Save Water Celebrate Holi Growing Craze For Dry Holi Message Of Responsible Citizenship
ज़िम्मेदारी का अहसास, बिना पानी वाली होली का क्रेज
नवभारत टाइम्स•
शहर में होली की तैयारियां चल रही हैं। जल संकट को देखते हुए कई सोसायटियों और आरडब्ल्यूए ने ड्राई होली मनाने का फैसला किया है। पानी की बर्बादी रोकने के लिए रंग-गुलाल और फूलों की होली पर जोर दिया जा रहा है। स्कूलों में भी बच्चों को सुरक्षित होली का संदेश दिया जा रहा है।
गुड़गांव में होली की तैयारियां ज़ोरों पर हैं, लेकिन इस बार रंगों के साथ-साथ पानी बचाने की ज़िम्मेदारी भी निभाई जा रही है। शहर की कई सोसायटियों, आरडब्ल्यूए और सामाजिक संगठनों ने ' ड्राई होली ' मनाने का फैसला किया है। इसका मकसद त्योहार की खुशियों को बनाए रखते हुए पानी की बर्बादी रोकना है। हाउसिंग सोसायटियों में रंग-गुलाल और फूलों की होली के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों की योजना है, लेकिन पानी की टंकियों, पाइप या वॉटर गन के इस्तेमाल को सीमित रखने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। आरडब्ल्यूए का कहना है कि शहर पहले से ही पानी की किल्लत झेल रहा है, ऐसे में एक दिन के उत्सव के लिए हजारों लीटर पानी बर्बाद करना समझदारी नहीं है। स्कूलों ने भी बच्चों को 'सेफ एंड ड्राई होली' का संदेश दिया है, ताकि उनमें बचपन से ही संसाधनों के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित हो सके। पर्यावरणविदों का मानना है कि 15-20 प्रतिशत आरडब्ल्यूए का भी ड्राई होली के लिए आगे आना एक अच्छी पहल है, जिससे न सिर्फ पानी बचेगा बल्कि त्योहार का असली मतलब भी लोगों तक पहुंचेगा।
इस बार होली के मौके पर गुड़गांव में एक अलग ही रंग देखने को मिलेगा। जहां एक तरफ लोग रंगों के त्योहार का जश्न मनाने के लिए उत्साहित हैं, वहीं दूसरी तरफ पानी की कमी को देखते हुए समझदारी भी दिखा रहे हैं। कई सोसायटियों और आरडब्ल्यूए ने मिलकर यह तय किया है कि वे 'ड्राई होली' मनाएंगे। इसका मतलब है कि पानी का इस्तेमाल कम से कम किया जाएगा। लोग रंग-गुलाल और फूलों से होली खेलेंगे।आयोजकों ने साफ कहा है कि पानी की टंकियों, पाइपों या वॉटर गन का इस्तेमाल बहुत कम करना होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि गुड़गांव शहर पहले से ही पानी की समस्या से जूझ रहा है। आरडब्ल्यूए का कहना है कि एक दिन की खुशी के लिए हजारों लीटर पानी बहा देना बिल्कुल भी सही नहीं है।
स्कूल भी इस मुहिम में पीछे नहीं हैं। उन्होंने बच्चों को 'सेफ एंड ड्राई होली' का संदेश दिया है। शिक्षकों का मानना है कि अगर बच्चों में बचपन से ही चीजों को बचाने और जिम्मेदारी निभाने की आदत डाली जाए, तो समाज में बड़ा बदलाव आ सकता है।
पर्यावरणविद वैशाली राणा ने इस पहल की सराहना की है। उन्होंने कहा कि शहर की 15 से 20 प्रतिशत आरडब्ल्यूए का भी ड्राई होली मनाने के लिए आगे आना एक बहुत ही सकारात्मक कदम है। इससे न केवल पानी की बचत होगी, बल्कि लोगों को त्योहार का असली मतलब भी समझ आएगा। त्योहार सिर्फ मौज-मस्ती का नहीं, बल्कि जिम्मेदारी निभाने का भी मौका है।