bike rally

नवभारत टाइम्स

कोलकाता की कृष्णा सिंह ने मुश्किलों का सामना करते हुए बाइकिंग का सपना देखा। पति के सहयोग से उन्होंने 2014 में एक्टिवा से शुरुआत की। आज वह ऑल इंडिया बाइकरनी ग्रुप की दिल्ली से प्रतिनिधि हैं। कृष्णा ने साबित किया कि बड़े सपने के लिए बड़ा हौसला चाहिए।

krishna singh an inspiring journey from an ordinary family to leading a bike rally
कोलकाता की रहने वाली कृष्णा सिंह ने अपनी मेहनत और हौसले से बाइकिंग के अपने सपने को हकीकत में बदला है। एक साधारण परिवार में जन्मीं कृष्णा ने बचपन में ही पिता को खो दिया था। मां ने दिल्ली आकर घरों में काम करके बच्चों को पाला। इन मुश्किलों के बावजूद, कृष्णा का सपना था दो पहियों पर आज़ादी का एहसास, चाहे वह साइकिल हो या स्कूटी। शादी के बाद भी उन्होंने पारंपरिक सोच को तोड़ते हुए, अपने पति और ससुराल वालों के सहयोग से 2014 में बाइक चलाना सीखा। उन्होंने एक साधारण एक्टिवा स्कूटर से शुरुआत की और साबित किया कि बाइकिंग में गाड़ी से ज्यादा हिम्मत की कद्र होती है। आज वह ऑल इंडिया बाइकरनी ग्रुप की दिल्ली से प्रतिनिधि हैं और अपनी कहानी से दूसरों को प्रेरित कर रही हैं कि किसी भी सपने को पूरा करने के लिए बड़ा हौसला चाहिए, न कि कोई बड़ी चीज।

कृष्णा सिंह की कहानी हमें सिखाती है कि जिंदगी का सफर हमेशा एक तय रास्ते पर नहीं चलता। कोलकाता के एक आम परिवार में जन्मीं कृष्णा का बचपन काफी संघर्षों भरा रहा। उनके पिता के निधन के बाद, उनकी मां उन्हें दिल्ली ले आईं। वहां उन्होंने घरों में काम करके अपने बच्चों की परवरिश की। इन कठिन परिस्थितियों में भी कृष्णा के मन में एक शांत सा सपना पल रहा था। वह चाहती थीं कि उन्हें दो पहियों पर चलने की आज़ादी मिले। चाहे वह साइकिल हो या फिर स्कूटी, उन्हें सड़कों पर बेफिक्र होकर घूमने की ख्वाहिश थी।
जब कृष्णा की शादी हुई, तो लोगों को लगा कि उनकी जिंदगी भी एक पारंपरिक हरियाणवी परिवार की तरह सिमट जाएगी। लेकिन उनके पति और ससुराल वालों ने इस सोच को गलत साबित कर दिया। उन्होंने यह साबित किया कि बाइक चलाना सिर्फ पुरुषों का काम नहीं है। साल 2014 में, उनके पति ने उन्हें बाइक चलाना सिखाया। यहीं से कृष्णा की असली यात्रा शुरू हुई।

कृष्णा ने शुरुआत किसी महंगी या बड़ी बाइक से नहीं की। उन्होंने एक साधारण एक्टिवा स्कूटर से अपना सफर शुरू किया। अक्सर लोग बाइकिंग को सिर्फ अमीरों का शौक समझते हैं। लेकिन कृष्णा ने पाया कि इस दुनिया में गाड़ी के मॉडल से ज्यादा आपकी हिम्मत को महत्व दिया जाता है। वह कहती हैं, "बाइकिंग कम्युनिटी में किसी ने मेरा स्टेटस या बाइक का मॉडल नहीं देखा बल्कि सबने मेरा पैशन देखा।"

आज कृष्णा ऑल इंडिया बाइकरनी ग्रुप की दिल्ली से प्रतिनिधि हैं। एक समय था जब वह सिर्फ सड़क पर गुजरती बाइकों को देखा करती थीं। और आज वह खुद एक ग्रुप का नेतृत्व कर रही हैं। उन्होंने यह साबित कर दिया है कि किसी भी सपने की शुरुआत के लिए कोई बड़ी चीज नहीं, बल्कि एक बड़ा हौसला चाहिए।

कृष्णा का मानना है कि हर किसी के पास उड़ने के लिए पंख होते हैं, बस उन्हें उड़ने की हिम्मत चाहिए। उनकी कहानी हमें याद दिलाती है कि आपकी शुरुआत आपकी मंजिल तय नहीं करती। चाहे आपका सफर साइकिल से शुरू हो या एक बड़ी मोटरसाइकिल से, सड़क पर हर कोई बराबर है। बस जरूरत है तो हिम्मत करके इंजन स्टार्ट करने की।