जीवन का काव्य

नवभारत टाइम्स

कश्मीर की संत कवयित्री लाल देद ने बचपन से कठिनाइयाँ झेलीं। सास की उपेक्षा के बावजूद शिव भक्ति में लीन रहीं। घर छोड़कर साधना पथ पर निकलीं। गुरु सिद्ध श्रीकांत से प्रेरित होकर 'वाख' की रचना की। उनके पद जीवन, आध्यात्म और मानवता का मार्ग दिखाते हैं। आज भी कश्मीर में उनका प्रभाव है।

lal ded the saint poetess of kashmir who ignited humanitys example through shiva devotion and poetry amidst adversity
कश्मीर की संत-कवयित्री लाल देद , जिन्हें लल्लेश्वरी के नाम से भी जाना जाता है, ने विपरीत परिस्थितियों में भी अपनी मजबूत इच्छाशक्ति और अटूट संकल्प से लोगों को प्रेरित किया। बचपन से ही अपमान और यातना झेलने वाली लाल देद ने 12 साल की उम्र में विवाह के बाद भी सास की कठोरता और उपेक्षा को शिव भक्ति में अडिग रहकर पार किया। 24 साल की उम्र में घर छोड़कर साधना पथ पर निकलीं और सूफी संत गुरु सिद्ध श्रीकांत के संपर्क में आने के बाद उन्होंने अपने जीवन के अनुभवों को 'वाख' नामक काव्य में ढाला, जो आज भी कश्मीरियत और मानवीय एकता का संदेश देते हैं।

लाल देद का जीवन संघर्षों से भरा था। बचपन में उन्हें अपनी मां से भी तिरस्कार मिला। 12 साल की उम्र में जब उनका विवाह हुआ, तब भी उन्हें ससुराल में सास की कठोरता और उपेक्षा का सामना करना पड़ा। उन्हें पेट भर खाना भी नहीं मिलता था, लेकिन इन मुश्किलों के बावजूद उनकी शिव भक्ति जरा भी कम नहीं हुई।
24 साल की उम्र में, लाल देद ने घर छोड़ दिया और ईश्वर की तलाश में निकल पड़ीं। लोग उन्हें पागल समझते थे और उनका मजाक उड़ाते थे, लेकिन वह अपने रास्ते पर डटी रहीं। उनकी मुलाकात सूफी संत गुरु सिद्ध श्रीकांत से हुई। इस मुलाकात के बाद, लाल देद ने अपने जीवन के अनुभवों और आध्यात्मिक ज्ञान को कविताओं में लिखना शुरू किया।

इन कविताओं को 'वाख' कहा जाता है। इन वाखों में जीवन का सच्चा अर्थ, आध्यात्मिकता और मानवता का रास्ता दिखाया गया है। लाल देद के वाख इतने लोकप्रिय हुए कि वे आम लोगों की जुबान पर चढ़ गए और उनके दैनिक जीवन का हिस्सा बन गए।

आज भी, एक हजार साल बाद, कश्मीर में लाल देद का प्रभाव कायम है। हिंदू और मुसलमान दोनों ही उन्हें बहुत सम्मान देते हैं। लाल देद की वाणी आज भी कश्मीर की संस्कृति और लोगों की एकता का संदेश देती है। यह हमें सिखाती है कि मजबूत इरादों के आगे कोई भी मुश्किल टिक नहीं सकती।