठेकेदार ने शाम 6:30 बजे सफाईकर्मी को उतारा, जबकि 5 बजे के बाद सफाई प्रतिबंधित है।
उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि प्राधिकरण के पास अपनी 3 सुपर सकर मशीनें और 6 अन्य क्लीनिंग मशीनें हैं, फिर भी ठेकेदार ने मशीनों का उपयोग क्यों नहीं किया? यह सीधे तौर पर प्रशासनिक निगरानी में बड़ी चूक की ओर इशारा करता है।
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि कुमार का कहना है कि शहर की सीवर व्यवस्था दुरुस्त करने के साथ ही कर्मचारियों की सुरक्षा का ध्यान रखा जा रहा है और गांवों में प्राथमिकता के आधार पर काम हो रहा है।